मानसून में बढ़ सकती हैं मसूड़ों और दांतों की परेशानी, इन आसान तरीकों से रखें मुंह को स्वस्थ

मानसून में बढ़ सकती हैं मसूड़ों और दांतों की परेशानी, इन आसान तरीकों से रखें मुंह को स्वस्थ

 

मानसून में नाक बंद होने, मुंह से सांस लेने और ओरल हाइजीन में लापरवाही से मसूड़ों और दांतों की समस्याएं बढ़ सकती हैं। जानें बचाव के आसान उपाय।

मानसून का मौसम गर्मी से राहत देने के साथ-साथ मौसम में कई बदलाव लेकर आता है। ठंडी सुबह, बढ़ी हुई नमी और तापमान में उतार-चढ़ाव जहां लोगों को सुकून देते हैं, वहीं कुछ लोगों के लिए यह मौसम मुंह और दांतों से जुड़ी परेशानियों को भी बढ़ा सकता है। बारिश के दिनों में मसूड़ों से खून आना, दांतों पर प्लाक जमना और लगातार मुंह से दुर्गंध आने जैसी समस्याएं कुछ लोगों को अधिक परेशान कर सकती हैं। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि बारिश खुद मसूड़ों की बीमारी का कारण नहीं बनती। इसके बजाय मानसून के दौरान होने वाले कुछ बदलाव पहले से मौजूद ओरल हेल्थ की समस्याओं को अधिक स्पष्ट या परेशान करने वाला बना सकते हैं। सर्दी-जुकाम और सांस से जुड़ी समस्याएं, नाक बंद होना, मुंह से सांस लेना, खान-पान में बदलाव और दांतों की सफाई में लापरवाही जैसे कारक मुंह के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में मानसून के दौरान सिर्फ शरीर की सामान्य सेहत ही नहीं, बल्कि दांतों और मसूड़ों की देखभाल पर भी ध्यान देना जरूरी है।

बारिश और मसूड़ों की बीमारी के बीच क्या संबंध है?

बारिश होने से सीधे तौर पर मसूड़ों की बीमारी नहीं होती। मसूड़ों से खून आना, सूजन या प्लाक जमा होना आमतौर पर ओरल हाइजीन और मसूड़ों की स्थिति से जुड़ी समस्याएं होती हैं। हालांकि, मानसून में कुछ लोगों की दिनचर्या और खान-पान में बदलाव हो जाता है, जिससे पहले से मौजूद दांतों या मसूड़ों की परेशानी अधिक महसूस हो सकती है। अगर दांतों पर प्लाक लंबे समय तक जमा रहता है और उसकी सही तरीके से सफाई नहीं की जाती, तो मसूड़ों में सूजन और संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए मौसम चाहे कोई भी हो, नियमित ओरल हाइजीन बनाए रखना जरूरी है।

नाक बंद होने पर मुंह से सांस लेना बन सकता है कारण

मानसून के दौरान सर्दी-जुकाम, एलर्जी और नाक बंद होने की समस्या कुछ लोगों में बढ़ सकती है। जब नाक से सांस लेना मुश्किल होता है, तो व्यक्ति अक्सर मुंह से सांस लेने लगता है। लंबे समय तक मुंह से सांस लेने से मुंह में सूखापन बढ़ सकता है। पर्याप्त लार न होने पर मुंह में मौजूद बैक्टीरिया को नियंत्रित करने की प्राकृतिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इससे कुछ लोगों में सांसों की दुर्गंध और प्लाक से जुड़ी परेशानी अधिक महसूस हो सकती है।

मुंह में लार एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह भोजन के कणों को हटाने और मुंह के वातावरण को संतुलित रखने में मदद करती है। इसलिए अगर मुंह बार-बार सूखता है, तो पानी पीने और ओरल हाइजीन पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

