स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज बंद होने से कच्चे तेल में 4% का भारी उछाल, शेयर बाजार में बड़ी गिरावट के संकेत

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज बंद होने से कच्चे तेल में 4% का भारी उछाल, शेयर बाजार में बड़ी गिरावट के संकेत

 

यूएस-ईरान मिसाइल हमलों से बढ़ा तनाव: बंद हुआ ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’, कच्चे तेल में 4% का भारी उछाल, भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट की आशंका

मध्य पूर्व (Middle East) में भू-राजनीतिक तनाव एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिका और ईरान के बीच हुए ताजा मिसाइल हमलों ने वैश्विक स्तर पर हड़कंप मचा दिया है। इस सैन्य टकराव के तुरंत बाद ईरान की राजधानी तेहरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील समुद्री तेल मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ (Strait of Hormuz) को ‘अगले आदेश तक’ पूरी तरह से बंद करने की घोषणा कर दी है। इस फैसले का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर पड़ा है, जहां कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में एकाएक 4 प्रतिशत का भारी उछाल देखा गया है। सोमवार, 13 जुलाई को इस वैश्विक संकट की आंच भारतीय वित्तीय बाजार तक भी पहुंच गई है, जिससे निवेशकों में भारी घबराहट का माहौल है।

कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग: ब्रेंट क्रूड 79 डॉलर और WTI 74 डॉलर के पार

अमेरिका और ईरान के बीच मिसाइलों के ताजा आदान-प्रदान और सप्लाई के सबसे बड़े रूट को ब्लॉक किए जाने के बाद कच्चे तेल के वायदा बाजार में जबरदस्त तेजी आई है। सोमवार को शुरुआती कारोबार के दौरान ही वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) वायदा उछलकर 79 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। वहीं, अमेरिकी कच्चे तेल का सूचकांक वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड फ्यूचर्स भी बढ़कर 74 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है।

कमोडिटी मार्केट के विशेषज्ञों का मानना है कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज का बंद होना वैश्विक तेल अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका है। यदि यह मार्ग लंबे समय तक बंद रहता है, तो दुनिया भर में कच्चे तेल की भारी किल्लत हो सकती है, जिससे आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकती हैं। भारत अपनी जरूरत का करीब 80 से 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, ऐसे में तेल की कीमतों में यह बढ़ोतरी देश की अर्थव्यवस्था और महंगाई दर के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है।

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज क्यों है बेहद संवेदनशील? वैश्विक सप्लाई चेन पर संकट

तेहरान द्वारा बंद किया गया स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज कोई आम समुद्री रास्ता नहीं है, बल्कि यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ‘एनर्जी चोकपॉइंट’ (Energy Chokepoint) माना जाता है। पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था इस संकरे समुद्री मार्ग पर निर्भर करती है:

  • वैश्विक खपत का हिस्सा: दुनिया भर में हर रोज इस्तेमाल होने वाले कुल कच्चे तेल का लगभग पांचवां हिस्सा (20%) अकेले इसी समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है।
  • खाड़ी देशों की लाइफलाइन: सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर, कुवैत और इराक जैसे दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक देशों के कच्चे तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) के निर्यात का यह एकमात्र और सबसे प्रमुख गलियारा है।
  • वाणिज्यिक जहाजों पर खतरा: इस मार्ग के बंद होने से खाड़ी क्षेत्र से होने वाले सभी तरह के व्यावसायिक जहाजों (Commercial Shipping) का आवागमन पूरी तरह ठप हो गया है, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन के पूरी तरह बाधित होने का खतरा पैदा हो गया है।

गिफ्ट निफ्टी 197 अंक टूटा, भारतीय शेयर बाजार में ‘गैप-डाउन’ ओपनिंग के आसार

वैश्विक बाजारों से मिल रहे बेहद कमजोर और जोखिम भरे संकेतों के चलते सोमवार, 13 जुलाई को भारतीय शेयर बाजार (Sensex और Nifty) की शुरुआत भारी गिरावट के साथ होने के पूरे आसार हैं। सिंगापुर एक्सचेंज पर ट्रेड होने वाला हमारा प्रमुख संकेतक ‘गिफ्ट निफ्टी’ (Gift Nifty) 197 अंक अथवा 0.81 प्रतिशत की भारी गिरावट के साथ 24,036 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। यह इस बात का साफ संकेत है कि दलाल स्ट्रीट पर आज बिकवाली का भारी दबाव देखने को मिलेगा।

गिफ्ट निफ्टी का यह रुख दर्शा रहा है कि वैश्विक संकट और एशियाई बाजारों में मंदी को देखते हुए भारतीय निवेशकों ने भी एक सतर्क रुख अपना लिया है और बाजार में ‘रिस्क-ऑफ सेंटिमेंट’ (जोखिम से बचने की भावना) पूरी तरह हावी हो गया है।

पिछले सत्र की बढ़त पर फिरा पानी, निवेशकों को फूंक-फूंक कर कदम रखने की सलाह

दिलचस्प बात यह है कि इससे पिछले कारोबारी सत्र में, ईरान-यूएस युद्ध की शुरुआती खबरों के बावजूद भारतीय घरेलू बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी करीब 1 फीसदी की बढ़त के साथ बंद होने में कामयाब रहे थे। उस समय निवेशकों को उम्मीद थी कि स्थिति जल्द ही नियंत्रण में आ जाएगी। लेकिन वीकेंड पर हुए ताजा मिसाइल हमलों और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के बंद होने से बाजार का पूरा समीकरण बदल गया है।

बाजार विश्लेषकों का कहना है कि जब तक मध्य पूर्व में तनाव कम नहीं होता और तेल मार्ग दोबारा नहीं खुलता, तब तक बाजार में भारी उतार-चढ़ाव (Volatility) जारी रहेगा। ऐसे में निवेशकों को इस समय रक्षात्मक रुख अपनाने और आईटी, फार्मा या सोने (Gold) जैसे सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करने की सलाह दी जा रही है।

 

 

 

 

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