योगी आदित्यनाथ का विपक्ष पर तीखा हमला: महिला आरक्षण विधेयक का गिरना “नारी शक्ति के साथ विश्वासघात”

योगी आदित्यनाथ का विपक्ष पर तीखा हमला: महिला आरक्षण विधेयक का गिरना "नारी शक्ति के साथ विश्वासघात"

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने महिला आरक्षण विधेयक के सदन में गिरने पर विपक्ष को घेरा। उन्होंने इसे लोकतंत्र का काला अध्याय और नारी शक्ति का अपमान बताया।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को लोकसभा में महिला आरक्षण और सीटों की संख्या बढ़ाने से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक के गिर जाने पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने इस घटनाक्रम को राष्ट्र की “नारी शक्ति” के साथ विश्वासघात करार दिया। गौरतलब है कि विधायिकाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने और लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 816 करने वाला महत्वपूर्ण विधेयक शुक्रवार को सदन में पारित नहीं हो सका।

लोकतंत्र के इतिहास का “काला अध्याय”

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार देर रात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर हिंदी में एक पोस्ट साझा करते हुए विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने लिखा कि आज भारत के महान लोकतंत्र के इतिहास में एक “काला अध्याय” जुड़ गया है। योगी आदित्यनाथ के अनुसार, नारी शक्ति वंदन अधिनियम के लिए आवश्यक इस संविधान संशोधन विधेयक के मार्ग में विपक्ष द्वारा उत्पन्न किया गया अवरोध ‘भारत माता’ के सम्मान पर एक बड़ा आघात है।

लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन

अपने बयान में मुख्यमंत्री ने इसे केवल एक विधायी असफलता नहीं, बल्कि देश की आधी आबादी के अधिकारों पर हमला बताया। उन्होंने कहा कि यह पूरे देश की महिला शक्ति के साथ किया गया एक बड़ा धोखा है और उनके लोकतांत्रिक अधिकारों का स्पष्ट हनन है। योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया कि महिलाओं को राजनीतिक सशक्तिकरण देने की दिशा में यह विधेयक एक मील का पत्थर साबित हो सकता था, लेकिन विपक्ष की बाधाओं ने इस ऐतिहासिक अवसर को नुकसान पहुँचाया है।

2029 के लक्ष्य और सीटों की वृद्धि पर चर्चा

यह विधेयक वर्ष 2029 से विधायिकाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने और लोकसभा की सदस्य संख्या को वर्तमान से बढ़ाकर 816 करने के उद्देश्य से लाया गया था। केंद्र सरकार का तर्क था कि इससे न केवल महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी, बल्कि जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व भी बेहतर होगा। हालांकि, विपक्ष के विरोध और तकनीकी कारणों से विधेयक के पारित न होने के बाद अब इस पर राजनीतिक युद्ध छिड़ गया है, जिसका नेतृत्व उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने मुखर होकर किया है।

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