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सलमान खान की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट का सख्त फैसला। फिल्म ‘काला हिरण: द बैटल फॉर लेगेसी’ के निर्माताओं को 24 घंटे में टीजर हटाने का दिया आदेश।
बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान (Salman Khan) के ‘पर्सनालिटी राइट्स’ (व्यक्तित्व अधिकारों) और मानहानि से जुड़े मामले पर दिल्ली हाईकोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को आगामी फिल्म ‘काला हिरण: द बैटल फॉर लेगेसी’ (Kala Hiran: The Battle for Legacy) के निर्माताओं को कड़ी फटकार लगाते हुए सोशल मीडिया से 24 घंटे के भीतर फिल्म का टीजर हटाने के निर्देश दिए हैं।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि निर्माता स्वयं टीजर को नहीं हटाते हैं, तो X (पूर्व में ट्विटर) और यूट्यूब (YouTube) जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को यह सामग्री तुरंत हटाने के आदेश दिए जाएंगे। यह मामला सलमान खान द्वारा अपने पर्सनालिटी राइट्स की सुरक्षा और अपनी छवि को नुकसान पहुँचाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया।
“आपका क्लाइंट खुद को कानून से ऊपर समझता है”: जज की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान जस्टिस ज्योति सिंह (Justice Jyoti Singh) की एकल पीठ ने फिल्म के निर्माता अमित जानी (Amit Jani) के आचरण और रवैये पर भारी नाराजगी जताई।
कोर्ट में टीजर देखने के बाद जस्टिस सिंह ने निर्माता के वकील को फटकार लगाते हुए कहा:
“यह किस तरह की सामग्री है? ऐसा लगता है कि पिछली बार कोई सख्त आदेश पारित न होने से आपके हौसले बढ़ गए हैं। आपका क्लाइंट सोचता है कि वह कानून से ऊपर है। उसकी हरकतें दिन-ब-दिन बदतर होती जा रही हैं… जब तक यह टीजर पब्लिक डोमेन में रहेगा, हर मिनट वादी (सलमान खान) की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाएगा। मैं पहले आपके साथ नरम थी, लेकिन आप सुधार से परे हैं… आप किसी आम आदमी के साथ भी ऐसा नहीं कर सकते।”
अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि जो मामले अभी भी अदालतों में लंबित हैं, उन पर आधारित घटनाओं का इस तरह चित्रण करना अदालत की अवमानना (Contempt of Court) के दायरे में आ सकता है। जज ने कहा कि प्रतिष्ठा बहुत मेहनत से बनती है, लेकिन एक बार खो जाने के बाद इसे वापस पाना नामुमकिन होता है।
सलमान खान ने क्यों खटखटाया अदालत का दरवाजा?
सलमान खान की कानूनी टीम ने तर्क दिया कि फिल्म ‘काला हिरण: द बैटल फॉर लेगेसी’ सीधे तौर पर 1998 के काले हिरण शिकार मामले (Blackbuck Poaching Case) पर आधारित है, जिसकी कानूनी प्रक्रियाएं अभी भी राजस्थान हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में लंबित (Sub-Judice) हैं।
सलमान खान द्वारा दायर याचिका में मुख्य आरोप:
- अंडरवर्ल्ड से फर्जी कनेक्शन: फिल्म में अभिनेता को गलत तरीके से अंडरवर्ल्ड से जुड़ा हुआ दिखाया गया है।
- शारीरिक समानता और ब्रेसलेट का इस्तेमाल: फिल्म के पोस्टर में एक ऐसा किरदार दिखाया गया है जो सलमान खान जैसा दिखता है और उनका सिग्नेचर ब्रेसलेट भी पहने हुए है।
- निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार का उल्लंघन: सलमान खान के वकीलों ने कहा कि मामला अदालत में विचाराधीन होने के कारण यह फिल्म उनके निष्पक्ष सुनवाई (Fair Trial) के अधिकार का हनन करती है।
- लीगल नोटिस फाड़ने का मामला: याचिका में उल्लेख किया गया कि जब सलमान खान ने निर्माताओं को कानूनी नोटिस भेजा, तो निर्माता अमित जानी ने एक इंटरव्यू के दौरान सार्वजनिक रूप से उस नोटिस को फाड़ दिया और एक्स (X) पर उल्टा आरोप लगाया कि सलमान खान और अंडरवर्ल्ड उन्हें धमकियां दे रहे हैं।
निर्माता का पक्ष और कोर्ट का इंटरनेट प्लेटफॉर्म्स को निर्देश
फिल्म निर्माता की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि न तो टीजर में और न ही फिल्म में सलमान खान का नाम इस्तेमाल किया गया है, और न ही इसमें एआई (AI) या डीपफेक तकनीक का प्रयोग हुआ है। उन्होंने तर्क दिया कि केवल एक टीजर से अभिनेता के पर्सनालिटी राइट्स का उल्लंघन कैसे हो सकता है?
इस पर सलमान खान के वकील ने करारा जवाब देते हुए कहा कि आम जनता आसानी से समझ सकती है कि इशारा किसकी तरफ है। उन्होंने अदालत को बताया कि सलमान खान चार में से तीन मामलों में पहले ही बरी हो चुके हैं, और चौथे मामले में उनकी सजा पर रोक लगी हुई है। ऐसे में पूरे समुदाय को उनके खिलाफ भड़काया जा रहा है।
सुनवाई के दौरान मेटा (Meta) और गूगल (Google) के वकीलों ने भी अपना पक्ष रखा। जस्टिस ज्योति सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को चेतावनी देते हुए कहा कि ऑनलाइन मध्यस्थों को भी अपनी जिम्मेदारी तय करनी होगी। अदालत ने सलमान खान की लीगल टीम को निर्देश दिया कि वे उन सभी डिजिटल लिंक्स की सूची तैयार कर कोर्ट को सौंपें, ताकि उन सभी यूआरएल को ब्लॉक और टेक-डाउन करने के आदेश जारी किए जा सकें।