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महिला टी20 विश्व कप 2026 के फाइनल में मेजबान इंग्लैंड को ऑस्ट्रेलिया के हाथों 7 विकेट से हार का सामना करना पड़ा। कप्तान नैट साइवर-ब्रंट की 58 रनों की पारी भी टीम का अजेय रिकॉर्ड नहीं बचा सकी।
लंदन के ऐतिहासिक लॉर्ड्स मैदान पर रविवार (5 जुलाई) को खेले गए आईसीसी महिला टी20 विश्व कप 2026 (ICC Women’s T20 World Cup 2026) के फाइनल में मेजबान इंग्लैंड को एक बेहद दर्दनाक हार का सामना करना पड़ा। खिताबी मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया ने इंग्लैंड को 7 विकेट से करारी शिकस्त देकर ट्रॉफी अपने नाम कर ली। यह हार इंग्लैंड की टीम और उनके प्रशंसकों के लिए एक ऐसा कड़वा घूंट है जिसे निगलना बेहद मुश्किल हो रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि इंग्लिश टीम इस पूरे टूर्नामेंट में अजेय रही थी और फाइनल से पहले अपने सभी छह मुकाबले जीतकर खिताबी रेस में सबसे आगे चल रही थी। घरेलू फैंस के सामने मिली इस शिकस्त ने न सिर्फ इंग्लैंड का विश्व कप जीतने का सपना तोड़ा, बल्कि घरेलू सरजमीं पर महिला विश्व कप के फाइनल में कभी न हारने के उनके शानदार और ‘परफेक्ट’ रिकॉर्ड का भी अंत कर दिया।
कप्तान नैट साइवर-ब्रंट की धीमी बल्लेबाजी और डेनी व्याट का फ्लॉप होना
टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी इंग्लैंड की टीम को अपने घरेलू मैदान पर बड़ा स्कोर खड़ा करने की उम्मीद थी। टीम को सबसे ज्यादा उम्मीदें अपनी स्टार सलामी बल्लेबाज डेनी व्याट-हॉज (Danni Wyatt-Hodge) से थीं। डेनी व्याट इस पूरे टूर्नामेंट में कमाल की फॉर्म में थीं और वह आईसीसी महिला टी20 विश्व कप के किसी एक संस्करण में 300 से अधिक रन बनाने वाली दुनिया की पहली और एकमात्र खिलाड़ी हैं। लेकिन, फाइनल के बड़े मंच पर उनका बल्ला पूरी तरह खामोश रहा और वह सिर्फ 8 गेंदों में 8 रन बनाकर पवेलियन लौट गईं।
शुरुआती झटके के बाद कप्तान नैट साइवर-ब्रंट ने मोर्चा संभाला और 53 गेंदों में 58 रनों की नाबाद अर्धशतकीय पारी खेलकर टीम को संभाला। उनकी इस जुझारू पारी की बदौलत इंग्लैंड ने 20 ओवर में 4 विकेट खोकर 150 रनों का स्कोर खड़ा किया। हालांकि, नैट साइवर-ब्रंट की पारी काफी धीमी रही, जिसके कारण इंग्लैंड आखिरी ओवरों में वह गति हासिल नहीं कर सका जो ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीम के खिलाफ एक बड़ा स्कोर बनाने के लिए जरूरी थी।
लॉरेन बेल की शुरुआती सफलता के बाद बेअसर रही इंग्लिश गेंदबाजी
151 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी ऑस्ट्रेलियाई टीम को इंग्लैंड की तेज गेंदबाज लॉरेन बेल ने शुरुआती झटका दिया। लॉरेन बेल ने बेहतरीन गेंदबाजी करते हुए दूसरे ही ओवर में ऑस्ट्रेलियाई ओपनर जॉर्जिया वोल को आउट कर दिया। इस शुरुआती सफलता के बाद लॉर्ड्स के मैदान पर मौजूद हजारों इंग्लिश फैंस झूम उठे और ऐसा लगा कि इंग्लैंड इस मैच पर अपनी पकड़ मजबूत कर लेगा।
लेकिन, इसके बाद कहानी पूरी तरह बदल गई। ऑस्ट्रेलिया की अनुभवी विकेटकीपर-बल्लेबाज बेथ मूनी और नंबर 3 पर बल्लेबाजी करने आईं फोएबे लिचफिल्ड ने इंग्लैंड के गेंदबाजों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। लॉरेन बेल के अलावा इंग्लैंड का कोई भी दूसरा गेंदबाज ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों पर दबाव बनाने या रनों की गति को रोकने में पूरी तरह नाकाम साबित हुआ।
मूनी और लिचफिल्ड की 100 रनों की साझेदारी ने मैच से किया बाहर
इंग्लैंड की कमजोर गेंदबाजी का पूरा फायदा उठाते हुए बेथ मूनी और बाएं हाथ की फोएबे लिचफिल्ड ने मैदान के चारों तरफ शॉट लगाने शुरू किए। दोनों ने दूसरे विकेट के लिए महज कुछ ही ओवरों में 100 रनों की ताबड़तोड़ साझेदारी कर डाली। बेथ मूनी ने 49 गेंदों में 64 रनों की मैच जिताऊ पारी खेली, जबकि फोएबे लिचफिल्ड ने सिर्फ 35 गेंदों में 48 रन बनाकर इंग्लैंड की उम्मीदों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया।
इंग्लैंड के स्पिनर्स और तेज गेंदबाज न तो विकेट ले पा रहे थे और न ही रन गति पर अंकुश लगा पा रहे थे। इस बड़ी साझेदारी के दम पर ऑस्ट्रेलिया ने 17.1 ओवर में ही 3 विकेट खोकर 151 रनों का लक्ष्य हासिल कर लिया। पूरे टूर्नामेंट में शानदार खेल दिखाने वाली इंग्लैंड की टीम फाइनल के सबसे महत्वपूर्ण मौके पर बिखर गई, जिसके कारण उन्हें उपविजेता बनकर ही संतोष करना पड़ा।