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आंखों का पीला होना पीलिया का संकेत हो सकता है। जानें पीलिया के शुरुआती लक्षण, कारण, और समय पर इलाज के लिए कब डॉक्टर से संपर्क करें।
आंखों का पीला होना या त्वचा का रंग बदलना अक्सर पीलिया (Jaundice) का पहला संकेत होता है। पीलिया एक गंभीर लेकिन इलाज योग्य बीमारी है, अगर इसे समय रहते पहचानकर सही उपचार किया जाए।
पीलिया क्या है?
पीलिया तब होता है जब शरीर में बिलीरुबिन का स्तर बढ़ जाता है। बिलीरुबिन लाल रक्त कोशिकाओं के टूटने से बनता है और सामान्य रूप से लिवर इसे पित्त के माध्यम से बाहर निकाल देता है। लेकिन जब लिवर सही तरीके से काम नहीं करता, पित्त नलिकाएं अवरुद्ध हो जाती हैं, या लाल रक्त कोशिकाएं तेजी से टूटती हैं, तो पीला पिगमेंट जमा होने लगता है, जिससे आंखें और त्वचा पीली दिखने लगती हैं।
पीलिया बच्चों और वयस्कों दोनों में हो सकता है और यह अक्सर हेपेटाइटिस, पित्ताशय की पथरी या लिवर की अन्य गंभीर बीमारियों का शुरुआती संकेत होता है।
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पीलिया के शुरुआती लक्षण
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आंखों का पीला होना – यह सबसे स्पष्ट संकेत है।
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त्वचा का पीला या नारंगी होना
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पेशाब का गहरा रंग (चाय जैसा)
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मल का हल्का रंग (मिट्टी जैसा)
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तेज खुजली – बिलीरुबिन त्वचा के नीचे जमा होने पर।
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सामान्य फ्लू जैसे लक्षण – हल्का बुखार, थकान, पेट दर्द।
लिवर और पाचन संबंधी अन्य लक्षण
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लगातार मतली और उल्टी
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भूख में कमी
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पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में दर्द या बेचैनी
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अगर पीलिया पित्ताशय की पथरी के कारण हो, तो दर्द तेज हो सकता है।
विटामिन B12 की कमी और पीलिया
कुछ प्रकार के पीलिया का संबंध विटामिन B12 की कमी से भी होता है। इस स्थिति में पर्निशियस एनीमिया के कारण लाल रक्त कोशिकाएं असामान्य रूप से बड़ी और जल्दी टूटती हैं, जिससे बिलीरुबिन का स्तर बढ़ जाता है।
डॉक्टर से कब संपर्क करें?
अगर आपकी आंखें या त्वचा पीली हो जाएं, पेशाब का रंग गहरा हो, या बिना कारण खुजली और थकान हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
डॉक्टर द्वारा लिवर फंक्शन टेस्ट और ब्लड टेस्ट करवाकर पीलिया के कारण का पता लगाना आवश्यक है। समय पर उपचार करने से हेपेटाइटिस, लिवर सिरोसिस, या पित्त नलिका की रुकावट जैसी गंभीर समस्याओं को नियंत्रित किया जा सकता है।