मानसून में खान-पान का भी रखें ध्यान

बारिश के मौसम में चाय, कॉफी, पकौड़े, तले हुए स्नैक्स और मीठे खाद्य पदार्थों का सेवन बढ़ सकता है। अगर ऐसे खाद्य पदार्थ बार-बार खाए जाएं और उसके बाद दांतों की सफाई ठीक से न की जाए, तो दांतों पर प्लाक जमा होने की संभावना बढ़ सकती है। मीठे खाद्य पदार्थों का अत्यधिक सेवन दांतों में कैविटी के जोखिम को भी बढ़ा सकता है।

इसलिए मानसून में संतुलित आहार लेना जरूरी है। फल और सब्जियों को अच्छी तरह साफ करके खाना चाहिए। भोजन के बाद पानी से कुल्ला करना भी मुंह में बचे खाद्य कणों को हटाने में मदद कर सकता है। मीठे और चिपचिपे खाद्य पदार्थों को बार-बार खाने से बचना बेहतर है।

नियमित ब्रशिंग और फ्लॉसिंग जरूरी

मसूड़ों और दांतों को स्वस्थ रखने के लिए रोजाना नियमित रूप से दांतों की सफाई करना सबसे जरूरी आदतों में शामिल है। दिन में कम से कम दो बार ब्रश करने की आदत बनाए रखनी चाहिए। ब्रश करते समय मसूड़ों पर बहुत अधिक दबाव डालने से बचें, क्योंकि इससे मसूड़ों में जलन हो सकती है। दांतों के बीच फंसे भोजन के कणों को हटाने के लिए फ्लॉसिंग या डॉक्टर की सलाह से अन्य इंटरडेंटल क्लीनिंग तरीके अपनाए जा सकते हैं।

सिर्फ दांतों की बाहरी सतह साफ करना पर्याप्त नहीं है। जीभ की सफाई पर भी ध्यान देना चाहिए, क्योंकि जीभ पर जमा बैक्टीरिया सांसों की दुर्गंध में योगदान कर सकते हैं। टूथब्रश को भी नियमित अंतराल पर बदलना चाहिए और उसे साफ व सूखी जगह पर रखना चाहिए।

मुंह की दुर्गंध को नजरअंदाज न करें

मानसून में लगातार मुंह से दुर्गंध आना सिर्फ मौसम की वजह से नहीं माना जाना चाहिए। मुंह का सूखापन, प्लाक, मसूड़ों की समस्या, जीभ पर बैक्टीरिया या दांतों में फंसे भोजन के कण इसके कारण हो सकते हैं। अगर अच्छी ओरल हाइजीन के बावजूद दुर्गंध लंबे समय तक बनी रहती है, तो दंत चिकित्सक से जांच कराना उचित है।

इसी तरह मसूड़ों से बार-बार खून आना भी सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ब्रश करते समय कभी-कभार हल्का खून आना और लगातार रक्तस्राव होना अलग-अलग स्थितियां हो सकती हैं। बार-बार समस्या होने पर विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।

मानसून में कब जाएं दंत चिकित्सक के पास?

अगर मसूड़ों में लगातार सूजन, दर्द, खून आना, दांतों में संवेदनशीलता, लगातार बदबू या चबाने में परेशानी हो रही है, तो दंत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। शुरुआती चरण में ओरल हेल्थ की समस्याओं की पहचान होने पर उचित देखभाल और उपचार से स्थिति को नियंत्रित करना आसान हो सकता है।

कुल मिलाकर, मानसून खुद मसूड़ों की बीमारी का कारण नहीं है, लेकिन इस मौसम में होने वाले सर्दी-जुकाम, नाक बंद होना, मुंह से सांस लेना, खान-पान में बदलाव और ओरल हाइजीन में लापरवाही पहले से मौजूद समस्याओं को बढ़ा सकती है। इसलिए बारिश के मौसम में पर्याप्त पानी पीना, दिन में दो बार ब्रश करना, दांतों के बीच सफाई रखना, मीठे और चिपचिपे खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करना और किसी भी लगातार समस्या को नजरअंदाज न करना जरूरी है। अच्छी ओरल हाइजीन की नियमित आदतें मानसून ही नहीं, पूरे साल दांतों और मसूड़ों को स्वस्थ रखने में मदद करती हैं।

 

 

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