अमेरिका-ईरान मिसाइल हमलों के बाद तेहरान ने ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ बंद किया। कच्चे तेल की कीमतें 4% बढ़ीं, गिफ्ट निफ्टी टूटने से शेयर बाजार में भारी गिरावट के आसार।
मध्य पूर्व (Middle East) में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। दोनों देशों के बीच हुए ताजा मिसाइल हमलों के बाद वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव चरम पर है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए ईरान की राजधानी तेहरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ (Strait of Hormuz) को ‘अगले आदेश तक’ पूरी तरह से बंद करने की घोषणा कर दी है। इस फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में एकाएक 4 फीसदी का भारी उछाल देखा गया है। सोमवार, 13 जुलाई 2026 को वैश्विक मोर्चे पर उपजे इस संकट का सीधा असर भारतीय वित्तीय और शेयर बाजार पर भी देखने को मिल रहा है, जहां निवेशकों के बीच चौतरफा डर और सतर्कता का माहौल बन गया है।
कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग: ब्रेंट क्रूड 79 डॉलर और WTI 74 डॉलर के पार
अमेरिका और ईरान के बीच मिसाइलों के ताजा आदान-प्रदान और ईरान द्वारा तेल सप्लाई के सबसे बड़े रूट को ब्लॉक किए जाने के बाद कच्चे तेल के वायदा बाजार में जबरदस्त तेजी आई है। सोमवार को शुरुआती कारोबार के दौरान ही वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड फ्यूचर्स उछलकर $74 प्रति बैरल और वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) फ्यूचर्स $79 प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गए।
एनर्जी मार्केट्स के जानकारों का कहना है कि अगर यह युद्ध लंबा खिंचता है या स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज लंबे समय तक बंद रहता है, तो तेल की कीमतें बहुत जल्द 90 से 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को भी छू सकती हैं। इससे भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों के चालू खाता घाटे और घरेलू मुद्रास्फीति (महंगाई) पर बहुत बुरा असर पड़ने की आशंका है।
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज क्यों है बेहद संवेदनशील? वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा सीधा असर
ईरान द्वारा बंद किया गया स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज कोई आम समुद्री रास्ता नहीं है, बल्कि यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ‘एनर्जी चोकपॉइंट’ (Energy Chokepoint) है। वैश्विक अर्थव्यवस्था की नसें इसी रास्ते से होकर गुजरती हैं:
- सप्लाई का गणित: दुनिया भर में कुल जितने कच्चे तेल की खपत होती है, उसका लगभग पांचवां हिस्सा (20%) अकेले इसी संकरे समुद्री मार्ग से होकर दुनिया के बाकी हिस्सों में जाता है।
- खाड़ी देशों का लाइफलाइन: सऊदी अरब, यूएई, कतर, कुवैत और इराक जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देशों के कच्चे तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) के निर्यात का यह एकमात्र और सबसे प्रमुख गलियारा है।
- तनाव की मुख्य वजह: पिछले वीकेंड पर तेहरान ने अपनी सैन्य कार्रवाई का दायरा बढ़ाते हुए कतर और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पर भी हमले किए। यह कार्रवाई अमेरिका द्वारा ईरानी ठिकानों पर किए गए हवाई हमलों के जवाब में की गई थी, जिसके बाद वाणिज्यिक जहाजों (Commercial Shipping) की सुरक्षा पर बड़ा खतरा मंडराने लगा है।
गिफ्ट निफ्टी 197 अंक टूटा, भारतीय शेयर बाजार में ‘गैप-डाउन’ ओपनिंग के आसार
वैश्विक बाजारों से मिल रहे बेहद कमजोर और जोखिम भरे संकेतों के चलते सोमवार, 13 जुलाई को भारतीय शेयर बाजार (Sensex और Nifty) की शुरुआत भारी गिरावट के साथ होने के पूरे आसार हैं। सिंगापुर एक्सचेंज पर ट्रेड होने वाला हमारा प्रमुख संकेतक ‘गिफ्ट निफ्टी’ (Gift Nifty) 197 अंक अथवा 0.81 प्रतिशत की भारी गिरावट के साथ 24,036 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। यह इस बात का साफ संकेत है कि दलाल स्ट्रीट पर आज बिकवाली का भारी दबाव देखने को मिल सकता है।
दिलचस्प बात यह है कि इससे पिछले कारोबारी सत्र में, ईरान-यूएस युद्ध की खबरों के बावजूद घरेलू बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी करीब 1 फीसदी की बढ़त के साथ बंद होने में कामयाब रहे थे। लेकिन वीकेंड पर खाड़ी क्षेत्र में बढ़े नए हमलों और तेल मार्ग के बंद होने से निवेशकों का सेंटिमेंट पूरी तरह बदल गया है और बाजार में ‘रिस्क-ऑफ’ (Risk-off Sentiment) यानी जोखिम से बचने की भावना हावी हो गई है।
बाजार विशेषज्ञों की राय: वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बढ़ी चिंताएं
भारतीय इक्विटी बाजार पर इस संकट के असर को लेकर ‘एनरिच मनी’ (Enrich Money) के सीईओ पोनमुडी आर (Ponmudi R) ने एक महत्वपूर्ण बाजार विश्लेषण साझा किया है।
पोनमुडी आर (सीईओ, एनरिच मनी) का बयान: “अमेरिका और ईरान के बीच नए सिरे से शुरू हुए सैन्य हमलों के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति (Global Energy Supplies) को लेकर चिंताएं एक बार फिर से पैदा हो गई हैं। इसके परिणामस्वरूप, वित्तीय बाजारों में हर तरफ जोखिम से बचने की प्रवृत्ति (Risk Aversion) बहुत ज्यादा बढ़ गई है। यही वजह है कि आज भारतीय शेयर बाजारों की शुरुआत बेहद सतर्क और गिरावट के रुख के साथ होने की उम्मीद है। निवेशकों को इस समय कमोडिटी और बाजार के उतार-चढ़ाव पर पैनी नजर रखनी चाहिए।”