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Defence Stocks Today: डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) द्वारा ₹52,000 करोड़ के रक्षा खरीद प्रस्तावों को मंजूरी मिलने के बाद पारस डिफेंस, BEL, HAL और BHEL के शेयरों में जबरदस्त तेजी देखी गई।
भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को डिफेंस (रक्षा) क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में शानदार तेजी देखने को मिली। इस बड़ी तेजी की मुख्य वजह रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) द्वारा करीब ₹52,000 करोड़ (520 बिलियन रुपये) के पूंजीगत अधिग्रहण प्रस्तावों को दी गई मंजूरी है। सरकार के इस बड़े कदम से निवेशकों का सेंटिमेंट काफी मजबूत हुआ, जिसके चलते सुबह के कारोबारी सत्र में ही डिफेंस सेक्टोरल शेयरों में चौतरफा लिवाली शुरू हो गई। बाजार खुलने के बाद सुबह करीब 10:30 बजे ‘निफ्टी इंडिया डिफेंस इंडेक्स’ (Nifty India Defence Index) 1.28% की बढ़त के साथ 9,696.75 के स्तर पर कारोबार कर रहा था।
पारस डिफेंस और BEL बने टॉप गेनर्स: शेयरों का ताजा हाल
डीएसी (DAC) की इस बड़ी घोषणा के बाद प्रमुख रक्षा कंपनियों के शेयरों में जोरदार उछाल देखा गया। सोमवार सुबह के कारोबार में रक्षा क्षेत्र के प्रमुख काउंटरों का प्रदर्शन इस प्रकार रहा:
- पारस डिफेंस (Paras Defence): पारस डिफेंस एंड स्पेस टेक्नोलॉजीज के शेयर 5.28% की भारी बढ़त के साथ ₹1,362.30 पर पहुंच गए और यह इस सेक्टर का टॉप गेनर रहा।
- भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL): सार्वजनिक क्षेत्र की दिग्गज कंपनी बीईएल (BEL) का शेयर 1.73% चढ़कर ₹425 पर कारोबार कर रहा था।
- मझगांव डॉक (Mazagon Dock): शिपबिल्डिंग सेक्टर की इस कंपनी के शेयर में 1.08% की तेजी आई और यह ₹2,571 पर पहुंच गया।
- हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स (HAL): दिग्गज विमान निर्माता कंपनी एचएएल (HAL) का शेयर भी 1.06% की बढ़त के साथ ₹4,475.10 के स्तर पर ट्रेंड कर रहा था।
सेना के तीनों अंगों के लिए स्वदेशी हथियारों की होगी खरीद
रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने थल सेना, नौसेना और वायु सेना की युद्धक क्षमताओं को बढ़ाने और उन्हें आधुनिक बनाने के लिए कई खरीद प्रस्तावों को ‘आवश्यकता की स्वीकृति’ (AoN – Acceptance of Necessity) प्रदान की है। इस मंजूरी के तहत पूरी तरह स्वदेशी प्रणालियों की खरीद पर जोर दिया गया है।
इस रक्षा सौदे में सेना के लिए ‘आकाश तरंग’ एंटी-ड्रोन इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम, मैन-पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (MPATGM), मीडियम-रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल (MRSAM) सिस्टम और वेरी शॉर्ट-रेंज एयर डिफेंस सिस्टम (V-SHORADS) शामिल हैं। इसके अलावा टैंकों के लिए एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम और जेट-संचालित लोइटरिंग म्यूनिशन्स (आत्मघाती ड्रोन) की खरीद को भी हरी झंडी दी गई है। वहीं नौसेना के लिए ‘मल्टी-इन्फ्लुएंस ग्राउंड माइंस’, पानी के जहाजों से संचालित होने वाले मानवरहित हवाई प्रणाली (UAS) और इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम के लिए एक ‘लैंड बेस्ड टेस्टिंग फैसिलिटी’ (LBTF) की स्थापना को मंजूरी मिली है।
BHEL पर ब्रोकरेज की ‘Buy’ रेटिंग, जून तिमाही में मुनाफे की उम्मीद
व्यापक रक्षा क्षेत्र में आई इस तेजी के बीच ‘भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड’ (BHEL) का शेयर भी विशेष रूप से फोकस में रहा। दिग्गज ब्रोकरेज फर्म ‘जेएम फाइनेंशियल’ (JM Financial) ने बीएचईएल (BHEL) के शेयर पर अपनी ‘बाय’ (Buy) रेटिंग बरकरार रखते हुए इसके लिए ₹435 का टारगेट प्राइस दिया है।
ब्रोकरेज हाउस का मानना है कि नौसेना के लिए प्रस्तावित ‘लैंड बेस्ड टेस्टिंग फैसिलिटी’ (LBTF) से बीएचईएल के लिए नए कारोबारी अवसर खुलेंगे, क्योंकि कंपनी के पास इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम का बेहतरीन अनुभव है। जेएम फाइनेंशियल को उम्मीद है कि जून तिमाही में बीएचईएल का राजस्व (Revenue) सालाना आधार पर 20% बढ़कर ₹6,600 करोड़ (66 बिलियन रुपये) रह सकता है। साथ ही, पिछले आठ वर्षों से इस तिमाही में घाटा दर्ज करने के बाद, इस बार कंपनी पहली तिमाही में ही मुनाफे में वापस लौट सकती है। वित्त वर्ष 2026 से 2028 के बीच कंपनी के नेट प्रॉफिट में 71% की शानदार सीएजीआर (CAGR) ग्रोथ का अनुमान है।
लॉन्ग-टर्म के लिए कैसा है डिफेंस सेक्टर का आउटलुक?
ब्रोकरेज फर्म ‘चॉइस इंस्टीट्यूशनल इक्विटी’ (Choice Institutional Equity) ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि ₹52,000 करोड़ की यह मंजूरी भारत के रक्षा क्षेत्र के लिए किसी एक बार का ट्रिगर नहीं है, बल्कि यह इस सेक्टर में चल रहे एक बड़े और निरंतर ढांचागत विकास (Structural Growth) को दर्शाती है।
रक्षा क्षेत्र में सरकार का निरंतर फोकस ‘आत्मनिर्भरता’ और टेक्नोलॉजी-बेस्ड खरीद पर है, जिससे अगले 12 से 24 महीनों तक इन कंपनियों के पास ऑर्डर बुक की कोई कमी नहीं होगी। विशेषज्ञों के अनुसार, निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि ‘आवश्यकता की स्वीकृति’ (AoN) सरकार की ओर से मिलने वाली केवल एक प्राथमिक मंजूरी है, जो खरीद प्रक्रिया की शुरुआत करती है। इसके बाद टेंडरिंग, टेक्निकल इवैल्यूएशन और कमर्शियल बातचीत पूरी होने के बाद ही अंतिम ऑर्डर या कॉन्ट्रैक्ट दिए जाते हैं, जो लंबी अवधि में कंपनियों की बैलेंस शीट को मजबूत करेंगे।