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कैंसर को लेकर डॉक्टर ने बताए 5 जरूरी सच। जानें क्यों दर्द का इंतजार नहीं करना चाहिए, स्क्रीनिंग क्यों जरूरी है और कैंसर के इलाज में शॉर्टकट से क्यों बचें।
कैंसर आज दुनिया की गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक है। इसके कई प्रकार होते हैं और हर कैंसर के लक्षण, जोखिम कारक, जांच और इलाज अलग-अलग हो सकते हैं। समय पर कैंसर की पहचान और उचित उपचार से कई मामलों में बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। यही वजह है कि विशेषज्ञ लगातार लोगों को जागरूक रहने और अपने जोखिम के अनुसार जरूरी स्क्रीनिंग कराने की सलाह देते हैं। कैंसर को लेकर समाज में कई तरह की गलत धारणाएं भी मौजूद हैं। कुछ लोग मानते हैं कि कैंसर होने पर हमेशा दर्द जरूर होगा, तो कुछ लोग इलाज के लिए किसी चमत्कारी या शॉर्टकट तरीके की तलाश करते हैं। रायपुर के कैंसर सर्जन और सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. जयेश शर्मा ने कैंसर से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों को साझा किया है, जिन्हें हर व्यक्ति को समझना चाहिए।
1. दर्द होने का इंतजार न करें
कैंसर को लेकर सबसे बड़ी गलतफहमियों में से एक यह है कि शरीर में दर्द शुरू होने के बाद ही कैंसर की जांच करानी चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसा जरूरी नहीं है। कैंसर के शुरुआती चरण में कई बार कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देता और व्यक्ति सामान्य महसूस कर सकता है। यही कारण है कि केवल दर्द या किसी गंभीर लक्षण के आने का इंतजार करना उचित नहीं है।
कैंसर के अलग-अलग प्रकारों में अलग-अलग संकेत दिखाई दे सकते हैं और कई बार शुरुआती अवस्था में लक्षण बहुत हल्के होते हैं। इसलिए जिन लोगों में किसी विशेष कैंसर का जोखिम अधिक है, उन्हें डॉक्टर की सलाह के अनुसार समय पर स्क्रीनिंग करानी चाहिए। किसी भी असामान्य या लंबे समय तक बने रहने वाले बदलाव को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
2. कैंसर के हर मामले के लिए व्यक्ति को जिम्मेदार ठहराना गलत
कैंसर होने के बाद अक्सर लोग यह मान लेते हैं कि मरीज की किसी गलती, खानपान या जीवनशैली की वजह से ही बीमारी हुई होगी। यह सोच सही नहीं है। कैंसर के पीछे कई अलग-अलग कारण और जोखिम कारक हो सकते हैं। कुछ मामलों में तंबाकू, धूम्रपान, शराब, मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता और कुछ संक्रमण जैसे कारक जोखिम बढ़ा सकते हैं, लेकिन हर कैंसर को केवल व्यक्ति की जीवनशैली से जोड़ना सही नहीं है।
उम्र, आनुवंशिक कारण, पर्यावरणीय प्रभाव और अन्य जैविक कारक भी भूमिका निभा सकते हैं। इसलिए कैंसर से पीड़ित व्यक्ति को दोष देने के बजाय उसे भावनात्मक सहयोग और उचित चिकित्सा सहायता देना जरूरी है। स्वस्थ जीवनशैली अपनाने से कुछ कैंसर के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है, लेकिन इससे कैंसर का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं होता।
3. कैंसर के इलाज में कोई शॉर्टकट नहीं
