शोध के मुताबिक नियमित सीढ़ियां चढ़ने वालों में हृदय रोग से मृत्यु का जोखिम 39% और किसी भी कारण से मृत्यु का जोखिम 24% कम पाया गया।
एक समय था जब हार्ट अटैक और हृदय रोग को मुख्य रूप से उम्रदराज लोगों से जोड़कर देखा जाता था। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यह धारणा तेजी से बदल रही है। भारत समेत दुनिया के कई हिस्सों में 30 की उम्र के आसपास और उससे भी कम उम्र के लोगों में हृदय संबंधी घटनाओं की खबरें सामने आ रही हैं। युवा प्रोफेशनल्स, फिटनेस पर ध्यान देने वाले लोग और बाहर से पूरी तरह स्वस्थ दिखाई देने वाले व्यक्ति भी हृदय स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं का सामना कर सकते हैं। यह स्थिति इस बात की याद दिलाती है कि केवल उम्र, शरीर का आकार या बाहर से फिट दिखाई देना दिल की वास्तविक सेहत का सही संकेतक नहीं है। ऐसे में नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित खान-पान और अन्य जोखिम कारकों पर ध्यान देना बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। इसी संदर्भ में सीढ़ियां चढ़ने जैसी सामान्य लेकिन प्रभावी शारीरिक गतिविधि को लेकर सामने आए शोध ने भी ध्यान आकर्षित किया है।
सीढ़ियां चढ़ने और दिल की सेहत के बीच क्या संबंध है?
American Journal of Cardiovascular Drugs में प्रकाशित एक मेटा-विश्लेषण में सीढ़ियां चढ़ने की आदत और हृदय संबंधी स्वास्थ्य के बीच संबंध का अध्ययन किया गया। शोधकर्ताओं ने नौ अलग-अलग अध्ययनों से 4.8 लाख से अधिक वयस्कों के आंकड़ों का विश्लेषण किया। अध्ययन में उन लोगों की तुलना की गई, जो नियमित रूप से सीढ़ियां चढ़ते थे और उन लोगों से की गई, जो कम सीढ़ियां चढ़ते थे।
शोध के अनुसार, नियमित रूप से सीढ़ियां चढ़ने वाले लोगों में हृदय संबंधी बीमारी से मृत्यु का जोखिम कम सीढ़ियां चढ़ने वालों की तुलना में 39 प्रतिशत कम पाया गया। वहीं, किसी भी कारण से मृत्यु का जोखिम 24 प्रतिशत कम था। इन आंकड़ों को औसतन 14 वर्षों की फॉलो-अप अवधि के दौरान देखा गया। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि इस तरह के मेटा-विश्लेषण में पाया गया संबंध यह साबित नहीं करता कि सिर्फ सीढ़ियां चढ़ने से ही मृत्यु का जोखिम कम होता है। नियमित सीढ़ियां चढ़ने वाले लोगों की जीवनशैली के अन्य पहलू भी अलग हो सकते हैं।
सीढ़ियां चढ़ना क्यों हो सकता है फायदेमंद?
सीढ़ियां चढ़ना एक ऐसी गतिविधि है जिसमें शरीर की कई मांसपेशियां एक साथ सक्रिय होती हैं और हृदय की धड़कन तेज होती है। नियमित रूप से ऐसी गतिविधि करने से कार्डियोरेस्पिरेटरी फिटनेस यानी शरीर की ऑक्सीजन का इस्तेमाल करने की क्षमता बेहतर हो सकती है। साथ ही यह पैरों की मांसपेशियों को सक्रिय रखने और दैनिक शारीरिक गतिविधि बढ़ाने का आसान तरीका है।
सीढ़ियां चढ़ने की खासियत यह है कि इसे अलग से जिम या किसी विशेष उपकरण की आवश्यकता के बिना रोजमर्रा की जिंदगी में शामिल किया जा सकता है। ऑफिस, घर या किसी सार्वजनिक स्थान पर लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का इस्तेमाल करना दैनिक गतिविधि को बढ़ाने का एक सरल तरीका हो सकता है। हालांकि, किसी व्यक्ति की उम्र, फिटनेस स्तर और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार शारीरिक गतिविधि की मात्रा अलग होनी चाहिए।
सिर्फ फिट दिखना पर्याप्त नहीं
युवाओं में हृदय संबंधी समस्याओं के बढ़ते मामलों के बीच यह समझना जरूरी है कि बाहर से स्वस्थ दिखने वाला व्यक्ति भी कुछ हृदय जोखिम कारकों से प्रभावित हो सकता है। हाई ब्लड प्रेशर, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, मधुमेह, धूम्रपान, अत्यधिक तनाव, नींद की कमी, असंतुलित खान-पान और शारीरिक निष्क्रियता जैसे कारक हृदय स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं।
कई बार व्यक्ति को इन समस्याओं के बारे में जानकारी भी नहीं होती, क्योंकि शुरुआती चरण में स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। इसलिए केवल वजन या शरीर की बनावट को देखकर यह मान लेना सही नहीं है कि दिल पूरी तरह स्वस्थ है। नियमित स्वास्थ्य जांच और डॉक्टर की सलाह के अनुसार आवश्यक परीक्षण जोखिमों की पहचान करने में मदद कर सकते हैं।
युवाओं के लिए क्यों जरूरी है नियमित व्यायाम?
