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विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना ने कलाकारों की सहमति और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर जोर दिया। जानिए इंटीमेट सीन, रिवीलिंग कपड़ों और फिल्म पेड्डी को लेकर क्यों छिड़ी चर्चा।
फिल्म इंडस्ट्री में कलाकारों की स्वतंत्रता, उनकी सहमति और शूटिंग के दौरान सहजता को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। अभिनेता विजय देवरकोंडा ने कहा है कि कलाकारों को रिवीलिंग कपड़े पहनने या इंटीमेट सीन करने से इनकार करने की पूरी आजादी होनी चाहिए। किसी कलाकार के इस तरह के फैसले को गैर-पेशेवर रवैये के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। विजय का मानना है कि हर कलाकार को अपनी व्यक्तिगत सीमाएं तय करने और अपने आराम के मुताबिक काम करने का अधिकार है। अगर कोई अभिनेता या अभिनेत्री किसी सीन को लेकर सहज महसूस नहीं करता, तो उसकी बात को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। किसी फिल्म के लिए पहले ही सहमति देने या कॉन्ट्रैक्ट साइन कर लेने का मतलब यह नहीं है कि कलाकार को हर परिस्थिति में अपनी असहजता को नजरअंदाज करना पड़ेगा। फिल्म की शूटिंग के दौरान कलाकारों की सहमति और उनकी भावनाओं का सम्मान करना भी उतना ही जरूरी है, जितना कि फिल्म को समय पर पूरा करना और अपनी भूमिका को बेहतर तरीके से निभाना।
‘कॉफी विद करण 9’ में विजय और रश्मिका ने की चर्चा
विजय देवरकोंडा ने यह बात अपनी पत्नी और अभिनेत्री रश्मिका मंदाना के साथ करण जौहर के लोकप्रिय चैट शो ‘कॉफी विद करण’ के सीजन 9 में बातचीत के दौरान कही। शो में दोनों कलाकारों ने फिल्म इंडस्ट्री में काम करने के अनुभवों और शूटिंग के दौरान कलाकारों के सामने आने वाली चुनौतियों पर अपने विचार साझा किए। बातचीत के दौरान यह मुद्दा सामने आया कि कई बार कलाकार किसी खास सीन, कॉस्ट्यूम या कैमरे के एंगल को लेकर सहज नहीं होते, लेकिन फिल्म साइन कर लेने के बाद उन्हें दबाव महसूस हो सकता है। ऐसी स्थिति में कलाकारों के लिए अपनी बात खुलकर रखना आसान नहीं होता। उन्हें डर रहता है कि कहीं उनकी असहमति को काम के प्रति लापरवाही या गैर-पेशेवर व्यवहार न समझ लिया जाए। विजय ने इसी मानसिकता पर सवाल उठाते हुए कलाकारों के अधिकारों और उनकी व्यक्तिगत सीमाओं के सम्मान की जरूरत पर जोर दिया। उनका संदेश यह है कि अभिनय का पेशा होने का मतलब यह नहीं कि किसी कलाकार की निजी सहजता और सहमति को नजरअंदाज कर दिया जाए।
रश्मिका मंदाना ने भी कलाकारों की सहमति को बताया जरूरी
इस चर्चा में रश्मिका मंदाना ने भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि कलाकारों को किसी सीन को लेकर अपनी असहजता जाहिर करने का मौका मिलना चाहिए। फिल्म के सेट पर ऐसा माहौल होना जरूरी है, जहां कलाकार बिना किसी डर के निर्देशक या टीम के अन्य सदस्यों से अपनी बात कह सकें। यदि किसी अभिनेत्री को किसी कॉस्ट्यूम, कैमरा एंगल या सीन की प्रस्तुति पर आपत्ति है, तो उसकी बात को सुना जाना चाहिए। रश्मिका के मुताबिक, कलाकारों को यह चिंता