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वसीम जाफर ने रिंकू सिंह को भारतीय टी20 टीम में जगह नहीं मिलने पर सवाल उठाए हैं। जानिए पांचवें और छठे नंबर पर रिंकू के रिकॉर्ड और वेस्टइंडीज के खिलाफ भारत की हार के बाद क्या बोले जाफर।
भारतीय क्रिकेट टीम को वेस्टइंडीज के खिलाफ पांच मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज के चौथे मुकाबले में 24 रन से हार का सामना करना पड़ा। बुधवार को खेले गए इस मैच में वेस्टइंडीज ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 3 विकेट के नुकसान पर 247 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। इसके जवाब में भारतीय टीम लक्ष्य हासिल नहीं कर सकी और मुकाबला गंवा बैठी। इस हार के बाद टीम इंडिया की रणनीति और खिलाड़ियों के चयन को लेकर सवाल उठने लगे हैं। पूर्व भारतीय क्रिकेटर वसीम जाफर ने भी टीम प्रबंधन के फैसले पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने खास तौर पर स्टार बल्लेबाज रिंकू सिंह को टी20 टीम में जगह नहीं मिलने पर नाराजगी जताई। जाफर का मानना है कि रिंकू पांचवें और छठे नंबर पर बल्लेबाजी करने के लिए बेहतरीन विकल्प हैं। बाएं हाथ के इस बल्लेबाज में मैच का रुख बदलने की क्षमता है और वह अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से मुश्किल परिस्थितियों में भी टीम को जीत दिला सकते हैं। जाफर ने सवाल उठाया कि अगर रिंकू गेंदबाजी नहीं करते, तो क्या सिर्फ इसी वजह से उन्हें टीम से बाहर रखना सही फैसला है?
रिंकू सिंह को टीम में शामिल करने के पक्ष में वसीम जाफर
पूर्व भारतीय क्रिकेटर वसीम जाफर ने अपने यूट्यूब चैनल पर रिंकू सिंह को लेकर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि बल्लेबाजी के लिहाज से रिंकू पांचवें और छठे नंबर पर शानदार प्रदर्शन करते हैं। वह बाएं हाथ के बल्लेबाज हैं, जिससे टीम के बल्लेबाजी क्रम में विविधता भी आती है। जाफर के अनुसार, रिंकू की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वह मध्यक्रम और निचले क्रम में उतरकर तेजी से रन बना सकते हैं। टी20 क्रिकेट में इस भूमिका के लिए ऐसे बल्लेबाज की जरूरत होती है, जो कम गेंदों में मैच का रुख बदल सके। जाफर का मानना है कि रिंकू इस जिम्मेदारी को बखूबी निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि रिंकू भारतीय टी20 टीम का हिस्सा नहीं हैं और इसकी वजह यह बताई जा रही है कि वह गेंदबाजी नहीं करते। जाफर के मुताबिक, किसी बल्लेबाज की उपयोगिता का आकलन उसकी भूमिका और प्रदर्शन के आधार पर होना चाहिए।
‘रिंकू होते तो शायद मैच का नतीजा बदल जाता’
वसीम जाफर ने रिंकू सिंह की क्षमता पर भरोसा जताते हुए कहा कि अगर वह टीम में उस स्थान पर बल्लेबाजी कर रहे होते, तो मुकाबले का नतीजा अलग भी हो सकता था। उन्होंने यह भी कहा कि रिंकू ने फ्रेंचाइजी क्रिकेट में कई बार अपनी बल्लेबाजी से मैच जिताए हैं। जाफर ने रजत पाटीदार का उदाहरण देते हुए कहा कि उनके मामले को समझा जा सकता है, क्योंकि वह शीर्ष क्रम में बल्लेबाजी करते हैं और वहां जगह सीमित है। लेकिन रिंकू की भूमिका अलग है। वह मध्यक्रम में बल्लेबाजी करते हैं और पांचवें या छठे नंबर पर टीम की जरूरत के अनुसार तेजी से रन बना सकते हैं। जाफर का मानना है कि भारतीय टीम को इस भूमिका के लिए रिंकू जैसे खिलाड़ी पर भरोसा करना चाहिए। हालांकि, यह कहना मुश्किल है कि रिंकू की मौजूदगी से वेस्टइंडीज के खिलाफ चौथे टी20 मैच का नतीजा निश्चित रूप से बदल जाता, लेकिन उनके रिकॉर्ड से पता चलता है कि वह इस भूमिका में प्रभावी रहे हैं।
वेस्टइंडीज ने भारत के खिलाफ बनाया बड़ा स्कोर
