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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को युवा डॉक्टरों को संबोधित करते हुए उन्हें नवाचार, अनुसंधान और निरंतर सीखने को अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि तकनीक चिकित्सा क्षेत्र को बदल सकती है, लेकिन यह कभी भी करुणा, नैतिकता और मानवता का स्थान नहीं ले सकती।
राष्ट्रपति मुर्मू नागपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान के दूसरे दीक्षांत समारोह में शामिल हुईं, जहां उन्होंने स्नातक छात्रों को संबोधित किया।
तकनीक से अधिक महत्वपूर्ण मानवीय मूल्य
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि चिकित्सा विज्ञान में जिज्ञासा और शोध की भावना प्रगति की आधारशिला है। उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि नए समाधान खोजने की इच्छा उन्हें बेहतर डॉक्टर और बेहतर इंसान दोनों बनाएगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि चाहे तकनीक कितनी भी उन्नत क्यों न हो जाए, वह कभी भी ईमानदारी, करुणा और मरीज-केंद्रित दृष्टिकोण का विकल्प नहीं बन सकती।
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स्वास्थ्य क्षेत्र में सरकार की पहल
राष्ट्रपति ने केंद्र सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले एक दशक में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उन्होंने बताया कि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत अब तक 43 करोड़ से अधिक स्वास्थ्य कार्ड जारी किए जा चुके हैं, जिससे प्रति परिवार 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य कवरेज मिलता है।
इसके अलावा, उन्होंने बताया कि देशभर में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए 1.85 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्थापित किए गए हैं।
डॉक्टरों की जिम्मेदारी पर जोर
राष्ट्रपति ने चिकित्सा पेशे को एक विशेष जिम्मेदारी वाला क्षेत्र बताते हुए कहा कि डॉक्टरों के पास मानवता की सेवा का अनोखा अवसर होता है। उन्होंने स्नातक छात्रों से आग्रह किया कि वे अपने करियर में संवेदनशीलता, नैतिकता और सेवा भावना को हमेशा प्राथमिकता दें।