देहरादून में ‘रन फॉर योग’ का आयोजन: मुख्यमंत्री धामी ने योग को जीवन का अभिन्न अंग बनाने का किया आह्वान

देहरादून में 'रन फॉर योग' का आयोजन: मुख्यमंत्री धामी ने योग को जीवन का अभिन्न अंग बनाने का किया आह्वान

 

देहरादून पुलिस लाइंस में ‘रन फॉर योग’ कार्यक्रम का आयोजन हुआ, जिसमें मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शामिल हुए। उन्होंने योग को स्वस्थ जीवन का मंत्र बताया।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में उत्तराखंड की राजधानी देहरादून स्थित पुलिस लाइंस में शुक्रवार को एक भव्य ‘रन फॉर योग’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौड़ में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की। यह आयोजन 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के पूर्व संध्या पर आयोजित किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य जनमानस के बीच योग के प्रति जागरूकता फैलाना और एक स्वस्थ समाज के निर्माण की दिशा में कदम बढ़ाना था।

योग: स्वस्थ जीवन और सकारात्मक सोच का आधार

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि ‘रन फॉर योग’ केवल एक दौड़ नहीं है, बल्कि यह स्वस्थ जीवनशैली, सकारात्मक सोच और योग के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने का एक सशक्त अभियान है। उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड सदियों से योग, तप और साधना का केंद्र रहा है। यहां की आध्यात्मिक विरासत और नैसर्गिक वातावरण मानवता को हमेशा से स्वास्थ्य, संतुलन और सकारात्मक जीवन जीने की प्रेरणा देता रहा है। मुख्यमंत्री ने योग को भारत की प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर बताते हुए इसे शरीर, मन और आत्मा के बीच सामंजस्य स्थापित करने वाला एक वैज्ञानिक और व्यावहारिक अनुशासन बताया।

वैश्विक स्तर पर योग की बढ़ती स्वीकार्यता

मुख्यमंत्री ने योग को वैश्विक पहचान दिलाने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने कहा कि 2014 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा रखे गए प्रस्ताव के बाद 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मान्यता मिली। आज दुनिया के 190 से अधिक देशों में करोड़ों लोग योग का अभ्यास कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान समय में तनाव, अवसाद और विभिन्न स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के बीच योग एक अत्यंत प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं से आग्रह किया कि वे योग और नियमित व्यायाम को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वस्थ, ऊर्जावान और अनुशासित युवा ही प्रदेश और देश के उज्ज्वल भविष्य की नींव हैं।

उत्तराखंड को योग और वेलनेस का वैश्विक केंद्र बनाना

मुख्यमंत्री धामी ने बताया कि राज्य सरकार उत्तराखंड को योग, आयुर्वेद, वेलनेस और प्राकृतिक चिकित्सा के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य की नई ‘योग नीति’ के माध्यम से योग और ध्यान केंद्रों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। सरकार योग प्रशिक्षकों का समर्थन कर रही है और योग व वेलनेस के क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर सृजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि योग के माध्यम से राज्य की आर्थिकी को भी मजबूती मिलेगी और उत्तराखंड को ‘योग राजधानी’ के रूप में नई पहचान मिलेगी।

नशामुक्त समाज का संकल्प

मुख्यमंत्री ने नागरिकों से अपील की कि वे योग को एक दैनिक दिनचर्या के रूप में अपनाएं और एक स्वस्थ व अनुशासित जीवनशैली अपनाएं। उन्होंने लोगों से एक नशामुक्त समाज के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने विश्वास जताया कि उत्तराखंड के युवा योग को जन-आंदोलन बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि योग की शक्ति से ही एक स्वस्थ, समृद्ध और सशक्त उत्तराखंड का निर्माण संभव है।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का महत्व

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस प्रत्येक वर्ष 21 जून को मनाया जाता है। 11 दिसंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा अपनाए गए एक प्रस्ताव के बाद इसकी आधिकारिक शुरुआत हुई थी। इस प्रस्ताव का विचार सबसे पहले 27 सितंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 69वें सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन के दौरान रखा था। वर्ष 2015 में पहली बार अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया था। तब से लेकर आज तक, भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के नेतृत्व में, राज्य सरकारों, विदेशों में स्थित भारतीय दूतावासों और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संगठनों के सहयोग से इसे विश्व स्तर पर मनाया जा रहा है।

इस साल भी अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की तैयारियां जोरों पर हैं। विदेशों में भारतीय मिशनों द्वारा प्रवासी भारतीयों और स्थानीय समुदायों को शामिल करते हुए आउटरीच कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि योग के अनगिनत शारीरिक और मानसिक लाभों के बारे में वैश्विक जागरूकता बढ़ाई जा सके। देहरादून की पुलिस लाइंस में आयोजित ‘रन फॉर योग’ कार्यक्रम इसी कड़ी का एक हिस्सा रहा, जिसने समाज में योग की अलख जगाने का कार्य किया है।

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