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अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में महिला सुरक्षा को लेकर बीजेपी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि छात्राओं को शाम के बाद घर में रहने की सलाह देने के बजाय सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करनी चाहिए।
दिल्ली में महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा को लेकर जारी चिंता के बीच आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली की बीजेपी सरकार पर निशाना साधा है। केजरीवाल ने कहा कि आज महिला छात्राएं अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं, लेकिन सरकार सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के बजाय उन्हें सलाह दे रही है कि शाम के बाद घर से बाहर न निकलें। उन्होंने सरकार से कहा कि महिलाओं की आजादी पर पाबंदी लगाने या उन्हें निर्देश देने के बजाय अपना काम करना चाहिए और राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। केजरीवाल की यह टिप्पणी दिल्ली में महिला सुरक्षा को लेकर छात्राओं के विरोध प्रदर्शनों के बीच आई है।
‘महिला छात्राओं को सलाह नहीं, सुरक्षा चाहिए’
केजरीवाल ने मंगलवार को जारी अपने वीडियो संदेश में कहा कि दिल्ली की महिला छात्राएं अपनी सुरक्षा को लेकर परेशान हैं। उन्होंने सरकार की ओर से महिलाओं और छात्राओं को शाम या रात में बाहर नहीं निकलने की सलाह दिए जाने पर सवाल उठाया। केजरीवाल ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की है। उनके मुताबिक, छात्राओं को घर में रहने की सलाह देने के बजाय सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने, पुलिस की मौजूदगी सुनिश्चित करने और महिलाओं के लिए सुरक्षित माहौल तैयार करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
केजरीवाल ने कहा कि महिलाएं देश की स्वतंत्र नागरिक हैं और उन्हें भी आजादी के साथ जीवन जीने का अधिकार है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सुरक्षा संबंधी समस्या है तो इसका समाधान महिलाओं की आवाजाही सीमित करना नहीं हो सकता। उनका कहना था कि सरकार को सुरक्षा व्यवस्था पर काम करना चाहिए, न कि महिलाओं को यह बताना चाहिए कि उन्हें कब घर से बाहर निकलना है।
‘सरकार अपना काम करे और सुरक्षा दे’
Dear BJP Govt,
Please don’t lecture female students and snatch their freedom. Just do your job and ensure safety of women in Delhi. https://t.co/bbAlYKUy8q
— Aam Aadmi Party Delhi (@AAPDelhi) September 29, 2026
केजरीवाल ने बीजेपी सरकार को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार का काम महिलाओं को लेक्चर देना नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि यदि छात्राओं को शाम के बाद बाहर नहीं निकलने की सलाह दी जाती है तो इससे उनकी स्वतंत्रता प्रभावित होती है। केजरीवाल ने सरकार से सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा बढ़ाने और ऐसी व्यवस्था तैयार करने की मांग की, जिससे महिलाएं और छात्राएं बिना डर के कॉलेज, काम और अन्य जरूरी गतिविधियों के लिए बाहर निकल सकें।
उनकी टिप्पणी ऐसे समय आई है जब दिल्ली विश्वविद्यालय और उससे जुड़े कई कॉलेजों की छात्राएं महिला सुरक्षा को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रही हैं। सितंबर में दक्षिण दिल्ली के आस्था कुंज पार्क में एक नाबालिग लड़की के कथित सामूहिक बलात्कार के बाद छात्राओं के बीच सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी। दिल्ली विश्वविद्यालय के कई कॉलेजों की छात्राओं ने विरोध प्रदर्शन कर बेहतर सुरक्षा व्यवस्था, सुरक्षित सार्वजनिक स्थान और प्रभावी पुलिस कार्रवाई की मांग की।
छात्राओं के प्रदर्शन में उठे सुरक्षा के सवाल
महिला सुरक्षा को लेकर दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्राओं ने अलग-अलग स्थानों पर प्रदर्शन किए हैं। प्रदर्शनकारियों ने बेहतर स्ट्रीट लाइटिंग, सार्वजनिक परिवहन की बेहतर उपलब्धता, पुलिस गश्त और सुरक्षित रास्तों की मांग उठाई। कुछ छात्राओं ने कॉलेज और आसपास के इलाकों में अंधेरे रास्तों, सीमित पुलिस मौजूदगी और सुरक्षा से जुड़े अन्य मुद्दों की ओर भी ध्यान दिलाया।
छात्राओं का कहना है कि महिलाओं की आवाजाही पर रोक लगाने के बजाय उन जगहों को सुरक्षित बनाया जाना चाहिए जहां से उन्हें कॉलेज, घर या काम पर आने-जाने के लिए गुजरना पड़ता है। इसी पृष्ठभूमि में केजरीवाल ने भी सरकार से महिलाओं की स्वतंत्रता को सीमित करने के बजाय सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है।
दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था पर सुप्रीम कोर्ट की भी नजर
दिल्ली में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने भी हाल में संज्ञान लिया है। 28 सितंबर के अपने आदेश में शीर्ष अदालत ने दिल्ली-एनसीआर में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर सामने आई घटनाओं पर चिंता जताई और सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जरूरत बताई। अदालत ने विशेष रूप से पार्कों, सड़कों, सार्वजनिक परिवहन, शैक्षणिक संस्थानों और अन्य संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा इंतजामों की जानकारी मांगी।
सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों से शाम और सुबह के समय विशेष सुरक्षा व्यवस्था, संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस गश्त तथा सार्वजनिक स्थानों पर रोशनी और सीसीटीवी की स्थिति की समीक्षा करने को कहा है। अदालत ने यह भी कहा कि सुरक्षा से जुड़े इंतजाम केवल कागज पर मौजूद नहीं होने चाहिए, बल्कि जमीन पर प्रभावी और संचालन में होने चाहिए।
सरकार की ओर से भी सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने के निर्देश
महिला सुरक्षा को लेकर दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने भी पुलिस और संबंधित एजेंसियों के साथ बैठक कर सुरक्षा उपायों की समीक्षा की है। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कॉलेजों और स्कूलों के छात्रों, संस्थानों के प्रमुखों और अन्य हितधारकों के साथ पुलिस अधिकारियों की बातचीत बढ़ाने के निर्देश दिए। संवेदनशील इलाकों में रोशनी, सीसीटीवी और पुलिस तैनाती को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है।
इस बीच, केजरीवाल की टिप्पणी ने महिला सुरक्षा को लेकर चल रही राजनीतिक बहस को फिर सामने ला दिया है। जहां वह सरकार से छात्राओं को सलाह देने के बजाय सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग कर रहे हैं, वहीं दिल्ली में प्रशासनिक स्तर पर पुलिस गश्त, सीसीटीवी, प्रकाश व्यवस्था और संवेदनशील स्थानों की सुरक्षा की समीक्षा की जा रही है। महिला सुरक्षा से जुड़े मामलों की जांच और जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया संबंधित एजेंसियों के अधिकार क्षेत्र में है।