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बिहार में नेपाल और तिब्बत से अचानक बढ़े जलस्तर के कारण बाढ़ का खतरा बढ़ा। CM सम्राट चौधरी ने 20 हजार लोगों के रेस्क्यू, नदी जोड़ो परियोजनाओं और तटबंध मजबूती की जानकारी दी।
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंगलवार को नेपाल और तिब्बत के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों से अचानक बढ़े जलस्तर के कारण राज्य में पैदा हुई बाढ़ की स्थिति और सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की विस्तृत जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार भौगोलिक रूप से निचले जल प्रवाह वाले क्षेत्र में स्थित है, जिसके कारण नेपाल से आने वाला अतिरिक्त पानी हर साल राज्य के लिए गंभीर चुनौती पैदा करता है। अचानक पानी बढ़ने की स्थिति में उत्तर बिहार के कई जिलों में बाढ़ का खतरा तेजी से बढ़ जाता है। मुख्यमंत्री के अनुसार, राज्य में बाढ़ के प्रमुख स्रोतों में दो बड़ी नदियां शामिल हैं, जबकि बूढ़ी गंडक, बागमती, कमला और महानंदा जैसी अन्य नदियां भी बरसात के मौसम में बड़ी मात्रा में पानी लेकर बिहार में प्रवेश करती हैं।
अचानक जलप्रवाह के बीच राहत और बचाव अभियान
सम्राट चौधरी ने बताया कि हाल में नेपाल की ओर से अचानक आई बाढ़ की लहर का सीधा प्रभाव बिहार के निचले इलाकों में देखने को मिला। स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने तत्काल राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की टीमों को संवेदनशील इलाकों में तैनात किया गया। इन टीमों ने नदी के किनारे और नदी तल के आसपास फंसे करीब 20 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। सरकार का प्राथमिक उद्देश्य लोगों की जान बचाना और उन्हें तेज जलप्रवाह तथा संभावित कटाव से दूर सुरक्षित क्षेत्रों में स्थानांतरित करना था।
मुख्यमंत्री ने बताया कि विस्थापित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के बाद उनके लिए सामुदायिक रसोई की व्यवस्था भी की गई। करीब दो से तीन दिनों तक इन सामुदायिक रसोई के माध्यम से प्रभावित लोगों को भोजन उपलब्ध कराया गया। सरकार ने तब तक राहत व्यवस्था जारी रखी, जब तक पानी का स्तर धीरे-धीरे सामान्य होने नहीं लगा। मुख्यमंत्री के मुताबिक, बचाव और राहत अभियानों के बाद स्थिति में धीरे-धीरे सुधार आया और प्रभावित इलाकों में जलस्तर स्थिर होने लगा।
बाढ़ से स्थायी राहत के लिए नदी जोड़ने की योजना
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट किया कि बिहार सरकार केवल आपातकालीन राहत तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान के लिए बड़े जल संसाधन और नदी प्रबंधन परियोजनाओं पर भी काम कर रही है। उन्होंने बताया कि राज्य में नदी जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। बागमती और बूढ़ी गंडक नदियों के बीच इंटरलिंकिंग का काम पूरा होने की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि इससे अतिरिक्त बाढ़ के पानी को नियंत्रित करने और जरूरत वाले क्षेत्रों तक जल पहुंचाने में मदद मिल सकती है।
इसके साथ ही केंद्र सरकार के सहयोग से कोसी-मेची लिंक परियोजना पर भी काम आगे बढ़ाया जा रहा है। इस परियोजना का उद्देश्य अतिरिक्त बाढ़ के पानी का बेहतर प्रबंधन करते हुए पूर्वी बिहार के उन क्षेत्रों तक पानी पहुंचाना है, जहां सिंचाई की पर्याप्त सुविधा उपलब्ध नहीं है। सरकार का मानना है कि नदी जोड़ने वाली परियोजनाएं एक तरफ बाढ़ के प्रभाव को कम कर सकती हैं, वहीं दूसरी ओर कृषि और सिंचाई के लिए जल उपलब्ध कराने में भी मददगार साबित हो सकती हैं।
कोसी और गंडक के लिए तैयार हो रहे व्यापक DPR
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार कोसी और गंडक नदी तंत्र को व्यापक रूप से मजबूत करने के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कर रही है। इन योजनाओं में नदियों के पूरे पारिस्थितिकी तंत्र, तटबंधों की सुरक्षा, जल प्रवाह के प्रबंधन और भविष्य में बाढ़ के प्रभाव को कम करने के उपायों को शामिल किया जा रहा है। इसके लिए बिहार सरकार को केंद्र की विभिन्न एजेंसियों से सहयोग मिल रहा है।
सम्राट चौधरी के अनुसार, राज्य सरकार केंद्रीय जल आयोग (CWC) और NABARD के सहयोग से ऊपरी क्षेत्रों में उच्चस्तरीय बांधों के निर्माण और नदी घाटियों की सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से बिहार की बाढ़ समस्या के समाधान के लिए महत्वपूर्ण सहयोग मिला है। मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री और विदेश मंत्री से भी मुलाकात कर नेपाल से आने वाले पानी के प्रभाव को नियंत्रित करने के लिए उच्चस्तरीय बांधों और DPR को अंतिम रूप देने की आवश्यकता पर चर्चा की है।
तटबंधों की मरम्मत पर सरकार का जोर
बिहार सरकार बाढ़ से बचाव के लिए तटबंधों की मरम्मत और मजबूती पर भी लगातार ध्यान दे रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में तटबंधों की मरम्मत का काम धीरे-धीरे किया गया है और संवेदनशील स्थानों को मजबूत करने के प्रयास जारी हैं। उत्तर बिहार की भौगोलिक स्थिति के कारण नेपाल के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों से आने वाला तेज पानी शुरुआती लगभग 100 किलोमीटर के हिस्से में नदी किनारों पर भारी दबाव डालता है। इससे कटाव और तटबंधों के टूटने का खतरा बढ़ जाता है।
मुख्यमंत्री ने वर्ष 2008-09 की कोसी त्रासदी का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय तटबंध टूटने के कारण पूर्णिया और कोसी क्षेत्र के बड़े हिस्से में भीषण बाढ़ आई थी। इस घटना ने बिहार में बाढ़ प्रबंधन की चुनौतियों को गंभीरता से सामने रखा था। इसी अनुभव को देखते हुए सरकार का जोर लगातार तटबंधों की निगरानी, मरम्मत और सुदृढ़ीकरण पर है।
दीर्घकालिक समाधान की दिशा में प्रयास
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार को हर साल नेपाल से आने वाले पानी के कारण बाढ़ की चुनौती का सामना करना पड़ता है। ऐसे में केवल राहत और बचाव अभियान चलाना पर्याप्त नहीं है। स्थायी समाधान के लिए नदी जोड़ने, उच्चस्तरीय बांधों के निर्माण, तटबंधों को मजबूत करने और नदियों के पूरे जल तंत्र के वैज्ञानिक प्रबंधन की जरूरत है। राज्य सरकार केंद्र सरकार और संबंधित केंद्रीय एजेंसियों के सहयोग से इन योजनाओं को आगे बढ़ाने पर काम कर रही है। हालिया बाढ़ के दौरान करीब 20 हजार लोगों को सुरक्षित निकालना सरकार की तत्काल प्रतिक्रिया को दर्शाता है, जबकि कोसी-मेची लिंक, बागमती-बूढ़ी गंडक इंटरलिंकिंग और प्रस्तावित बांध व तटबंध परियोजनाएं बिहार को भविष्य में बार-बार आने वाली बाढ़ से दीर्घकालिक सुरक्षा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही हैं।