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अमेरिकी बाजारों की रिकॉर्ड तेजी और टेक शेयरों में खरीदारी के बीच एशियाई शेयर बाजारों में जोरदार उछाल देखने को मिला। जापान का निक्केई 3% चढ़ा, जबकि तेल की कीमतों और बॉन्ड यील्ड में गिरावट दर्ज की गई।
एशियाई शेयर बाजारों में बुधवार को जबरदस्त तेजी देखने को मिली। अमेरिकी शेयर बाजार में मजबूत कॉर्पोरेट नतीजों और टेक्नोलॉजी कंपनियों में बढ़ती खरीदारी के बाद निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ, जिसका असर एशियाई बाजारों पर भी साफ दिखाई दिया। जापान, दक्षिण कोरिया और अन्य एशियाई बाजारों में प्रमुख सूचकांक तेजी के साथ कारोबार करते नजर आए। वहीं, दूसरी ओर वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों और बॉन्ड यील्ड में गिरावट दर्ज की गई, क्योंकि निवेशकों को उम्मीद है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में व्यापारिक आवाजाही को लेकर सकारात्मक प्रगति हो सकती है।
वैश्विक बाजारों में इस समय निवेशकों की निगाहें कॉर्पोरेट आय, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से जुड़ी कंपनियों के प्रदर्शन, ऊर्जा बाजार और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर टिकी हुई हैं। इन्हीं कारकों ने बुधवार को एशियाई बाजारों को मजबूती प्रदान की।
जापान और दक्षिण कोरिया के बाजारों में शानदार उछाल
बुधवार के कारोबार में जापान का प्रमुख शेयर सूचकांक निक्केई (Nikkei) लगभग 3 प्रतिशत की तेजी के साथ कारोबार करता दिखा। वहीं, दक्षिण कोरिया का बाजार भी करीब 3.4 प्रतिशत चढ़ गया। जापानी बाजार में ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और टेक्नोलॉजी कंपनियों के शेयरों में जोरदार खरीदारी देखने को मिली।
इसके अलावा जापान को छोड़कर एशिया-प्रशांत क्षेत्र के शेयरों का MSCI Asia Pacific Index भी करीब 1.5 प्रतिशत की बढ़त के साथ कारोबार करता नजर आया। इससे यह संकेत मिलता है कि निवेशकों का रुझान एक बार फिर जोखिम वाले निवेश (Risk Assets) की ओर बढ़ रहा है।
अमेरिकी बाजार की मजबूती का असर
एशियाई बाजारों की इस तेजी के पीछे अमेरिका के शेयर बाजार का मजबूत प्रदर्शन प्रमुख कारण माना जा रहा है। वॉल स्ट्रीट में कई बड़ी कंपनियों ने उम्मीद से बेहतर तिमाही नतीजे पेश किए, जिससे प्रमुख अमेरिकी सूचकांक रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गए।
विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग और सेमीकंडक्टर सेक्टर की कंपनियों में निवेशकों ने जमकर खरीदारी की। इससे वैश्विक निवेशकों का भरोसा बढ़ा और एशियाई बाजारों में भी सकारात्मक माहौल बना।
सभी टेक कंपनियों को नहीं मिला फायदा
हालांकि टेक्नोलॉजी सेक्टर में तेजी के बावजूद सभी कंपनियां निवेशकों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरीं। अमेरिकी चिप निर्माता AMD ने बाजार के अनुमान से बेहतर वित्तीय नतीजे पेश किए, लेकिन इसके बावजूद कंपनी के शेयर आफ्टर-मार्केट ट्रेडिंग में करीब 9 प्रतिशत तक गिर गए।
विश्लेषकों का मानना है कि हाल के महीनों में AMD के शेयरों में तेज उछाल के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली (Profit Booking) की, जिससे शेयरों में गिरावट आई।
AI सेक्टर में बढ़ती लागत बनी चिंता
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सैटेलाइट टेक्नोलॉजी से जुड़ी कंपनी SpaceX के शेयरों में भी लगभग 7.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों को चिंता है कि AI इंफ्रास्ट्रक्चर और अत्याधुनिक कंप्यूटिंग क्षमता विकसित करने में कंपनियों को भारी पूंजी निवेश करना पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि AI उद्योग में प्रतिस्पर्धा बढ़ने के साथ-साथ डेटा सेंटर, हाई-परफॉर्मेंस चिप्स और कंप्यूटिंग संसाधनों पर होने वाला खर्च लगातार बढ़ रहा है। इसके चलते कई कंपनियों के नकदी प्रवाह (Cash Flow) पर दबाव बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों ने जताई निवेश को लेकर चिंता
ब्रोकरेज फर्म Pepperstone के रिसर्च प्रमुख क्रिस वेस्टन के अनुसार, AI क्षेत्र की कंपनियां परिचालन के स्तर पर अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं, लेकिन उनका आक्रामक निवेश कार्यक्रम भविष्य में अतिरिक्त पूंजी जुटाने की आवश्यकता पैदा कर सकता है।
उनका मानना है कि आने वाले समय में निवेशकों की सबसे बड़ी चिंता यह रहेगी कि कंपनियां अपनी विकास योजनाओं के लिए आवश्यक पूंजी कैसे जुटाती हैं और इसकी लागत कितनी होगी।
तेल की कीमतों में आई नरमी
इस बीच वैश्विक तेल बाजार में भी नरमी देखने को मिली। निवेशकों को उम्मीद है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों की आवाजाही को लेकर स्थिति बेहतर हो सकती है। यदि क्षेत्र में तनाव कम होता है तो कच्चे तेल की आपूर्ति सामान्य रहने की संभावना बढ़ेगी, जिससे कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।
तेल की कीमतों में गिरावट से आयातक देशों के लिए राहत की उम्मीद बढ़ी है और इससे महंगाई पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है।
आगे बाजार की दिशा किन कारकों पर निर्भर करेगी?
विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दिनों में वैश्विक बाजारों की चाल कई महत्वपूर्ण कारकों पर निर्भर करेगी। इनमें अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति, प्रमुख कंपनियों के तिमाही नतीजे, AI सेक्टर में निवेश की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतें और पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक घटनाक्रम प्रमुख रहेंगे। यदि कॉर्पोरेट आय मजबूत बनी रहती है और वैश्विक आर्थिक संकेत सकारात्मक रहते हैं, तो एशियाई शेयर बाजारों में तेजी का रुख आगे भी जारी रह सकता है।