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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बर्लिन में संकेत दिया कि भारत ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने में मध्यस्थ बन सकता है। ट्रंप ने सीजफायर बढ़ाया लेकिन ईरान ने इसे अमेरिका की चाल बताया है।
पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच गहराते सैन्य और कूटनीतिक तनाव के बीच भारत ने मध्यस्थता के संकेत दिए हैं। जर्मनी की आधिकारिक यात्रा पर गए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को बर्लिन में एक महत्वपूर्ण संबोधन के दौरान कहा कि भारत भविष्य में दोनों देशों के बीच तनाव को कम करने में एक निर्णायक भूमिका निभा सकता है। उन्होंने विश्वास जताया कि यदि अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए समय की मांग हुई, तो भारत इस दिशा में गंभीर प्रयास करेगा और उसमें सफल भी होगा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर उपजे गंभीर मतभेदों के कारण पाकिस्तान में प्रस्तावित दूसरे दौर की शांति वार्ता अचानक रुक गई है।
प्रधानमंत्री मोदी के संतुलित दृष्टिकोण की सराहना
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीतिक कुशलता पर विशेष जोर देते हुए कहा कि भारत हमेशा से वैश्विक शांति का पक्षधर रहा है। उन्होंने उल्लेख किया कि प्रधानमंत्री मोदी ने पहले ही दोनों पक्षों से युद्ध खत्म करने और हिंसा का रास्ता छोड़कर बातचीत की मेज पर आने की पुरजोर अपील की है। राजनाथ सिंह के अनुसार, प्रधानमंत्री का अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक मामलों में दृष्टिकोण हमेशा से संतुलित और न्यायपूर्ण रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत चाहता है कि इस वैश्विक संकट का समाधान केवल कूटनीतिक चर्चा और आपसी सहमति से निकले, ताकि पश्चिम एशिया सहित पूरी दुनिया में स्थिरता बनी रहे।
ट्रंप का सीजफायर विस्तार और पाकिस्तान की मध्यस्थता
तनावपूर्ण माहौल के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने एक बड़ी घोषणा करते हुए ईरान के साथ चल रहे युद्ध में दो हफ्ते का युद्धविराम (Ceasefire) बढ़ाने का निर्णय लिया है। ट्रंप ने इस फैसले का श्रेय पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के विशेष अनुरोध को दिया है। अमेरिका का रुख फिलहाल यह है कि सैन्य हमले को इसलिए रोका गया है ताकि ईरानी नेतृत्व को एक संयुक्त शांति प्रस्ताव तैयार करने और पेश करने का अवसर मिल सके। पाकिस्तान इस समय दोनों महाशक्तियों के बीच एक सक्रिय मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है, ताकि क्षेत्र को एक बड़े युद्ध की आग से बचाया जा सके।
ईरान का कड़ा रुख और रणनीतिक संदेह
दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिका द्वारा बढ़ाए गए इस युद्धविराम को लेकर गहरा संदेह व्यक्त किया है। ईरान के वरिष्ठ अधिकारी मेहदी मोहम्मदी ने कड़े शब्दों में कहा कि “हारने वाला पक्ष शर्तें तय नहीं कर सकता।” ईरान का मानना है कि यह युद्धविराम केवल अमेरिका की समय लेने की एक रणनीति (Delaying Tactic) हो सकती है, ताकि वह अचानक और बड़े सैन्य हमले की तैयारी कर सके। मोहम्मदी ने चेतावनी दी कि यदि ईरान पर कूटनीतिक या आर्थिक दबाव जारी रहा, तो इसका जवाब सैन्य तरीके से दिया जाएगा। ईरान का यह अड़ियल रुख दर्शाता है कि जब तक परमाणु कार्यक्रम पर कोई ठोस सहमति नहीं बनती, तब तक जमीन पर हालात नाजुक बने रहेंगे।