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केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने कहा कि भारत में नक्सलवाद निर्णायक रूप से समाप्त हो चुका है और पूर्वोत्तर में उग्रवाद बेहद कम हुआ है। उन्होंने आईपीएस अधिकारियों को साइबर अपराध, मादक पदार्थों की तस्करी और अवैध आव्रजन से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा।
केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने शनिवार को कहा कि भारत की आंतरिक सुरक्षा का पारंपरिक परिदृश्य अब पूरी तरह बदल चुका है। देश कई दशकों से जिन सुरक्षा चुनौतियों का सामना करता आ रहा था, उनमें महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिले हैं। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद जैसी गंभीर समस्या निर्णायक रूप से समाप्त हो चुकी है, जबकि पूर्वोत्तर भारत में उग्रवाद अब बेहद सीमित स्तर पर रह गया है। इसके साथ ही, देश में पनपने वाले आतंकवाद में लगभग समाप्ति आ गई है और विदेश से प्रेरित आतंकवाद अब देश के अन्य हिस्सों में पहले की तरह दिखाई नहीं देता। गृह सचिव ने ये बातें हैदराबाद स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी (एसवीपीएनपीए) में भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के 78वें नियमित भर्ती बैच की दीक्षांत परेड को संबोधित करते हुए कहीं। उन्होंने नए आईपीएस अधिकारियों से कहा कि बदलते सुरक्षा परिदृश्य को समझना और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहना उनकी जिम्मेदारी है
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नक्सलवाद और पूर्वोत्तर उग्रवाद में कमी का दावा
गृह सचिव गोविंद मोहन ने अपने संबोधन में कहा कि भारत ने आंतरिक सुरक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। उनके अनुसार, नक्सलवाद, जो लंबे समय तक देश के कई हिस्सों में कानून-व्यवस्था और विकास के लिए बड़ी चुनौती बना रहा, अब निर्णायक रूप से समाप्त हो चुका है। उन्होंने पूर्वोत्तर भारत की सुरक्षा स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां उग्रवादी गतिविधियां अब बहुत छोटे स्तर तक सिमट गई हैं। पूर्वोत्तर के कई राज्यों में लंबे समय से उग्रवाद, अलगाववादी गतिविधियों और हिंसा से जुड़ी चुनौतियां रही हैं। ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था में सुधार को सरकार की प्रमुख उपलब्धियों में गिना जा रहा है। हालांकि, इन क्षेत्रों में शांति बनाए रखने, स्थानीय समुदायों का विश्वास मजबूत करने और विकास को गति देने के लिए निरंतर प्रयासों की आवश्यकता बनी रहती है।
घरेलू आतंकवाद लगभग समाप्त, विदेशी प्रेरित आतंकवाद पर भी टिप्पणी
गोविंद मोहन ने कहा कि देश में घरेलू स्तर पर पनपने वाला आतंकवाद लगभग समाप्त हो चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि विदेश से प्रेरित आतंकवाद अब देश के अन्य हिस्सों में दिखाई नहीं देता। उनका यह बयान आंतरिक सुरक्षा की स्थिति में आए बदलावों की ओर संकेत करता है। भारत ने पिछले कई दशकों में आतंकवादी गतिविधियों, संगठित हिंसा और सीमा पार से होने वाली सुरक्षा चुनौतियों का सामना किया है। इन परिस्थितियों में सुरक्षा एजेंसियों की भूमिका, खुफिया जानकारी का आदान-प्रदान, पुलिस बलों के बीच समन्वय और आतंकवादी नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई महत्वपूर्ण रही है। गृह सचिव के अनुसार, पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियों में कमी आने के बाद अब पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को उभरते खतरों की पहचान करने तथा उनसे निपटने के लिए अपनी रणनीतियों में बदलाव करना होगा।
साइबर अपराध और मादक पदार्थों की तस्करी नई चुनौती
गृह सचिव ने नवनियुक्त आईपीएस अधिकारियों को आगाह किया कि आंतरिक सुरक्षा का बदलता स्वरूप नई तरह की चुनौतियां सामने ला रहा है। उन्होंने मादक पदार्थों की तस्करी, साइबर अपराध और अवैध आव्रजन जैसे मुद्दों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत बताई। साइबर अपराध तेजी से बदलती तकनीक के साथ अधिक जटिल होता जा रहा है। ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी, पहचान की चोरी, डिजिटल माध्यमों से ठगी और संगठित साइबर नेटवर्क पुलिस के लिए नई चुनौतियां पैदा कर रहे हैं। ऐसे अपराधों से निपटने के लिए तकनीकी विशेषज्ञता, डिजिटल साक्ष्यों की जांच और विभिन्न एजेंसियों के बीच सहयोग आवश्यक है। इसी तरह, मादक पदार्थों की तस्करी का संबंध संगठित अपराध और अवैध वित्तीय नेटवर्क से भी हो सकता है। गृह सचिव का संदेश था कि पुलिस अधिकारियों को केवल पारंपरिक अपराधों की जांच तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि आधुनिक तकनीक और बदलते अपराध के तरीकों की गहरी समझ भी विकसित करनी चाहिए।
अवैध आव्रजन और राष्ट्रीय सुरक्षा पर सतर्कता की जरूरत
गोविंद मोहन ने अवैध आव्रजन को भी आने वाले समय की महत्वपूर्ण सुरक्षा चुनौतियों में शामिल किया। इस मुद्दे से निपटने के लिए कानून के अनुसार पहचान, दस्तावेजों का सत्यापन और संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय जरूरी होता है। पुलिस अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि सुरक्षा से जुड़े मामलों में कार्रवाई कानूनी प्रक्रियाओं के अनुरूप हो और लोगों के अधिकारों का भी सम्मान किया जाए। बदलती परिस्थितियों में पुलिस की भूमिका केवल अपराध होने के बाद कार्रवाई करने तक सीमित नहीं रह गई है। संभावित खतरों की समय रहते पहचान करना, संवेदनशील सूचनाओं का विश्लेषण करना और स्थानीय स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना भी उतना ही महत्वपूर्ण हो गया है।
नए आईपीएस अधिकारियों की जिम्मेदारी और आधुनिक पुलिसिंग
हैदराबाद स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी में आयोजित दीक्षांत परेड आईपीएस अधिकारियों के प्रशिक्षण के महत्वपूर्ण पड़ावों में से एक है। इस अवसर पर गृह सचिव ने अधिकारियों को बदलती सुरक्षा चुनौतियों के लिए तैयार रहने का संदेश दिया। नए अधिकारियों से अपेक्षा की जाती है कि वे कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ जनता के प्रति जवाबदेह, संवेदनशील और निष्पक्ष पुलिसिंग को भी प्राथमिकता दें। साइबर अपराध, नशीले पदार्थों के नेटवर्क और अवैध गतिविधियों से निपटने के लिए आधुनिक तकनीक, पेशेवर प्रशिक्षण और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच तालमेल की आवश्यकता बढ़ रही है।
कुल मिलाकर, गोविंद मोहन के संबोधन का मुख्य संदेश यह था कि भारत की आंतरिक सुरक्षा में पारंपरिक चुनौतियों का स्वरूप बदल रहा है। नक्सलवाद और उग्रवाद में कमी को उन्होंने महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि साइबर अपराध, मादक पदार्थों की तस्करी और अवैध आव्रजन जैसे नए मुद्दों पर गंभीरता से काम करना होगा। आने वाले समय में पुलिस बलों की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वे बदलती तकनीक, अपराध के नए तरीकों और सुरक्षा संबंधी जरूरतों के अनुरूप खुद को कितनी प्रभावी ढंग से तैयार करते हैं।