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भारतीय शेयर बाजार में 24 जुलाई को सुबह की भारी गिरावट के बाद रिकवरी दिखी। सेंसेक्स और निफ्टी ने निचले स्तरों से वापसी की, लेकिन कच्चे तेल के दामों से दबाव बना रहा।
भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार, 24 जुलाई को जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिला। बाजार ने कारोबार की शुरुआत काफी निराशाजनक स्तरों पर की थी, लेकिन दिन चढ़ने के साथ निवेशकों ने निचले स्तरों पर खरीदारी का रुख अपनाया। शुरुआती दौर में भारी बिकवाली का सामना करने के बाद, घरेलू शेयर बाजार ने अपनी पुरानी गिरावट का एक बड़ा हिस्सा वसूल कर लिया। फ्रंटलाइन और बड़ी कंपनियों (लार्ज-कैप स्टॉक्स) के शेयरों में हुई खरीदारी ने बाजार को निचले स्तरों से उबारने में अहम भूमिका निभाई। हालांकि, इसके बावजूद बाजार में पूरी तरह से तेजी का माहौल नहीं बन सका। कच्चे तेल की लगातार बढ़ती कीमतों और मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में जारी तनाव के कारण निवेशक अभी भी फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं, जिससे पूरे कारोबारी सत्र के दौरान बाजार पर दबाव बना रहा।
सेंसेक्स और निफ्टी का आज का सफर
कारोबार के दौरान दोपहर लगभग 12:10 बजे, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 552.32 अंक यानी 0.72% की गिरावट के साथ 75,839.07 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं दूसरी तरफ, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का प्रमुख सूचकांक निफ्टी 50 भी 154.75 अंक यानी 0.65% टूटकर 23,714.85 के स्तर पर आ गया था। दिन के निचले स्तरों की बात करें तो सेंसेक्स फिसलकर 75,474.43 तक नीचे चला गया था, लेकिन इसके बाद इसमें 360 से अधिक अंकों का शानदार सुधार देखने को मिला और यह 75,840 के करीब पहुँच गया। बाजार की शुरुआत की बात करें तो सेंसेक्स आज 75,708.19 के स्तर पर खुला था और इसने कारोबार के दौरान 75,995.73 का उच्चतम स्तर छुआ।
सुबह के बिकवाली के दौर से कैसे उबर पाया बाजार
आज के कारोबारी सत्र के पहले हिस्से (फर्स्ट हाफ) में भयंकर बिकवाली का माहौल था। बिकवाली का दबाव इतना अधिक था कि सेंसेक्स में 800 से भी ज्यादा अंकों की गिरावट आ चुकी थी और निफ्टी 23,650 के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर से भी नीचे चला गया था। हालांकि, बाद के घंटों में जब निवेशकों को लार्ज-कैप शेयरों में वैल्यू खरीदारी का मौका दिखा, तो मुख्य सूचकांकों ने अपने नुकसान की भरपाई करना शुरू कर दिया। इस सुधार के बावजूद व्यापक बाजार (Broader Market) में कमजोरी बनी रही। इससे यह साफ जाहिर होता है कि आज की खरीदारी केवल कुछ चुनिंदा बड़े शेयरों तक ही सीमित थी। व्यापक बाजार का प्रदर्शन दिखाने वाला निफ्टी मिडकैप 100 सूचकांक 0.54% की गिरावट के साथ बंद हुआ, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 0.71% की नरमी दर्ज की गई। वहीं, बाजार में अस्थिरता और डर को मापने वाला इंडिया विक्स (India VIX) इंडेक्स लगभग 5% बढ़कर 14.15 के स्तर पर पहुँच गया, जो यह संकेत देता है कि आने वाले दिनों में भी बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
लाभ और नुकसान में रहने वाले प्रमुख शेयर
सेंसेक्स की कंपनियों में आज ट्रेंट (Trent) सबसे ज्यादा मुनाफा कमाने वाला शेयर बनकर उभरा, जिसमें 0.71% की बढ़त दर्ज की गई। इसके अलावा आईटीसी (ITC) 0.55%, एचसीएलटेक (HCLTech) 0.44%, मारुति सुजुकी 0.40%, रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) 0.36% और अदाणी पोर्ट्स 0.15% की मजबूती के साथ बाजार को सहारा देते नजर आए। दूसरी तरफ, बिकवाली के भारी दबाव में रहने वाले शेयरों में इटरनल (Eternal) सबसे आगे रहा, जिसमें 3.26% की बड़ी गिरावट आई। इसके अलावा आईटी दिग्गज इन्फोसिस में 2.98%, बजाज फाइनेंस में 2.63% और महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M) में 2.50% की गिरावट दर्ज की गई। भारती एयरटेल, इंडिगो, अल्ट्राटेक सीमेंट, टेक महिंद्रा और एचडीएफसी बैंक जैसे दिग्गजों के शेयर भी लाल निशान में कारोबार करते हुए बंद हुए।
अधिकांश सेक्टरों में छाया रहा लाल निशान
बाजार में आए निचले स्तरों के सुधार के बावजूद क्षेत्रीय (Sectoral) प्रदर्शन के लिहाज से स्थिति ज्यादा उत्साहजनक नहीं रही। ऑटो सेक्टर आज का सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला क्षेत्र रहा, जिसमें 1.13% की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा आईटी, रियल्टी, मेटल और बैंकिंग को छोड़कर फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर भी दबाव में नजर आए। केवल एफएमसीजी (FMCG) और मीडिया सेक्टर ही ऐसे दो क्षेत्र रहे जो मामूली बढ़त के साथ हरे निशान में टिके रहे। इन दोनों क्षेत्रों को आईटीसी और कुछ अन्य उपभोक्ता वस्तुओं से जुड़ी कंपनियों में हुई लिवाली का फायदा मिला।
वैश्विक जोखिम और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें
शेयर बाजार में इस अनिश्चितता का सबसे बड़ा कारण वैश्विक परिस्थितियां हैं। ब्रेंट क्रूड तेल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में $100 प्रति बैरल के पार कारोबार कर रही हैं। कच्चे तेल में इस उछाल से भारत में महंगाई बढ़ने, देश के आयात बिल में इजाफा होने और चालू खाते के घाटे (CAD) पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। इसके अलावा, मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक संघर्ष (Geopolitical Tensions), अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में लगातार हो रही बढ़ोतरी और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा की जा रही लगातार बिकवाली ने भारतीय निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है। इन तमाम दबावों के बावजूद, निचले स्तरों पर हुई सौदेबाजी की खरीदारी (Bargain Buying) ने मुख्य सूचकांकों को दिन के निचले स्तरों से उबारने में मदद की।