Table of Contents
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के बाद सरकार ने साफ किया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं होगी। वहीं सीजेपी ने कानूनी मदद के लिए ‘साक्षी’ प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है।
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के लंबे चले आंदोलन और हालिया प्रदर्शनों के बाद सरकार ने अपना रुख पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। सरकार की ओर से आधिकारिक सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले नागरिकों या छात्रों के खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। हालांकि, सरकार ने इसके साथ ही सख्त लहजे में यह भी साफ कर दिया है कि प्रदर्शन की आड़ में हिंसा भड़काने, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और कानून-व्यवस्था को हाथ में लेने वाले उपद्रवियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
सरकार फिलहाल विभिन्न राज्यों से उन मामलों की विस्तृत रिपोर्ट और जानकारी मांग रही है, जहां प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस या प्रशासन की कार्रवाई की शिकायतें सामने आई हैं। सीजेपी नेताओं द्वारा दर्ज कराई गई शिकायतों को संज्ञान में लेते हुए केंद्र सरकार स्थिति की समीक्षा कर रही है।
सीजेपी का बड़ा कदम: कानूनी मदद के लिए ‘साक्षी’ प्लेटफॉर्म लॉन्च
दूसरी ओर, आंदोलन के बाद दर्ज हुए मुकदमों से निपटने के लिए कॉकरोच जनता पार्टी ने भी अपने स्तर पर तैयारियां तेज कर दी हैं। सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल कानूनी लड़ाई में उनकी महत्वपूर्ण मदद कर रहे हैं। सौरव दास के अनुसार, कपिल सिब्बल ने प्रभावित प्रदर्शनकारियों को कानूनी सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से 1 करोड़ रुपये की वित्तीय मदद भी दी है।
इसी पहल के तहत सीजेपी ने ‘साक्षी’ (Sakshi) नाम से एक डिजिटल और लीगल प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है। इस प्लेटफॉर्म का मुख्य उद्देश्य देशभर के उन छात्रों और प्रदर्शनकारियों को मुफ्त और त्वरित कानूनी सहायता पहुंचाना है, जिनके खिलाफ प्रदर्शन के दौरान पुलिस केस दर्ज हुए हैं या जिन पर प्रशासनिक कार्रवाई की जा रही है।
20 जुलाई की हिंसा और बिहार में उग्र प्रदर्शन का घटनाक्रम
आंदोलन के दौरान 20 जुलाई का दिन बेहद तनावपूर्ण साबित हुआ था। इस दिन दिल्ली में सीजेपी के संसद मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच भीषण झड़प हो गई थी। इस टकराव में कई पुलिसकर्मियों और प्रदर्शनकारियों के घायल होने की खबरें आई थीं। दिल्ली की इस घटना की गूंज देश के अन्य राज्यों में भी देखने को मिली।
20 जुलाई की झड़प के बाद देश के कई इलाकों में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए। विशेष रूप से बिहार में स्थिति काफी उग्र हो गई, जहां कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी झड़पें हुईं। हालांकि, बढ़ते जनदबाव और स्थिति की गंभीरता को देखते हुए 25 जुलाई को सरकार ने सीजेपी की प्रमुख मांगें स्वीकार कर लीं। इनमें नीट (NEET) पेपर लीक के कारण जान गंवाने वाले छात्रों के पीड़ित परिजनों को उचित मुआवजा देने और निर्दोष प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई न करने का आश्वासन शामिल था।
जंतर-मंतर से शुरू हुआ आंदोलन और धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा
इस पूरे आंदोलन की शुरुआत 20 जून को दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर से हुई थी। कॉकरोच जनता पार्टी ने नीट पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर अपना धरना शुरू किया था। शुरुआत में यह एक सीमित विरोध प्रदर्शन था, लेकिन जब प्रसिद्ध समाज सुधारक और पर्यावरणविद सोनम वांगचुक इस आंदोलन के समर्थन में आए और भूख हड़ताल पर बैठे, तो प्रदर्शन का दायरा तेजी से बढ़ने लगा।
लाखों युवाओं और छात्रों के जुड़ने के बाद आंदोलन ने राष्ट्रव्यापी रूप ले लिया:
- 20 जून: जंतर-मंतर पर सीजेपी का विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ।
- सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल: आंदोलन में भीड़ और जनसमर्थन अचानक कई गुना बढ़ गया।
- 20 जुलाई: संसद भवन की ओर मार्च के दौरान पुलिस लाठीचार्ज और भारी झड़प।
- 25 जुलाई: चौतरफा दबाव के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और सरकार द्वारा सभी प्रमुख मांगों को स्वीकार किए जाने के बाद सीजेपी ने अपना धरना-प्रदर्शन आधिकारिक रूप से समाप्त करने की घोषणा की थी। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार और प्रशासन शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को मुकदमों से राहत देने का अपना वादा कितनी जल्दी पूरा करता है।