पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत के बाद दिलीप घोष ने ममता बनर्जी और अखिलेश यादव की मुलाकात को ‘भ्रम’ करार दिया। जानें अखिलेश यादव के चुनाव आयोग पर लगाए गए आरोप और बंगाल की वर्तमान राजनीतिक स्थिति।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक दशक से अधिक समय के बाद आए इस ऐतिहासिक परिवर्तन ने न केवल राज्य की सत्ता बदली है, बल्कि विपक्षी एकता और राजनीतिक आरोपों की एक नई लहर भी पैदा कर दी है। विधानसभा चुनावों के परिणामों के बाद जहां भाजपा सरकार बनाने की तैयारी में जुटी है, वहीं तृणमूल कांग्रेस (TMC) और उसके सहयोगी दल हार को स्वीकार करने के बजाय चुनावी प्रक्रिया पर ही सवाल उठा रहे हैं।
ममता बनर्जी और अखिलेश यादव की मुलाकात पर भाजपा का प्रहार
सत्ता से बाहर होने के बाद ममता बनर्जी ने विपक्षी एकजुटता का प्रदर्शन करते हुए समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी के साथ कोलकाता में एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस मुलाकात पर भाजपा के वरिष्ठ नेता दिलीप घोष ने तीखा हमला बोला। घोष ने कहा कि ममता बनर्जी “भ्रम की स्थिति” में हैं और उनके आस-पास के लोग उन्हें जमीनी हकीकत से दूर रखकर झूठी उम्मीदों से भर रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ममता बनर्जी यह समझने में असमर्थ हैं कि बंगाल की जनता ने उन्हें पूरी तरह से नकार दिया है। वहीं, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने विपक्षी गठबंधन की कोशिशों को गणितीय रूप से खारिज करते हुए कहा कि “शून्य प्लस शून्य का परिणाम शून्य ही होता है।”
अखिलेश यादव के गंभीर आरोप और ‘माफियागिरी’ का दावा
ममता बनर्जी के साथ बंद कमरे में हुई बैठक के बाद अखिलेश यादव ने भाजपा और भारत निर्वाचन आयोग (ECI) पर तीखे प्रहार किए। उन्होंने दावा किया कि ममता बनर्जी हारी नहीं हैं, बल्कि उन्हें साज़िश के तहत हराया गया है। यादव ने भाजपा पर बंगाल चुनाव के दौरान “बहुस्तरीय माफियागिरी” करने का आरोप लगाया। उन्होंने चुनाव आयोग और सुरक्षा एजेंसियों पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए मांग की कि मतदान केंद्रों की सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक की जाए। अखिलेश ने तर्क दिया कि यदि सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही का सीधा प्रसारण हो सकता है, तो बंगाल के मतदान और मतगणना की फुटेज दिखाने में क्या हर्ज है? टीएमसी सूत्रों के अनुसार, अखिलेश ने ममता से कहा कि जब चुनाव ईमानदारी से हुए तब वह जीतीं, लेकिन इस बार ‘धोखाधड़ी’ के जरिए भाजपा को जीत दिलाई गई।
विधानसभा भंग और नई सरकार की राह
संवैधानिक प्रक्रिया के तहत, पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आरएन रवि ने गुरुवार को वर्तमान विधानसभा को भंग कर दिया है। यह कदम भाजपा की पहली सरकार के गठन का मार्ग प्रशस्त करने के लिए उठाया गया है। 2026 के इन ऐतिहासिक चुनावों में भाजपा ने 294 सीटों में से 207 सीटों पर प्रचंड जीत हासिल की है, जबकि 15 साल तक सत्ता में रही टीएमसी सिमटकर 80 सीटों पर रह गई है। हालांकि, सत्ता हस्तांतरण की यह प्रक्रिया हिंसा की छाया में हो रही है। चुनाव बाद हुई हिंसा में शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की हत्या ने राज्य में कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भाजपा ने इन घटनाओं को टीएमसी की हताशा का परिणाम बताया है।
बंगाल में नए राजनीतिक युग की शुरुआत
650 शब्दों के इस घटनाक्रम का सार यह है कि बंगाल अब एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। एक तरफ जहां भाजपा 9 मई को ब्रिगेड परेड ग्राउंड में शपथ ग्रहण की तैयारी कर रही है, वहीं विपक्षी दल ‘इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग’ और ‘प्रशासनिक मशीनरी’ के दुरुपयोग का मुद्दा उठाकर अपनी हार की भरपाई करने की कोशिश कर रहे हैं। दिलीप घोष और शमिक भट्टाचार्य के बयानों से साफ है कि भाजपा अब बंगाल में किसी भी प्रकार की ‘विक्टिम कार्ड’ राजनीति को हावी नहीं होने देना चाहती। आने वाले दिन बंगाल की राजनीति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होंगे, क्योंकि एक तरफ नई सरकार के सामने विकास और शांति बहाली की चुनौती होगी, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष अपनी खोई हुई जमीन तलाशने के लिए संघर्ष करेगा।