नहीं होनी चाहिए कि अपनी असहमति जाहिर करने के बाद उन्हें किस तरह की प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ेगा। फिल्म निर्माण एक सामूहिक प्रक्रिया है, जिसमें निर्देशक, निर्माता, अभिनेता और तकनीकी टीम सभी की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में बेहतर तालमेल तभी संभव है, जब हर सदस्य की बात का सम्मान किया जाए। खासतौर पर ऐसे दृश्यों के मामले में, जिनमें कलाकार की शारीरिक सहजता या व्यक्तिगत सीमाएं शामिल हों, स्पष्ट संवाद और सहमति को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
‘पेड्डी’ में जाह्नवी कपूर के चित्रण को लेकर उठे सवाल
विजय और रश्मिका की यह चर्चा ऐसे समय सामने आई है, जब तेलुगु फिल्म ‘पेड्डी’ में जाह्नवी कपूर के चित्रण को लेकर आलोचना की चर्चा हो रही है। फिल्म में उनके किरदार को फिल्माने के तरीके, कुछ कैमरा एंगल और एक ऐसे दृश्य को लेकर सवाल उठाए गए हैं, जिसमें सहमति के बिना किस किए जाने का प्रसंग शामिल बताया गया है। इस मुद्दे ने फिल्मों में महिलाओं के चित्रण और दृश्यों को प्रस्तुत करने के तरीके पर बहस को फिर से चर्चा में ला दिया है। हालांकि किसी दृश्य की वास्तविक परिस्थितियों और उसके फिल्मांकन से जुड़े निष्कर्ष निकालने के लिए पूरे संदर्भ को समझना जरूरी है, लेकिन इस तरह की चर्चाएं फिल्म निर्माताओं की जिम्मेदारी को लेकर महत्वपूर्ण सवाल उठाती हैं। दर्शक अब केवल कहानी और अभिनय ही नहीं, बल्कि यह भी देखते हैं कि महिला किरदारों को किस नजरिए से पेश किया जा रहा है और कैमरे का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया है। किसी अभिनेत्री के किरदार को प्रभावशाली बनाने और उसे अनावश्यक रूप से वस्तु की तरह प्रस्तुत करने के बीच अंतर को समझना जरूरी है।
फिल्म सेट पर सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल की जरूरत
फिल्म इंडस्ट्री में किसी भी कलाकार की सहमति का सम्मान करना केवल व्यक्तिगत पसंद का विषय नहीं, बल्कि पेशेवर कार्यसंस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। किसी फिल्म में इंटीमेट सीन, किसिंग सीन या रिवीलिंग कॉस्ट्यूम की जरूरत कहानी के अनुसार हो सकती है, लेकिन ऐसे दृश्यों को फिल्माते समय कलाकार की स्पष्ट सहमति और सहजता को प्राथमिकता देना आवश्यक है। कलाकारों को पहले से बताया जाना चाहिए कि किसी दृश्य में उनसे क्या अपेक्षा की जा रही है, ताकि वे सोच-समझकर निर्णय ले सकें। यदि शूटिंग के दौरान कोई कलाकार असहज महसूस करता है, तो उसकी चिंता पर चर्चा करने के लिए उचित व्यवस्था होनी चाहिए। साथ ही, कलाकार की असहमति को उसके करियर, पेशेवर छवि या भविष्य में मिलने वाले काम से जोड़कर दबाव बनाने से बचना चाहिए। विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना की इस चर्चा का मुख्य संदेश यही है कि कलाकारों की पेशेवर प्रतिबद्धता और उनकी व्यक्तिगत सीमाएं एक-दूसरे के विरोध में नहीं हैं। सम्मानजनक माहौल में ही कलाकार बेहतर तरीके से काम कर सकते हैं और फिल्म इंडस्ट्री में सहमति, सुरक्षा तथा जिम्मेदार प्रस्तुति को मजबूत बनाया जा सकता है।