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ओडिशा में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। छह जिलों में 1 लाख से अधिक लोग प्रभावित हैं। 79 बचाव दल राहत और बचाव कार्य में जुटे हैं।
ओडिशा में बाढ़ की स्थिति मंगलवार को भी गंभीर बनी रही। हालांकि राज्य की प्रमुख नदियों में जलस्तर खतरे के निशान से नीचे आ गया है, लेकिन छह जिलों में एक लाख से अधिक लोग अब भी बाढ़ से प्रभावित हैं। कई गांवों में पानी पूरी तरह नहीं उतरने के कारण लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए हैं। भद्रक, जाजपुर, केंद्रापड़ा, क्योंझर, नबरंगपुर और कोरापुट जिलों में कुल 79 बचाव दल तैनात किए गए हैं, जो लगातार राहत एवं बचाव अभियान चला रहे हैं।
भद्रक में सबसे ज्यादा लोग प्रभावित
भद्रक जिले में बाढ़ का असर सबसे अधिक देखने को मिल रहा है। अधिकारियों के अनुसार तिहिड़ी और चांदबाली ब्लॉक की 18 ग्राम पंचायतों के अंतर्गत आने वाले 70 गांवों में 75,432 लोग अब भी प्रभावित हैं। इन इलाकों में बाढ़ का पानी कई स्थानों पर जमा हुआ है और सामान्य जनजीवन प्रभावित है। प्रशासन की टीमें लोगों तक आवश्यक राहत सामग्री पहुंचाने और जलभराव वाले क्षेत्रों की निगरानी में जुटी हुई हैं। स्थानीय स्तर पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन को अलर्ट पर रखा गया है।
जाजपुर और केंद्रापड़ा में भी हालात चिंताजनक
जाजपुर जिले में भी बाढ़ का व्यापक प्रभाव देखने को मिला है। बिंझारपुर और दशरथपुर ब्लॉक के 41 गांवों में 21 हजार से अधिक लोग बाढ़ की चपेट में हैं। कई इलाकों में जलभराव के कारण लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है। वहीं, केंद्रापड़ा जिले में पांच ब्लॉक और एक शहरी स्थानीय निकाय क्षेत्र के 5,000 से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित बताए गए हैं। प्रशासन द्वारा प्रभावित इलाकों पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत के अनुसार राहत एवं बचाव दलों को भेजा जा रहा है।
नबरंगपुर और कोरापुट में भारी बारिश का असर
पिछले तीन दिनों से हुई भारी बारिश के कारण क्योंझर, नबरंगपुर और कोरापुट जिलों के कुछ हिस्सों में भी बाढ़ और जलभराव की स्थिति पैदा हुई है। नबरंगपुर जिले में प्रशासन ने 1,622 लोगों को सुरक्षित स्थानों से निकालकर राहत शिविरों में पहुंचाया है। इसी तरह कोरापुट में 660 लोगों को सुरक्षित निकालकर राहत शिविरों में रखा गया है। इन शिविरों में प्रभावित लोगों के लिए आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। प्रशासन का ध्यान विशेष रूप से उन क्षेत्रों पर है, जहां लगातार बारिश या जलभराव के कारण लोगों के फंसे होने की आशंका है।
79 बचाव दल राहत कार्य में जुटे
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक बाढ़ प्रभावित इलाकों में कुल 79 बचाव दल तैनात किए गए हैं। इनमें ओडिशा डिजास्टर रैपिड एक्शन फोर्स यानी ओड्राफ की 28 टीमें, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल यानी एनडीआरएफ की एक टीम और दमकल विभाग की 50 टीमें शामिल हैं। इन टीमों को प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल बचाव, राहत और निकासी अभियान के लिए लगाया गया है। प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि किसी भी तरह की आपात स्थिति की सूचना मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाए।
प्रमुख नदियां खतरे के निशान से नीचे
जल संसाधन विभाग के इंजीनियर-इन-चीफ दिलीप कुमार राउत ने बताया कि राज्य की प्रमुख नदियां मंगलवार को खतरे के निशान से नीचे बह रही थीं। बैतरणी, जालका, वंशधारा, ब्राह्मणी, सालंदी और बुधाबलंगा समेत प्रमुख नदियों में जलस्तर फिलहाल नियंत्रण में है। उन्होंने कहा कि नदियों में इस समय बाढ़ की स्थिति नहीं है, लेकिन कई गांवों में पानी अब भी जमा होने के कारण वे जलमग्न या संपर्क से कटे हुए हैं। पानी धीरे-धीरे कम होने के साथ हालात में सुधार की उम्मीद जताई गई है।
महानदी का जलस्तर बढ़ने की संभावना
दिलीप कुमार राउत के अनुसार हिराकुंड बांध से पानी छोड़े जाने के कारण बुधवार को महानदी का जलस्तर बढ़ सकता है। कटक जिले के मुंडली में नदी का प्रवाह करीब 6 लाख क्यूसेक से बढ़कर 6.7 लाख क्यूसेक तक पहुंचने का अनुमान है। हालांकि यह बढ़ोतरी सीमित है और इससे बड़े पैमाने पर बाढ़ का खतरा नहीं माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि बाढ़ का पानी करीब 8 से 10 घंटे तक बना रह सकता है और इसके बाद धीरे-धीरे कम होने की उम्मीद है। हाल के दिनों में भी मुंडली में लगभग 6.77 लाख क्यूसेक पानी का प्रवाह दर्ज किया गया था, लेकिन उस समय बाढ़ जैसी स्थिति नहीं बनी थी।
प्रशासन को अलर्ट रहने के निर्देश
राज्य सरकार ने सभी संबंधित जिला प्रशासन को किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहने के निर्देश दिए हैं। निचले इलाकों में जलभराव और स्थानीय स्तर पर बाढ़ की स्थिति पर लगातार निगरानी रखने को कहा गया है। इसके अलावा सड़कों, अंडरपास और संवेदनशील स्थानों की स्थिति पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। कमजोर ढांचों और कच्ची सड़कों को बारिश या जलभराव से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए भी प्रशासन को सतर्क रहने को कहा गया है।
बुधवार को बारिश को लेकर राहत
भारत मौसम विज्ञान विभाग यानी आईएमडी के अनुसार कम दबाव का क्षेत्र अब झारखंड और आसपास के इलाकों की ओर बढ़ गया है। अगले 24 घंटों के दौरान इसके लगभग पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने की संभावना है। राहत की बात यह है कि आईएमडी ने बुधवार के लिए ओडिशा में किसी विशेष बारिश की चेतावनी जारी नहीं की है। इससे राज्य के बाढ़ प्रभावित इलाकों में जलस्तर घटने और स्थिति सामान्य होने की उम्मीद बढ़ी है। हालांकि प्रशासन ने साफ किया है कि पानी पूरी तरह उतरने तक राहत एवं बचाव अभियान जारी रहेगा और संवेदनशील इलाकों में किसी भी संभावित खतरे को देखते हुए निगरानी बरकरार रखी जाएगी।