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बॉबी देओल और सान्या मल्होत्रा स्टारर फिल्म ‘बंदर’ पर महिला विरोधी होने के आरोपों के बाद निर्देशक अनुराग कश्यप की प्रतिक्रिया सामने आई है। अनुराग कश्यप ने कुणाल कामरा के शो में माना कि फिल्म का रिलीज वर्जन उनका फाइनल कट नहीं था।
अनुराग कश्यप की नई फिल्म ‘बंदर’ (Bandar), जिसमें बॉबी देओल, सान्या मल्होत्रा, सपना पब्बी और सबा आजाद मुख्य भूमिकाओं में हैं, हाल ही में सिनेमाघरों में रिलीज हुई है। सच्ची घटनाओं से प्रेरित यह क्राइम थ्रिलर फिल्म अपनी कसी हुई कहानी और बॉबी देओल के दमदार अभिनय के लिए खूब तारीफें बटोर रही है। हालांकि, फिल्म की रिलीज के साथ ही एक बड़ा विवाद भी खड़ा हो गया है। दर्शकों के एक बड़े वर्ग ने फिल्म पर महिला विरोधी (misogynistic) होने और #MeToo आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश का आरोप लगाया है।
इस पूरे विवाद और बैकलाश पर अब खुद निर्देशक अनुराग कश्यप की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि सिनेमाघरों में रिलीज हुई यह फिल्म उनका ‘फाइनल कट’ (Final Cut) नहीं थी और वे इसके अंतिम रूप से खुद को दूर रखते हैं।
अनुराग कश्यप का बड़ा खुलासा: ‘यह मेरा फाइनल कट नहीं था’
मशहूर स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा के यूट्यूब चैनल पर बातचीत के दौरान अनुराग कश्यप ने इस फिल्म से जुड़े कई चौंकाने वाले खुलासे किए। जब कुणाल कामरा ने उनसे पूछा कि उन्होंने खुद कुणाल को यह फिल्म न देखने की सलाह क्यों दी थी, तो अनुराग ने बताया:
“जब मैंने कहा था कि फिल्म मत देखो, तो उसका कारण यह था कि मैं इसकी जिम्मेदारी नहीं ले सकता। अगर आपने ध्यान दिया हो, तो मैंने इस फिल्म के प्रचार के लिए कोई इंटरव्यू भी नहीं दिया। क्योंकि जो वर्जन बाहर आया है, वह मेरा फाइनल कट नहीं है। फिल्म पर जो आलोचनाएं हो रही हैं, वे काफी हद तक सही हैं। एडिटिंग में कुछ हिस्से हटाने के कारण फिल्म का नजरिया (perspective) एकतरफा हो गया है। मैं ऐसा काम पेश करना चाहता था जिसकी जिम्मेदारी मैं खुद ले सकूं, लेकिन ऐसा न हो पाने के कारण मैं इन आलोचनाओं का बचाव नहीं कर पाया।”
फिल्म के कट से बदला कहानी का नजरिया
अनुराग कश्यप ने बातचीत में आगे समझाया कि फिल्म की शूटिंग पूरी तरह से उनके द्वारा ही की गई थी और सिनेमैटिक रूप से फिल्म में सब कुछ उनका ही है। हालांकि, पोस्ट-प्रोडक्शन और एडिटिंग टेबल पर स्टूडियो द्वारा किए गए बदलावों ने पूरी फिल्म की भावना को बदलकर रख दिया।
उन्होंने कहा कि फिल्म से कुछ महत्वपूर्ण हिस्सों को काट दिया गया, जिससे कहानी का संतुलन और झुकाव पूरी तरह बदल गया। अनुराग के अनुसार, जो लोग समाज और घटनाओं के प्रति जागरूक हैं, वे फिल्म के इरादे को समझ सकते हैं, लेकिन जो लोग अनजान हैं, वे गलत दिशा में प्रभावित हो सकते हैं।
क्यों लागू नहीं हो पाता ‘डायरेक्टर्स कट’?
जब कुणाल कामरा ने पूछा कि आज भी भारतीय सिनेमा में निर्देशक के अधिकारों (Director’s Cut) को सुरक्षित रखने की कोई पुख्ता व्यवस्था क्यों नहीं है, तो अनुराग ने कॉरपोरेटाइजेशन और लीगल जटिलताओं का हवाला दिया।
उन्होंने बताया कि:
- केवल कागजी समझौते (Paperwork) अब पर्याप्त नहीं रह गए हैं।
- जब किसी फिल्म की रिलीज में देरी होती है, तो उसका बजट और लागत तेजी से बढ़ने लगती है, जिससे फिल्म एक वित्तीय जोखिम (Financial Liability) बन जाती है।
- ऐसे मामलों में स्टूडियो पूरी तरह से प्रोजेक्ट पर अपना नियंत्रण बना लेता है और अंतिम फैसले खुद लेने लगता है।
कॉरपोरेटाइजेशन और इंडिपेंडेंट सिनेमा का संकट
अनुराग कश्यप ने फिल्म उद्योग के बदलते ढांचे पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि अब स्थितियां पहले जैसी नहीं रहीं। पहले निर्माता अपना घर गिरवी रखकर या सिनेमा के प्रति जुनून के कारण फिल्में बनाते थे, लेकिन आज का दौर व्यावसायिक सफलता का है।
आज पूरी फिल्म इंडस्ट्री पर केवल 4-5 बड़ी कॉरपोरेट कंपनियों का दबदबा है। विकल्प बेहद सीमित हैं, जिसके कारण कई स्वतंत्र (Independent) और बेहतरीन फिल्में अटक कर रह जाती हैं, क्योंकि ये बड़ी कंपनियां एक साथ कई फिल्में बनाती हैं और अपनी सहूलियत के हिसाब से उन्हें रिलीज या एडिट करती हैं।
रचनात्मक स्वतंत्रता पर उठा बड़ा सवाल
फिल्म ‘बंदर’ को लेकर हुआ यह विवाद बॉलीवुड में निर्देशकों की रचनात्मक स्वतंत्रता (Creative Freedom) और कॉरपोरेट स्टूडियोज के बीच की खींचतान को एक बार फिर सामने ले आया है। अनुराग कश्यप का फिल्म के प्रमोशन से खुद को दूर रखना और आलोचकों का खुलकर समर्थन करना यह दर्शाता है कि एक फिल्म निर्माता के लिए अपने ओरिजिनल विजन के साथ समझौता करना कितना दुखद हो सकता है।