कैंसर के इलाज को लेकर इंटरनेट और सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे सामने आते रहते हैं। कुछ लोग किसी विशेष दवा, घरेलू नुस्खे या वैकल्पिक उपचार को कैंसर का निश्चित इलाज बताने लगते हैं। ऐसे दावों से सावधान रहना बेहद जरूरी है। कैंसर का इलाज उसके प्रकार, स्टेज, मरीज की स्थिति और अन्य चिकित्सकीय कारकों के आधार पर तय किया जाता है।
यदि कोई व्यक्ति कैंसर का शॉर्टकट इलाज या निश्चित रूप से ठीक करने का दावा करता है, तो उसके प्रमाण और वैज्ञानिक आधार के बारे में सवाल करना चाहिए। डॉक्टर की सलाह के बिना किसी उपचार को शुरू करना या प्रमाणित इलाज को छोड़ देना नुकसानदायक हो सकता है। कैंसर की पुष्टि होने पर योग्य ऑन्कोलॉजिस्ट से सलाह लेकर उपचार की उचित योजना बनाना सबसे महत्वपूर्ण है।
4. शुरुआती पहचान से बेहतर हो सकते हैं इलाज के नतीजे
कैंसर की शुरुआती पहचान को इसलिए महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि बीमारी के शुरुआती चरणों में उपचार के विकल्प और परिणाम कई मामलों में बेहतर हो सकते हैं। हालांकि हर कैंसर का व्यवहार अलग होता है और इलाज की सफलता कैंसर के प्रकार तथा स्टेज सहित कई कारकों पर निर्भर करती है।
इसलिए कैंसर का पता चलने के बाद इलाज को टालना नहीं चाहिए। डॉक्टर द्वारा सुझाए गए परीक्षण और उपचार को समय पर शुरू करना जरूरी है। शुरुआती स्तर पर बीमारी की पहचान होने से कई मरीजों में उपचार अपेक्षाकृत आसान हो सकता है और बीमारी के आगे फैलने का जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है।
5. कई सामान्य कैंसर की स्क्रीनिंग उपलब्ध है
कैंसर की स्क्रीनिंग का उद्देश्य बीमारी के लक्षण दिखाई देने से पहले या शुरुआती अवस्था में कैंसर अथवा कैंसर से पहले होने वाले बदलावों का पता लगाना होता है। हालांकि हर व्यक्ति के लिए एक जैसी स्क्रीनिंग जरूरी नहीं होती। उम्र, लिंग, पारिवारिक इतिहास और व्यक्तिगत जोखिम के आधार पर डॉक्टर स्क्रीनिंग की सलाह दे सकते हैं।
भारत में स्तन कैंसर, सर्वाइकल कैंसर और मुंह के कैंसर जैसी कुछ बीमारियों की जांच के लिए स्क्रीनिंग के विकल्प उपलब्ध हैं। कुछ अन्य कैंसर, जैसे कोलोरेक्टल कैंसर और फेफड़ों के कैंसर के लिए भी खास जोखिम वाले लोगों में स्क्रीनिंग की सिफारिश की जा सकती है। इसलिए सोशल मीडिया पर बताए गए किसी एक “फुल बॉडी कैंसर टेस्ट” को सभी के लिए जरूरी मानना सही नहीं है। सही जांच का चुनाव डॉक्टर की सलाह और व्यक्ति के जोखिम के अनुसार होना चाहिए।
जागरूकता और समय पर जांच है सबसे जरूरी
कैंसर से बचाव के लिए तंबाकू और धूम्रपान से दूरी, संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि, स्वस्थ वजन बनाए रखना और शराब का सेवन सीमित करना जैसे कदम महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इसके साथ ही शरीर में लंबे समय तक बने रहने वाले असामान्य बदलावों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कैंसर को लेकर डर के बजाय जागरूकता और समय पर चिकित्सा सलाह को प्राथमिकता दें। कैंसर का कोई एक लक्षण या एक टेस्ट नहीं होता और न ही हर व्यक्ति के लिए एक जैसी स्क्रीनिंग जरूरी है। यदि परिवार में कैंसर का इतिहास है या किसी विशेष कैंसर का जोखिम है, तो डॉक्टर से व्यक्तिगत स्क्रीनिंग योजना के बारे में सलाह लेना बेहतर है। यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है; किसी भी लक्षण या कैंसर के संदेह में योग्य डॉक्टर से जांच और सलाह लेना आवश्यक है।