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वैश्विक शेयर बाजारों में AI चिप शेयरों की बिकवाली, दक्षिण कोरिया के KOSPI में भारी गिरावट और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक से पहले निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। जानिए आज ग्लोबल मार्केट में उतार-चढ़ाव की प्रमुख वजहें।
बुधवार को वैश्विक शेयर बाजारों में कारोबार बेहद उतार-चढ़ाव भरा रहा। यूरोप और अमेरिका के बाजारों में हल्की बढ़त देखने को मिली, लेकिन एशियाई बाजारों में आई भारी गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े शेयरों में तेज बिकवाली के कारण बाजार का माहौल कमजोर बना रहा।
निवेशक अब दुनिया की प्रमुख टेक कंपनियों माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) और मेटा (Meta) के तिमाही नतीजों का इंतजार कर रहे हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इन कंपनियों के परिणाम यह तय करेंगे कि AI सेक्टर में जारी दबाव आगे भी बना रहेगा या निवेशकों का भरोसा लौटेगा।
दक्षिण कोरिया का शेयर बाजार सबसे ज्यादा दबाव में
एशिया में सबसे बड़ी गिरावट दक्षिण कोरिया के KOSPI इंडेक्स में दर्ज की गई। मंगलवार को 10% से अधिक गिरने के बाद बुधवार को भी यह सूचकांक लगभग 6% तक टूट गया। यह पिछले तीन महीनों का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है।
विश्लेषकों का कहना है कि AI सेक्टर में अत्यधिक उम्मीदों और चिप कंपनियों के ऊंचे वैल्यूएशन के कारण निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी है। इसके साथ ही चीन की कंपनियों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा को लेकर भी बाजार में चिंता बढ़ी है।
दक्षिण कोरिया के वित्त मंत्री कू यून-चोल ने भी माना कि सिंगल-स्टॉक लीवरेज्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) को मंजूरी देने से पहले पर्याप्त विचार नहीं किया गया था। उन्होंने स्वीकार किया कि इससे बाजार में अस्थिरता बढ़ी है और निवेशकों का जोखिम भी बढ़ गया।
यूरोप और अमेरिका में सीमित बढ़त
एशियाई बाजारों की कमजोरी के बावजूद यूरोपीय बाजारों में मामूली सुधार देखने को मिला। STOXX 600 इंडेक्स लगभग 0.13% की बढ़त के साथ कारोबार करता दिखा। इस तेजी में ऑयल और गैस कंपनियों के शेयरों का अहम योगदान रहा।
वहीं अमेरिका में नैस्डैक 100 के फ्यूचर्स में भी हल्की बढ़त दर्ज की गई। हालांकि निवेशकों का रुख अभी भी सतर्क बना हुआ है क्योंकि वे टेक कंपनियों की आय और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले का इंतजार कर रहे हैं।
इस बीच MSCI ऑल कंट्री वर्ल्ड प्राइस इंडेक्स करीब 0.11% गिर गया और लगभग एक महीने के निचले स्तर के आसपास कारोबार करता रहा।
AI चिप कंपनियों पर बढ़ा दबाव
हाल के महीनों में AI सेक्टर ने वैश्विक शेयर बाजारों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया था, लेकिन अब इसी सेक्टर में कमजोरी देखने को मिल रही है।
दक्षिण कोरिया की प्रमुख चिप निर्माता कंपनी SK Hynix ने तिमाही मुनाफे में छह गुना वृद्धि दर्ज की, लेकिन इसके बावजूद कंपनी के शेयर 9.61% तक गिर गए। इसका कारण यह रहा कि निवेशकों की उम्मीदें इससे भी अधिक थीं।
विशेषज्ञों का कहना है कि AI से जुड़ी कंपनियों के लिए बाजार ने बहुत ऊंची अपेक्षाएं बना ली थीं। ऐसे में अच्छे नतीजे भी निवेशकों को संतुष्ट नहीं कर पा रहे हैं।
ऑलस्प्रिंग ग्लोबल इन्वेस्टमेंट्स के पोर्टफोलियो मैनेजर जेक सेल्ट्ज ने कहा कि चिप शेयरों में हुई बिकवाली कुछ हद तक जरूरत से ज्यादा है, लेकिन जब भी AI सेक्टर के भविष्य को लेकर सवाल उठेंगे, तब बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है।
फेडरल रिजर्व के फैसले पर टिकी निगाहें
वैश्विक बाजारों के लिए आज का सबसे बड़ा घटनाक्रम अमेरिकी फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) की मौद्रिक नीति बैठक है।
बाजार को उम्मीद है कि फेड फिलहाल ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा। हालांकि कई निवेशकों का मानना है कि यदि महंगाई का दबाव बना रहा, तो वर्ष के अंत तक ब्याज दरों में कम से कम एक और बढ़ोतरी हो सकती है।
फेड के कई नीति निर्माताओं ने हाल के दिनों में बढ़ती महंगाई को लेकर चिंता व्यक्त की है। ऐसे में निवेशकों की नजर केवल ब्याज दरों पर ही नहीं, बल्कि फेड की भविष्य की रणनीति पर भी रहेगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऊंची ब्याज दरें तकनीकी कंपनियों के लिए चुनौती बन सकती हैं क्योंकि विस्तार योजनाओं के लिए उन्हें पूंजी जुटाने में अधिक लागत का सामना करना पड़ सकता है।
मध्य पूर्व तनाव और तेल की कीमतों में उछाल
शेयर बाजारों पर भू-राजनीतिक घटनाओं का भी असर देखने को मिल रहा है। मध्य पूर्व में जारी तनाव और शांति वार्ता में अनिश्चितता के कारण कच्चे तेल की कीमतों में फिर तेजी आई है।
ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत लगभग 3.29% बढ़कर 86.86 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई। पिछले तीन दिनों से जारी गिरावट के बाद यह पहली बड़ी तेजी रही।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि तेल की कीमतें लगातार बढ़ती हैं, तो इससे वैश्विक महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है। महंगाई बढ़ने की स्थिति में केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा बनाए रख सकते हैं, जिसका सीधा असर शेयर बाजारों पर पड़ेगा।
आगे क्या देखेंगे निवेशक?
आने वाले दिनों में वैश्विक बाजारों की दिशा कई अहम कारकों पर निर्भर करेगी। माइक्रोसॉफ्ट और मेटा जैसी बड़ी टेक कंपनियों के तिमाही नतीजे, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीति, AI सेक्टर में निवेशकों का रुझान, चीन से प्रतिस्पर्धा और मध्य पूर्व की भू-राजनीतिक स्थिति बाजार की चाल तय करेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। ऐसे माहौल में निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने के बजाय मजबूत बुनियादी कंपनियों पर ध्यान देना चाहिए और लंबी अवधि की निवेश रणनीति अपनानी चाहिए।