राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर और ममलेश्वर मंदिरों में पूजा-अर्चना की। बैतूल में उन्होंने जनजातीय समाज के आध्यात्मिक सशक्तिकरण पर अपने विचार रखे।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुरुवार को अपने मध्य प्रदेश दौरे के दौरान अध्यात्म और जन-कल्याण का संदेश दिया। अपनी यात्रा के क्रम में उन्होंने राज्य के प्रसिद्ध ओंकारेश्वर और ममलेश्वर मंदिरों में दर्शन किए और विशेष पूजा-अर्चना की। इस दौरान उन्होंने भगवान शिव से देशवासियों की सुख-समृद्धि, कल्याण और खुशहाली के लिए प्रार्थना की। राष्ट्रपति का यह दौरा धार्मिक और सामाजिक दोनों ही दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ओंकारेश्वर और ममलेश्वर में दर्शन
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ओंकारेश्वर और ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग परिसरों में पहुंचकर पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ अनुष्ठान किए। इन मंदिरों में पूजा करने के बाद उन्होंने देश में शांति और सद्भाव की कामना की। मध्य प्रदेश के इन पवित्र स्थलों पर राष्ट्रपति की उपस्थिति ने स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में उत्साह का संचार किया। धार्मिक परंपराओं के निर्वहन के साथ-साथ यह दौरा राष्ट्रपति की सांस्कृतिक जड़ों के प्रति गहरी आस्था को भी दर्शाता है।
जनजातीय समाज का आध्यात्मिक सशक्तिकरण
अपनी यात्रा के अगले चरण में, राष्ट्रपति ने बैतूल में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित ‘आध्यात्मिक जागृति द्वारा जनजातीय समाज का सशक्तिकरण’ विषयक कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। जनसभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि आज की भागदौड़ भरी और उपभोगवादी संस्कृति के दौर में आध्यात्मिक शुद्धता का महत्व और अधिक बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि संघर्षों और तनाव से जूझ रही आज की दुनिया में एक ऐसा जीवन जीने की आवश्यकता है, जो प्राकृतिक संसाधनों के प्रति संवेदनशील हो और भविष्य के लिए टिकाऊ हो।
जनजातीय जीवनशैली का महत्व
राष्ट्रपति मुर्मू ने जनजातीय समुदायों की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनकी जीवनशैली स्वाभाविक रूप से आध्यात्मिकता के मूल तत्वों से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा, “प्राकृतिक संसाधनों के साथ जनजातीय समुदायों का गहरा जुड़ाव उनकी एक जन्मजात शक्ति है, जो उन्हें सार्वभौमिक कल्याण के प्रति समर्पित बनाती है।” राष्ट्रपति ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि ब्रह्माकुमारी संस्थान लंबे समय से देश भर में जनजातीय समुदायों के साथ मिलकर विभिन्न रचनात्मक कार्यों में संलग्न है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी संगठन को यह हमेशा याद रखना चाहिए कि समाज के किसी भी वर्ग का सशक्तिकरण केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं होना चाहिए।
सशक्तिकरण का वास्तविक अर्थ
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने सशक्तिकरण की नई परिभाषा को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि वास्तविक सशक्तिकरण तभी संभव है जब कोई व्यक्ति अपने सामाजिक उत्तरदायित्वों के प्रति सजग रहते हुए आत्म-सम्मान और आत्मविश्वास के साथ कार्य करे। आध्यात्मिक जागृति न केवल व्यक्ति को उसकी आंतरिक शक्ति का अहसास कराती है, बल्कि उसे सकारात्मक सोच और जीवन के उच्च उद्देश्यों से भी जोड़ती है। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता ही वह माध्यम है जो समाज में समतामूलक आचरण और नैतिकता को बढ़ावा दे सकती है।
विकसित भारत 2047 का संकल्प
कार्यक्रम के अंत में, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उपस्थित जनसमूह और देशवासियों का आह्वान करते हुए कहा कि हमें एकजुट होकर ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य करना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि आने वाले समय में हमारा विकास ऐसा होना चाहिए, जिसकी नींव में आध्यात्मिकता, सामाजिक सद्भाव, पर्यावरण संरक्षण और मानव कल्याण जैसे तत्व समाहित हों। उन्होंने कहा कि समावेशी विकास ही देश की असली प्रगति का आधार है, जिसमें समाज का अंतिम व्यक्ति भी गौरव के साथ अपनी भूमिका निभा सके।
राष्ट्रपति का यह दौरा समाज के वंचित और जनजातीय वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने के साथ-साथ उन्हें आध्यात्मिक रूप से सशक्त करने की दिशा में एक प्रेरणादायक प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। मध्य प्रदेश की इस यात्रा ने न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा दिया है, बल्कि सामाजिक सुधार और राष्ट्र निर्माण के लिए एक स्पष्ट दृष्टिकोण भी प्रस्तुत किया है।