आज की व्यस्त जीवनशैली में लंबे समय तक बैठकर काम करना आम हो गया है। ऑफिस का काम, लगातार स्क्रीन का इस्तेमाल और कम शारीरिक गतिविधि धीरे-धीरे जीवनशैली को अधिक निष्क्रिय बना सकती है। ऐसे में रोजाना थोड़ी अतिरिक्त गतिविधि भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
सीढ़ियां चढ़ना, तेज गति से चलना, साइकिल चलाना, तैरना या अपनी क्षमता के अनुसार कोई अन्य एरोबिक गतिविधि दिनचर्या का हिस्सा बनाई जा सकती है। लक्ष्य यह होना चाहिए कि पूरे दिन लंबे समय तक लगातार बैठे रहने के बजाय बीच-बीच में शरीर को सक्रिय रखा जाए। अगर कोई व्यक्ति लंबे समय से व्यायाम नहीं करता है, तो उसे अचानक बहुत अधिक मेहनत करने के बजाय धीरे-धीरे गतिविधि बढ़ानी चाहिए।
दिल को स्वस्थ रखने के लिए अपनाएं संतुलित जीवनशैली
सिर्फ सीढ़ियां चढ़ना ही हृदय स्वास्थ्य का समाधान नहीं है। दिल को स्वस्थ रखने के लिए कई आदतों का संतुलन जरूरी है। भोजन में सब्जियां, फल, साबुत अनाज, दालें और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल करना चाहिए। अत्यधिक नमक, चीनी और ट्रांस फैट वाले खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करना बेहतर है। धूम्रपान से बचना और शराब का सेवन न करना या सीमित रखना भी हृदय स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
इसके अलावा पर्याप्त नींद और तनाव को नियंत्रित करने पर भी ध्यान देना चाहिए। अगर परिवार में कम उम्र में हृदय रोग का इतिहास रहा है या किसी व्यक्ति को ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्या है, तो डॉक्टर से नियमित सलाह लेना विशेष रूप से जरूरी है।
छोटी आदतें बन सकती हैं बड़े बदलाव का हिस्सा
सीढ़ियां चढ़ने से जुड़े इस अध्ययन के आंकड़े रोजमर्रा की शारीरिक गतिविधि के महत्व को जरूर रेखांकित करते हैं। हालांकि, इसे हार्ट अटैक से बचाव की गारंटी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। हर व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति अलग होती है और व्यायाम की सही मात्रा भी उसी के अनुसार तय की जानी चाहिए।
कुल मिलाकर, कम उम्र में हृदय संबंधी समस्याओं के जोखिम को देखते हुए दिल की सेहत को नजरअंदाज करना सही नहीं है। नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, तनाव प्रबंधन और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच एक स्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा हो सकते हैं। रोजमर्रा की जिंदगी में लिफ्ट की जगह सीढ़ियां चुनना एक छोटी शुरुआत हो सकती है, लेकिन दिल को स्वस्थ रखने के लिए इसे व्यापक और संतुलित जीवनशैली के साथ अपनाना अधिक प्रभावी दृष्टिकोण है।