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सीजेपी ने चेतावनी दी है कि यदि मंगलवार तक गिरफ्तार छात्रों को रिहा नहीं किया गया तो आंदोलन दोबारा शुरू होगा। कपिल सिब्बल ने लीगल एड के लिए 1 करोड़ रुपये देने का ऐलान किया है और ‘साक्षी’ प्लेटफॉर्म लॉन्च किया गया है।
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने केंद्र सरकार और प्रशासन को स्पष्ट अल्टीमेटम जारी करते हुए चेतावनी दी है कि यदि मंगलवार तक गिरफ्तार किए गए सभी छात्रों को रिहा नहीं किया गया, तो पार्टी दोबारा अपना आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर होगी। सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि 25 जुलाई को सरकार की ओर से यह लिखित और मौखिक आश्वासन दिया गया था कि प्रदर्शनकारी छात्रों और आयोजकों पर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। हालांकि, इसके बावजूद देशभर में छात्रों के खिलाफ मामले दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया जा रहा है।
सीजेपी ने मांग की है कि सरकार जल्द से जल्द लिखित समझौता सामने लाए और गिरफ्तार छात्रों को तत्काल रिहा करे, अन्यथा जंतर-मंतर से लेकर देश के अन्य हिस्सों में धरना-प्रदर्शन का दौर एक बार फिर शुरू हो जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: ‘लाठीचार्ज को ठहराया नहीं जा सकता उचित’
इस बीच, प्रदर्शनकारियों पर हुए लाठीचार्ज और पुलिस कार्रवाई के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि भारतीय संविधान नागरिकों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन का मौलिक अधिकार देता है।
अदालत ने जोर देकर कहा कि किसी आंदोलन या विरोध प्रदर्शन का हवाला देकर पुलिस प्रशासन अपनी ‘ज्यादतियों’ या लाठीचार्ज जैसी कठोर दंडात्मक कार्रवाई को उचित नहीं ठहरा सकता। अदालत की इस टिप्पणी से सीजेपी और प्रदर्शनकारी छात्रों के रुख को कानूनी और नैतिक रूप से बड़ा बल मिला है।
कपिल सिब्बल का समर्थन: 1 करोड़ रुपये का लीगल एड फंड
कानूनी मोर्चे पर प्रदर्शनकारियों को देश के जाने-माने वकील और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल का मजबूत साथ मिला है। सीजेपी प्रवक्ता ने बताया कि वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल कानूनी लड़ाई में सीधे तौर पर मदद कर रहे हैं।
कपिल सिब्बल ने घोषणा की है कि वह प्रदर्शनकारियों की कानूनी सहायता के लिए 1 करोड़ रुपये का योगदान देंगे। उन्होंने कहा कि देश के जिन-जिन हिस्सों में छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए हैं, वहां उन्हें मुफ्त कानूनी मदद (Legal Aid) मुहैया कराई जाएगी। सिब्बल ने यह चिंता भी जताई कि पुलिस ‘फेशियल रिकग्निशन’ जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर बेकसूर लोगों को लक्षित कर सकती है और इसमें सांप्रदायिक कोण (Communal angle) भी लाया जा सकता है, जिसे रोकने के लिए कानूनी लड़ाई बेहद जरूरी है।
एफआईआर (FIR) की प्रतियों की मांग और पुलिस के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी
सीजेपी के एक अन्य प्रवक्ता आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि 25 जुलाई को भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा, केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और दिल्ली पुलिस कमिश्नर के साथ हुई वार्ता में एफआईआर की कॉपियां उपलब्ध कराने की बात कही गई थी। हालांकि, अभी तक प्रदर्शनकारियों को इन मुकदमों की सूची और एफआईआर की प्रति नहीं सौंपी गई है।
सौरव दास ने स्पष्ट किया कि पार्टी रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और दिल्ली पुलिस के उन कर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराएगी, जिन्होंने प्रदर्शन के दौरान बल प्रयोग किया। इसके लिए सीजेपी एक विशेष वेबसाइट भी तैयार कर रही है, जहां पुलिस हिंसा से पीड़ित छात्र अपने वीडियो और सबूत सीधे अपलोड कर सकेंगे।
‘साक्षी’ प्लेटफॉर्म से जुटाए जाएंगे पुलिस कार्रवाई के सबूत
पुलिस की कथित बर्बरता और ज्यादती के ठोस सबूत जुटाने के लिए कॉकरोच जनता पार्टी ने ‘साक्षी’ (Sakshi) नामक एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है। सीजेपी प्रवक्ताओं के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान कई स्थानों पर महिला छात्रों के साथ कथित तौर पर मारपीट और बदसलूकी की घटनाएं सामने आई हैं।
सीजेपी ने देश की जनता और छात्रों से अपील की है कि जिनके पास भी प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई, लाठीचार्ज या झड़प के वीडियो, तस्वीरें अथवा अन्य साक्ष्य मौजूद हैं, वे उन्हें ‘साक्षी’ प्लेटफॉर्म पर तुरंत अपलोड करें। इन एकत्रित सबूतों के आधार पर दोषी पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ अदालत के जरिए सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
सरकार का रुख: शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को राहत, उपद्रवियों पर सख्ती
दूसरी ओर, सरकारी सूत्रों का कहना है कि प्रशासन शांतिपूर्ण ढंग से अपनी आवाज उठाने वाले नागरिकों और विद्यार्थियों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करेगा। सूत्रों के अनुसार, यदि किसी निर्दोष या शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी के खिलाफ गलती से एफआईआर दर्ज हुई है, तो समीक्षा के बाद उसे वापस लिया जाएगा।
हालांकि, सरकार के बयानों और प्रशासनिक रवैये से यह भी साफ संदेश दिया गया है कि प्रदर्शन की आड़ में हिंसा भड़काने, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और पुलिस पर हमला करने वाले तत्वों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। अब सबकी नजरें मंगलवार की समयसीमा पर टिकी हैं कि क्या सरकार और सीजेपी के बीच लिखित समझौते पर बात बनती है या देश एक बार फिर बड़े आंदोलन का साक्षी बनता है।