भारत और वेस्टइंडीज के बीच चौथे टी20 मुकाबले में मेहमान टीम ने शानदार बल्लेबाजी का प्रदर्शन किया। वेस्टइंडीज ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 3 विकेट पर 247 रन बनाए। टीम के कप्तान शाई होप ने आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए 50 गेंदों पर नाबाद 102 रन बनाए। उनकी पारी ने भारतीय गेंदबाजों पर दबाव बना दिया और वेस्टइंडीज को बड़े स्कोर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। इतने बड़े लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम को तेजी से रन बनाने की जरूरत थी, लेकिन टीम लक्ष्य से 24 रन पीछे रह गई। इस हार के साथ पांच मैचों की सीरीज 2-2 से बराबर हो गई। मुकाबले के बाद भारतीय टीम के बल्लेबाजी क्रम, खिलाड़ियों के चयन और दबाव में प्रदर्शन करने की क्षमता पर चर्चा तेज हो गई। इसी बीच जाफर की टिप्पणी ने रिंकू सिंह को टीम में शामिल करने की मांग को फिर चर्चा में ला दिया।
पांचवें और छठे नंबर पर रिंकू सिंह के आंकड़े शानदार
रिंकू सिंह को लेकर वसीम जाफर की दलील को उनके टी20 अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड से भी समर्थन मिलता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, रिंकू ने टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में पांचवें और छठे नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए 22 पारियों में 518 रन बनाए हैं। इस दौरान उनका औसत 43.15 और स्ट्राइक रेट 156 रहा है। ये आंकड़े दिखाते हैं कि रिंकू इस भूमिका में तेजी से रन बनाने के साथ अपनी विकेट बचाने की क्षमता भी रखते हैं। टी20 क्रिकेट में मध्यक्रम के बल्लेबाजों को अक्सर कम गेंदों में बड़ा योगदान देना पड़ता है। कई बार टीम शुरुआती विकेट गंवा देती है, तो कभी अंतिम ओवरों में तेजी से रन बनाने की जरूरत होती है। रिंकू का प्रदर्शन बताता है कि वह ऐसी परिस्थितियों में उपयोगी साबित हो सकते हैं। हालांकि, टीम चयन में खिलाड़ी की मौजूदा फॉर्म, फिटनेस, विपक्षी टीम की रणनीति और टीम संयोजन जैसे पहलुओं पर भी विचार किया जाता है।
इस साल रिंकू का प्रदर्शन कैसा रहा?
रिंकू सिंह के लिए इस साल के आंकड़े बहुत प्रभावशाली नहीं रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, उन्होंने 13 मैचों में 152 रन बनाए हैं। इस दौरान उनका औसत 25.33 और स्ट्राइक रेट 139.44 रहा है। इन आंकड़ों के आधार पर उनकी मौजूदा फॉर्म को लेकर सवाल उठ सकते हैं। इसके बावजूद जाफर का मानना है कि रिंकू की भूमिका और उनकी क्षमता को ध्यान में रखते हुए उन्हें टीम में जगह मिलनी चाहिए। रिंकू जिम्बाब्वे दौरे के बाद से भारतीय टी20 टीम में अपनी जगह पक्की नहीं कर पाए हैं। किसी भी खिलाड़ी के लिए लगातार टीम में बने रहना चुनौतीपूर्ण होता है, खासकर तब जब टीम में कई प्रतिभाशाली बल्लेबाज चयन के लिए उपलब्ध हों। लेकिन मध्यक्रम में विशेषज्ञ भूमिका निभाने वाले खिलाड़ी का मूल्यांकन केवल कुल रन के आधार पर नहीं किया जा सकता। यह भी देखना जरूरी है कि उसने किस नंबर पर बल्लेबाजी की और टीम को किस तरह की स्थिति में उसकी जरूरत थी।
क्या टीम इंडिया रिंकू सिंह को देगी मौका?
वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरीज के चौथे मैच में मिली हार के बाद भारतीय टीम के चयन को लेकर बहस तेज हो गई है। वसीम जाफर की टिप्पणी ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या भारतीय टीम को मध्यक्रम में रिंकू सिंह जैसे आक्रामक बल्लेबाज को मौका देना चाहिए। उनके टी20 अंतरराष्ट्रीय आंकड़े पांचवें और छठे नंबर पर प्रभावशाली रहे हैं, जबकि इस साल के कुल आंकड़े अपेक्षाकृत साधारण हैं। ऐसे में टीम प्रबंधन के सामने मौजूदा फॉर्म और पहले के प्रदर्शन के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है। रिंकू को मौका देने से भारतीय बल्लेबाजी क्रम को बाएं हाथ का एक ऐसा विकल्प मिल सकता है, जो अंतिम ओवरों में तेजी से रन बना सके। हालांकि, अंतिम फैसला टीम प्रबंधन को ही करना है। अब देखना होगा कि आगामी मुकाबलों में भारतीय टीम अपनी रणनीति में बदलाव करती है या मौजूदा संयोजन पर भरोसा बनाए रखती है।