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अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर कांग्रेस ने दुष्यंत गौतम की सिक्किम के राज्यपाल पद पर नियुक्ति रोकने की मांग की है। राहुल गांधी ने राष्ट्रपति को पत्र लिखा, जबकि हरीश रावत ने उत्तराखंड में प्रदर्शन किया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कांग्रेस पर राजनीति करने का आरोप लगाया।
उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर एक बार फिर सियासी माहौल गरमा गया है। बीजेपी नेता दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने के बाद कांग्रेस ने इस फैसले पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि अंकिता भंडारी मामले में दुष्यंत गौतम का नाम सामने आया था और मामले से जुड़े सवालों का पूरी तरह समाधान नहीं हुआ है। इसी को आधार बनाकर पार्टी उनकी राज्यपाल के पद पर नियुक्ति रोकने की मांग कर रही है। गुरुवार को कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उत्तराखंड के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन किया। इससे पहले राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने अंकिता भंडारी के परिवार के साथ इंडिया गेट पर धरना दिया था। अब राहुल गांधी ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर रोक लगाने की मांग की है। इस घटनाक्रम ने अंकिता भंडारी हत्याकांड को एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में ला दिया है।
राहुल गांधी ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर क्या मांग की?
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर दुष्यंत गौतम की राज्यपाल पद पर नियुक्ति को लेकर चिंता जताई है। राहुल गांधी का तर्क है कि किसी व्यक्ति को संवैधानिक पद पर नियुक्त किए जाने से पहले मामले से जुड़े सभी सवालों का निष्पक्ष तरीके से समाधान होना चाहिए। कांग्रेस की मांग है कि अंकिता भंडारी मामले की जांच पूरी होने तक नियुक्ति पर रोक लगाई जाए, ताकि जांच और संभावित कानूनी कार्रवाई पर किसी तरह का असर न पड़े। पार्टी का कहना है कि अंकिता के परिवार को न्याय दिलाना सबसे महत्वपूर्ण है और इस मामले में किसी भी तरह की आशंका को दूर किया जाना चाहिए। हालांकि, दुष्यंत गौतम के खिलाफ आरोपों और उनके नाम के कथित उल्लेख को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए। किसी मामले में नाम का उल्लेख होना अपने आप में अपराध साबित होने के बराबर नहीं है।
क्या है अंकिता भंडारी हत्याकांड?
अंकिता भंडारी उत्तराखंड के एक रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थीं। सितंबर 2022 में उनके लापता होने के बाद उनकी हत्या का मामला सामने आया था। इस घटना ने पूरे उत्तराखंड में आक्रोश पैदा कर दिया था। मामले की जांच के दौरान रिजॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य समेत आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। जांच और सुनवाई के बाद मामले में तीन आरोपियों को दोषी ठहराया गया और उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई। इस हत्याकांड ने इसलिए भी व्यापक चर्चा बटोरी क्योंकि जांच के दौरान एक कथित वीआईपी का जिक्र सामने आया था।
मामले से जुड़ी रिपोर्टों के अनुसार, अंकिता की व्हाट्सऐप बातचीत में कथित तौर पर इस बात का उल्लेख था कि उन पर एक वीआईपी को विशेष सेवाएं देने के लिए दबाव बनाया जा रहा था। अंकिता ने कथित तौर पर इसका विरोध किया था। इस पहलू को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। हालांकि, कथित वीआईपी की पहचान और इस मामले में किसी व्यक्ति की भूमिका को लेकर लगाए गए आरोपों को प्रमाणित तथ्यों से अलग समझना जरूरी है। कांग्रेस अब इसी विवाद के बीच दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर रोक लगाने की मांग कर रही है।
अंकिता के परिवार ने भी नियुक्ति रोकने की उठाई मांग
अंकिता भंडारी के परिवार का कहना है कि जब तक मामले की सीबीआई जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक दुष्यंत गौतम की राज्यपाल पद पर नियुक्ति रोक दी जानी चाहिए। परिवार की मांग है कि मामले से जुड़े सभी सवालों की निष्पक्ष जांच हो और उन्हें पूरा न्याय मिले। इस मांग के बाद कांग्रेस ने भी सरकार और बीजेपी पर दबाव बढ़ा दिया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि अंकिता को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष जारी रहेगा। कांग्रेस का दावा है कि संवैधानिक पद पर नियुक्ति से पहले यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि जांच प्रक्रिया स्वतंत्र और निष्पक्ष बनी रहे। इस बीच, मामले में पहले दाखिल की गई चार्जशीट और अदालत की कार्रवाई को लेकर भी चर्चा हो रही है। उत्तराखंड पुलिस के एडीजी अपराध एवं कानून व्यवस्था डॉ. वी. मुरुगेशन ने बताया था कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में 500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की गई थी।
हरीश रावत बोले- अंकिता को न्याय दिलाकर रहेंगे
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने देहरादून में प्रदर्शन का नेतृत्व किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठेगी और अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने के लिए हर संभव संघर्ष करेगी। हरीश रावत ने दुष्यंत गौतम की राज्यपाल नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि बीजेपी ने इस फैसले से पीड़ित परिवार की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अपने संघर्ष के लिए जेल भी जाना पड़े तो पार्टी पीछे नहीं हटेगी।
उत्तराखंड कांग्रेस प्रभारी कुमारी शैलजा ने भी इस मुद्दे पर बीजेपी को घेरा। उन्होंने कहा कि देश की जनता अब अन्याय के मामलों को लेकर पहले से अधिक जागरूक है और ऐसे मुद्दों पर चुप नहीं रहेगी। कांग्रेस नेताओं ने मांग की कि अंकिता भंडारी मामले से जुड़े सभी सवालों का जवाब दिया जाए और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कांग्रेस पर लगाया राजनीति करने का आरोप
कांग्रेस के आरोपों पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि बीजेपी अंकिता भंडारी मामले को लेकर हमेशा संवेदनशील रही है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, पीड़ित परिवार को सहायता दी गई, आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई हुई और परिवार की मांग पर मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई। धामी ने कहा कि सरकार ने मामले में न्याय सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए हैं।
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर इस मामले को राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप भी लगाया। उनका कहना है कि कांग्रेस पीड़ित परिवार के दुख का इस्तेमाल अपनी राजनीति के लिए कर रही है। बीजेपी और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप के बीच यह मामला फिर राजनीतिक बहस का विषय बन गया है।
अंकिता भंडारी केस में आगे क्या होगा?
अंकिता भंडारी हत्याकांड में दोषियों को सजा सुनाए जाने के बावजूद कथित वीआईपी से जुड़े सवाल राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा में बने हुए हैं। कांग्रेस दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर रोक और जांच पूरी होने तक कार्रवाई की मांग कर रही है, जबकि मुख्यमंत्री धामी का कहना है कि सरकार ने पीड़ित परिवार की मांग के अनुसार जांच कराई और दोषियों को सजा दिलाने की दिशा में कदम उठाए। अब इस विवाद में राष्ट्रपति को लिखे राहुल गांधी के पत्र और कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन पर सबकी नजरें टिकी हैं। इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि जांच से जुड़े शेष सवालों का जवाब किस तरह सामने आता है और अंकिता के परिवार को न्याय की प्रक्रिया पर कितना भरोसा मिल पाता है।