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केम्पेगौड़ा जयंती के दौरान विधायक प्रदीप ईश्वर पर चप्पल फेंके जाने की घटना पर सिद्धारमैया और कांग्रेस नेताओं ने कड़ा विरोध जताया है।
कर्नाटक की राजनीति में हाल ही में घटी एक घटना ने राज्य के राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। चिक्काबल्लापुर के कांग्रेस विधायक प्रदीप ईश्वर पर 27 जून को केम्पेगौड़ा जयंती समारोह के दौरान चप्पल फेंके जाने का मामला सामने आया है, जिसने राज्य में राजनीतिक मर्यादा और लोकतांत्रिक मूल्यों पर एक बड़ी बहस छेड़ दी है। इस घटना के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने कड़ा रुख अपनाते हुए विपक्षी दलों पर गंभीर आरोप लगाए हैं और घटना की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
घटना का विवरण और सिद्धारमैया की प्रतिक्रिया
ಚಿಕ್ಕಬಳ್ಳಾಪುರ ಶಾಸಕರಾದ ಪ್ರದೀಪ್ ಈಶ್ವರ್ ಅವರು ಇಂದು ನನ್ನನ್ನು ಭೇಟಿಮಾಡಿ, ಕೆಂಪೇಗೌಡ ಜಯಂತಿ ಆಚರಣೆಯ ವೇಳೆ ಬಿಜೆಪಿ ಹಾಗೂ ಜೆಡಿಎಸ್ ಕಾರ್ಯಕರ್ತರು ತಮ್ಮ ಮೇಲೆ ಚಪ್ಪಲಿ ಎಸೆದು, ತಮ್ಮ ಕುಟುಂಬದವರನ್ನು ನಿಂದಿಸಿದ್ದು ಸೇರಿದಂತೆ ಅಂದು ನಡೆದ ಎಲ್ಲಾ ಘಟನೆಯನ್ನು ವಿವರಿಸಿ, ತಮ್ಮ ನೋವನ್ನು ಹಂಚಿಕೊಂಡರು.
ರಾಜಕಾರಣದಲ್ಲಿ ಇಂಥಹ ಘಟನೆಗಳು… pic.twitter.com/IhNDUGkmrM
— Siddaramaiah (@siddaramaiah) June 30, 2026
घटना के बाद, कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता सिद्धारमैया ने विधायक प्रदीप ईश्वर के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस मुलाकात के दौरान प्रदीप ईश्वर ने अपनी व्यथा साझा करते हुए बताया कि किस प्रकार केम्पेगौड़ा जयंती के गरिमामयी समारोह के बीच बीजेपी और जेडी(एस) के कथित कार्यकर्ताओं ने न केवल उन पर चप्पलें फेंकीं, बल्कि उनके परिवार के सदस्यों को भी सार्वजनिक रूप से अपमानित किया।
इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सिद्धारमैया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि राजनीति में वैचारिक मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन किसी जनप्रतिनिधि के प्रति ऐसी बर्बर और अशोभनीय हरकत कतई स्वीकार्य नहीं है। सिद्धारमैया ने विधायक का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि राजनीति में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, और कांग्रेस पार्टी इस मुश्किल घड़ी में अपने विधायक के साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने इस घटना को विपक्षी दलों की हताशा का परिणाम बताते हुए इसकी निष्पक्ष जांच की मांग की है।
कांग्रेस नेतृत्व की कड़ी निंदा
इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कर्नाटक कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद ने भी कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने कहा कि कर्नाटक जैसे प्रगतिशील राज्य में हिंसा, डराने-धमकाने और अपमानित करने वाली राजनीतिक संस्कृति के लिए कोई स्थान नहीं है। हरिप्रसाद ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी बात रखते हुए कहा कि जो लोग लोकतांत्रिक तरीके से बहस का सामना करने में असमर्थ होते हैं, वे ही अक्सर ऐसी घिनौनी और निम्न स्तर की हरकतों का सहारा लेते हैं।
उन्होंने जोर देकर कहा कि असहमति को दबाने के लिए हिंसा का इस्तेमाल करना लोकतंत्र का अपमान है। हरिप्रसाद ने विधायक प्रदीप ईश्वर को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी ओछी हरकतों से न तो लोकतंत्र की आवाज को दबाया जा सकता है और न ही सत्य को पराजित किया जा सकता है। पार्टी का मानना है कि यह घटना केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं, बल्कि जनादेश का अपमान है।
लोकतंत्र में मर्यादा और राजनीतिक संस्कृति
विधायक प्रदीप ईश्वर पर हुई यह घटना भारतीय राजनीति में गिरते हुए स्तर का एक दुखद उदाहरण है। किसी भी सार्वजनिक समारोह में, विशेषकर केम्पेगौड़ा जैसे महान व्यक्तित्व की जयंती के मौके पर, इस प्रकार की हिंसा न केवल आयोजन की गरिमा को कम करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि राजनीति में सहनशीलता का अभाव किस हद तक बढ़ चुका है।
जब विपक्ष हिंसात्मक तरीकों का रुख करता है, तो यह सीधा संकेत देता है कि वे तर्क और संवाद के माध्यम से अपनी बात रखने में सक्षम नहीं हैं। कर्नाटक में कांग्रेस सरकार और विपक्ष के बीच पहले से ही तनातनी चल रही है, लेकिन चप्पल फेंकने जैसी घटनाएं इसे और भी अधिक दूषित कर रही हैं। यह घटना राज्य के उन सभी नागरिकों के लिए चिंता का विषय है जो स्वस्थ और सकारात्मक राजनीति में विश्वास रखते हैं।
भविष्य की राह और सुरक्षा की मांग
इस पूरे प्रकरण ने राज्य के गृह विभाग पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्षी दलों की संलिप्तता के आरोपों के बाद, जांच की निष्पक्षता सुनिश्चित करना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती होगी। विधायक की सुरक्षा और उनकी गरिमा की रक्षा के लिए अब गृह मंत्रालय से उचित और त्वरित कार्रवाई की मांग की जा रही है।
अंततः, यह घटना राजनीतिक दलों को यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या वे अपने कार्यकर्ताओं को अनुशासन का पाठ पढ़ा रहे हैं। यदि भविष्य में ऐसी घटनाओं को नहीं रोका गया, तो यह राज्य के सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुँचा सकती है। राजनीति का मूल उद्देश्य जनसेवा और संवाद होना चाहिए, न कि अराजकता और अपमान। फिलहाल, कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे को लेकर आक्रामक है और आने वाले दिनों में यह मामला विधानसभा के पटल पर भी उठने की पूरी संभावना है।