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संयुक्त राष्ट्र महासभा में तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन ने कश्मीर मुद्दे का जिक्र किया। भारत ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता से जुड़ा मामला है।
तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन की ओर से संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में कश्मीर का मुद्दा उठाए जाने के बाद भारत ने अपनी स्थिति एक बार फिर स्पष्ट की है। भारत के विदेश मंत्रालय ने एर्दोगन की टिप्पणी को अवांछित बताते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता से जुड़ा विषय है और इस मामले पर किसी बाहरी पक्ष का कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है। संयुक्त राष्ट्र महासभा का 81वां सत्र सितंबर 2026 में शुरू हुआ और इसका उच्चस्तरीय सप्ताह 22 से 29 सितंबर तक न्यूयॉर्क में आयोजित हुआ।
UN महासभा में एर्दोगन ने क्या कहा?
तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन ने 81वें संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र के दौरान दुनिया के नेताओं को संबोधित किया। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, एर्दोगन ने अपने संबोधन में बहुपक्षीय व्यवस्था में विश्वास बहाल करने और संयुक्त राष्ट्र में सुधार की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने दुनिया के विभिन्न संघर्षों का भी उल्लेख किया।
कश्मीर के संदर्भ में एर्दोगन ने कहा कि दक्षिण एशिया में कश्मीर सहित सभी विवादों का समाधान संयुक्त राष्ट्र चार्टर और संबंधित प्रस्तावों के दायरे में बातचीत के जरिए किया जाना चाहिए। उनका यह रुख पहली बार सामने नहीं आया है। तुर्की के राष्ट्रपति पहले भी संयुक्त राष्ट्र के मंच से कश्मीर को लेकर टिप्पणी करते रहे हैं। उनकी ऐसी टिप्पणियों पर भारत लगातार अपनी आपत्ति दर्ज कराता रहा है और कश्मीर को भारत की संप्रभुता तथा क्षेत्रीय अखंडता से जुड़ा विषय बताता रहा है।
भारत ने एर्दोगन की टिप्पणी को बताया अवांछित
एर्दोगन के बयान पर भारत के विदेश मंत्रालय ने कड़ा जवाब दिया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से जब प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान तुर्की के राष्ट्रपति की टिप्पणी को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने भारत की स्थापित स्थिति दोहराई। उन्होंने कहा कि यह भारत की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता से जुड़ा मामला है और इस मुद्दे पर किसी बाहरी पक्ष का कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है।
भारत का यह रुख विदेश मंत्रालय पहले भी अलग-अलग मौकों पर स्पष्ट कर चुका है। उदाहरण के लिए, जून 2024 में विदेश मंत्रालय ने चीन-पाकिस्तान के संयुक्त बयान में जम्मू-कश्मीर के संदर्भों को खारिज करते हुए कहा था कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं तथा किसी अन्य देश को इस विषय पर टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है।
कश्मीर पर भारत की नीति क्या है?
कश्मीर को लेकर भारत की आधिकारिक स्थिति लंबे समय से स्पष्ट रही है। नई दिल्ली जम्मू-कश्मीर को अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से जुड़ा विषय मानता है तथा तीसरे पक्ष की मध्यस्थता या हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं करता। विदेश मंत्रालय की ओर से समय-समय पर जारी बयानों में भी इसी नीति को दोहराया गया है।
भारत का कहना है कि किसी दूसरे देश की ओर से जम्मू-कश्मीर के बारे में टिप्पणी करना भारत के आंतरिक और संप्रभु मामलों से जुड़े विषय पर बाहरी हस्तक्षेप के समान है। इसी आधार पर नई दिल्ली ने एर्दोगन की हालिया टिप्पणी को भी स्वीकार नहीं किया।
संयुक्त राष्ट्र के मंच पर कश्मीर का उल्लेख होने के बाद भारत की प्रतिक्रिया को इसी स्थापित नीति के संदर्भ में देखा जा रहा है। भारत पहले भी विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यह स्पष्ट करता रहा है कि जम्मू-कश्मीर से जुड़े मामलों पर किसी तीसरे देश की भूमिका स्वीकार्य नहीं है।
तुर्की और पाकिस्तान के संबंधों का संदर्भ
कश्मीर पर एर्दोगन के रुख को भारत-तुर्की और तुर्की-पाकिस्तान संबंधों के व्यापक संदर्भ में भी देखा जाता है। तुर्की और पाकिस्तान के बीच राजनीतिक और रणनीतिक संबंध हैं तथा तुर्की के राष्ट्रपति अतीत में कश्मीर को लेकर सार्वजनिक बयान दे चुके हैं। भारत ने ऐसे बयानों पर अपनी असहमति व्यक्त की है।
हालांकि, एर्दोगन के हालिया संयुक्त राष्ट्र संबोधन में कश्मीर के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर कई अन्य मुद्दों पर भी चर्चा हुई। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने बहुपक्षीय व्यवस्था, संयुक्त राष्ट्र सुधार और दुनिया में जारी अनेक संघर्षों पर अपनी बात रखी।
UN का 81वां सत्र क्यों है महत्वपूर्ण?
संयुक्त राष्ट्र महासभा का 81वां सत्र 8 सितंबर 2026 को शुरू हुआ है। इसका विषय है- “Restoring Trust, Managing Transformation: A United Nations That Delivers for All”। उच्चस्तरीय सप्ताह के दौरान दुनिया के विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों और सरकार प्रमुखों ने अंतरराष्ट्रीय शांति, सुरक्षा, संघर्ष, विकास और बहुपक्षीय सहयोग जैसे मुद्दों पर अपने विचार रखे।
इसी दौरान अलग-अलग देशों ने क्षेत्रीय संघर्षों और विवादों पर अपनी स्थिति रखी। भारत ने भी संयुक्त राष्ट्र के मंच से आतंकवाद, क्षेत्रीय सुरक्षा, ऊर्जा और वैश्विक शांति से जुड़े विषयों पर अपना पक्ष रखा है।
भारत ने फिर स्पष्ट किया अपना रुख
एर्दोगन की टिप्पणी के बाद भारत का संदेश स्पष्ट रहा कि जम्मू-कश्मीर से संबंधित विषय पर किसी बाहरी पक्ष का अधिकार क्षेत्र स्वीकार नहीं किया जाएगा। विदेश मंत्रालय ने इसे भारत की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता से जुड़ा मामला बताया है। यह रुख भारत की पहले से चली आ रही आधिकारिक नीति के अनुरूप है।
इस पूरे घटनाक्रम में एक तरफ तुर्की के राष्ट्रपति ने संयुक्त राष्ट्र के मंच से कश्मीर सहित विवादों के समाधान के लिए बातचीत और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का संदर्भ दिया, वहीं भारत ने अपने संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता संबंधी रुख को दोहराते हुए बाहरी पक्ष की भूमिका को अस्वीकार किया। इस तरह संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान कश्मीर को लेकर भारत और तुर्की के रुख में अंतर एक बार फिर सामने आया है।