Table of Contents
पहलगाम आतंकी हमले के एक साल बाद जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था ने जबरदस्त वापसी की है। 1.7 करोड़ पर्यटकों की आमद और 1200 से अधिक स्टार्टअप्स के साथ घाटी विकास की नई राह पर है।
जम्मू-कश्मीर में 22 अप्रैल 2025 को हुए कायराना पहलगाम आतंकी हमले को आज एक साल पूरा हो गया है। उस दर्दनाक घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था और घाटी की अर्थव्यवस्था पर अस्थायी रूप से संकट के बादल मंडराते नजर आए थे। लेकिन एक साल बाद, जम्मू-कश्मीर ने न केवल उस सदमे से वापसी की है, बल्कि विकास की एक नई इबारत लिख दी है। आज का जम्मू-कश्मीर पर्यटन, निवेश और स्टार्टअप्स के मामले में एक ‘रिकवरी स्टोरी’ पेश कर रहा है।
पर्यटन: डर पर भारी पड़ी आस्था और खूबसूरती
2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद पर्यटन क्षेत्र, जो इस केंद्र शासित प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, को तत्काल झटका लगा था। कई बुकिंग्स रद्द हो गईं और सुरक्षा चिंताओं के कारण कई रिसॉर्ट्स कुछ समय के लिए बंद रहे। लेकिन पर्यटकों का घाटी के प्रति लगाव कम नहीं हुआ।
- मजबूत आंकड़े: ताजा आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 में 1.7 करोड़ से अधिक पर्यटकों ने जम्मू-कश्मीर का दौरा किया।
- तुलना: हालांकि यह आंकड़ा 2024 के रिकॉर्ड 2.4 करोड़ से थोड़ा कम है, लेकिन 2021 के 1.1 करोड़ के आंकड़े से काफी अधिक है। यह साबित करता है कि यात्रियों ने डर को घाटी के भविष्य पर हावी नहीं होने दिया।
स्टार्टअप इकोसिस्टम: महिलाओं के नेतृत्व में नई क्रांति
जम्मू-कश्मीर अब केवल पर्यटन स्थल तक सीमित नहीं रह गया है। यहाँ उद्यमिता (Entrepreneurship) की एक नई लहर देखी जा रही है, जिसमें महिलाएं बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही हैं।
जम्मू-कश्मीर आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के चौंकाने वाले आंकड़े:
- स्टार्टअप्स की संख्या: साल 2020 में यहाँ केवल 69 स्टार्टअप्स थे, जो दिसंबर 2025 तक बढ़कर 1,255 हो गए हैं।
- महिला सशक्तिकरण: इन स्टार्टअप्स में से 434 का नेतृत्व महिलाएं कर रही हैं। ये स्टार्टअप्स कृषि, आईटी, सेवा क्षेत्र और विनिर्माण (Manufacturing) जैसे क्षेत्रों में सक्रिय हैं।
- सरकारी सहयोग: स्टार्टअप पॉलिसी के तहत सीड फंडिंग, वेंचर कैपिटल सपोर्ट और पेटेंट सहायता जैसी सुविधाओं ने स्थानीय युवाओं के सपनों को नई उड़ान दी है।
निवेश और बढ़ती आय
आर्थिक मोर्चे पर सुधार केवल स्टार्टअप्स तक सीमित नहीं है। केंद्र शासित प्रदेश में बुनियादी ढांचे का विकास और बेहतर होती आय ने स्थानीय लोगों के जीवन स्तर को ऊपर उठाया है। सुरक्षा के सख्त इंतजामों और विकास कार्यों के चलते अब निवेशक भी जम्मू-कश्मीर की ओर आकर्षित हो रहे हैं, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं।