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राहुल गांधी ने अपनी फिटनेस रूटीन का खुलासा किया। वे रोज करीब 1 घंटा फिटनेस के लिए देते हैं और मार्शल आर्ट्स, स्विमिंग, रनिंग व योग करते हैं।
फिटनेस को लेकर अक्सर लोग एक ऐसी परफेक्ट एक्सरसाइज रूटीन की तलाश करते हैं, जिसे फॉलो करके कुछ ही समय में शानदार नतीजे मिल जाएं। लेकिन कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने हाल ही में अपनी फिटनेस रूटीन के बारे में बात करते हुए इसे काफी सरल बताया। एक हालिया AMA सेशन के दौरान एक यूजर ने उनसे उनकी फिटनेस रूटीन के बारे में पूछा। इसके जवाब में राहुल गांधी ने किसी खास या जटिल वर्कआउट प्लान का जिक्र करने के बजाय नियमितता, फिटनेस के लिए समय निकालने और इसे जीवनशैली का हिस्सा बनाने पर जोर दिया।
राहुल गांधी की फिटनेस रूटीन में क्या-क्या शामिल है?
राहुल गांधी के मुताबिक, वह किसी एक तरह की एक्सरसाइज पर निर्भर नहीं रहते। उनकी फिटनेस रूटीन में अलग-अलग तरह की शारीरिक गतिविधियां शामिल हैं। उन्होंने बताया कि वह मार्शल आर्ट्स, स्विमिंग और रनिंग करते हैं। हाल के दिनों में उन्होंने अपनी रूटीन में योग को भी शामिल किया है।
उन्होंने बताया कि आमतौर पर वह थोड़ा मार्शल आर्ट्स करते हैं, जिसे वह पसंद करते हैं। इसके अलावा स्विमिंग और रनिंग भी उनकी एक्सरसाइज का हिस्सा हैं। अब उन्होंने योग भी शुरू किया है। इस तरह उनकी रूटीन में स्ट्रेंथ, कार्डियो और फ्लेक्सिबिलिटी तीनों पहलुओं पर काम करने वाली गतिविधियां शामिल हैं।
किसी एक वर्कआउट को फॉलो करना जरूरी नहीं
राहुल गांधी की बातों से यह संकेत मिलता है कि फिटनेस के लिए हर व्यक्ति को एक ही तरह का वर्कआउट करने की जरूरत नहीं है। किसी को रनिंग पसंद हो सकती है, किसी को स्विमिंग या योग, जबकि कोई व्यक्ति मार्शल आर्ट्स जैसी एक्टिविटी को ज्यादा पसंद कर सकता है।
अलग-अलग एक्सरसाइज को रूटीन में शामिल करने से वर्कआउट में विविधता बनी रहती है। इससे एक ही तरह की गतिविधि से होने वाली बोरियत भी कम हो सकती है। साथ ही शरीर के अलग-अलग हिस्सों और फिटनेस के विभिन्न पहलुओं पर काम करने का मौका मिलता है।
राहुल गांधी की रूटीन में मार्शल आर्ट्स, रनिंग और स्विमिंग जैसी गतिविधियां शरीर की ताकत और एरोबिक क्षमता पर काम करती हैं, जबकि योग फ्लेक्सिबिलिटी, मोबिलिटी और बॉडी कंट्रोल के लिए उपयोगी हो सकता है।
फिटनेस के लिए रोज एक घंटा निकालते हैं राहुल गांधी
राहुल गांधी ने फिटनेस को लेकर सबसे महत्वपूर्ण बात एक घंटे के नियम के बारे में कही। उनके मुताबिक, वह फिटनेस के लिए रोजाना करीब एक घंटा निकालते हैं। उनके लिए एक्सरसाइज ऐसी चीज नहीं है जिसे खाली समय मिलने पर किया जाए, बल्कि यह उनकी नियमित दिनचर्या और कामकाजी जीवन का हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि इस एक घंटे में वह स्ट्रेंथ, एरोबिक कैपेसिटी और फ्लेक्सिबिलिटी पर काम करते हैं। इसका मतलब है कि वह फिटनेस को केवल वजन घटाने या मांसपेशियां बनाने तक सीमित नहीं देखते, बल्कि शरीर की ओवरऑल क्षमता को बेहतर करने पर ध्यान देते हैं।
व्यस्त दिन में भी फिटनेस के लिए समय जरूरी
आज की व्यस्त जिंदगी में सबसे बड़ी चुनौती एक्सरसाइज करने के लिए समय निकालना है। ऑफिस, परिवार और दूसरे कामों के बीच लोग अक्सर वर्कआउट को टाल देते हैं। राहुल गांधी का कहना है कि फिटनेस के लिए सही समय का इंतजार करने के बजाय उसके लिए समय बनाना जरूरी है।
उन्होंने यहां तक कहा कि अगर उन्हें रात 11 बजे एक्सरसाइज करनी पड़े, तो वह उस समय भी कर सकते हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति को रात 11 बजे ही वर्कआउट करना चाहिए। इसका असली संदेश यह है कि फिटनेस को अपनी प्राथमिकताओं में जगह देनी चाहिए।
फिटनेस को खाली समय की गतिविधि न समझें
राहुल गांधी के फिटनेस मंत्र का सबसे अहम हिस्सा यही है कि एक्सरसाइज को ‘फ्री टाइम’ में किए जाने वाले काम की तरह नहीं देखना चाहिए। अगर कोई व्यक्ति अपने दिन में खाली समय मिलने का इंतजार करता रहेगा, तो कई बार वर्कआउट के लिए समय ही नहीं मिल पाएगा।
इसके बजाय फिटनेस को रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाना ज्यादा प्रभावी हो सकता है। जैसे लोग अपने काम, मीटिंग या दूसरे जरूरी कार्यों के लिए समय तय करते हैं, उसी तरह एक्सरसाइज के लिए भी समय निर्धारित किया जा सकता है।
नियमितता किसी भी फिटनेस रूटीन की कुंजी
फिटनेस में सफलता के लिए केवल कठिन एक्सरसाइज करना पर्याप्त नहीं है। नियमितता भी महत्वपूर्ण है। कुछ दिनों तक बहुत ज्यादा वर्कआउट करने के बजाय ऐसी रूटीन बनाना ज्यादा उपयोगी हो सकता है जिसे लंबे समय तक जारी रखा जा सके।
राहुल गांधी की बातों में भी यही विचार नजर आता है। वह किसी ‘मैजिक’ वर्कआउट या शॉर्टकट की बात नहीं करते, बल्कि लगातार फिटनेस के लिए समय निकालने पर जोर देते हैं। उनकी रूटीन में अलग-अलग गतिविधियां शामिल हैं, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण चीज उनकी निरंतरता है।
फिटनेस का मतलब सिर्फ जिम जाना नहीं
राहुल गांधी की रूटीन यह भी दिखाती है कि फिटनेस के लिए जिम जाना ही एकमात्र विकल्प नहीं है। रनिंग, स्विमिंग, योग और मार्शल आर्ट्स जैसी गतिविधियों के जरिए भी शरीर को सक्रिय रखा जा सकता है। अपनी पसंद और फिटनेस स्तर के अनुसार गतिविधि चुनने से वर्कआउट को लंबे समय तक जारी रखना आसान हो सकता है।
हालांकि, किसी भी नई एक्सरसाइज को शुरू करने से पहले अपनी उम्र, फिटनेस स्तर और स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखना जरूरी है। खासकर हाई-इंटेंसिटी एक्सरसाइज या मार्शल आर्ट्स जैसी गतिविधियों को सही तकनीक और प्रशिक्षित विशेषज्ञ की देखरेख में करना बेहतर होता है।
कुल मिलाकर, राहुल गांधी का फिटनेस मंत्र किसी जटिल वर्कआउट प्लान के बजाय नियमितता और अनुशासन पर आधारित है। मार्शल आर्ट्स, स्विमिंग, रनिंग और योग जैसी अलग-अलग गतिविधियों के साथ वह फिटनेस के लिए रोज एक घंटा निकालने पर जोर देते हैं। उनका संदेश सरल है—फिटनेस के लिए खाली समय का इंतजार न करें, बल्कि अपनी दिनचर्या में उसके लिए समय जरूर बनाएं।