700 अंक गिरने के बाद संभला सेंसेक्स, TCS के दम पर IT शेयरों ने कराई बाजार की शानदार वापसी

700 अंक गिरने के बाद संभला सेंसेक्स, TCS के दम पर IT शेयरों ने कराई बाजार की शानदार वापसी

 

पश्चिम एशिया तनाव के बीच 700 अंक टूटने के बाद शेयर बाजार में आई जोरदार रिकवरी। TCS के बेहतरीन नतीजों और FII खरीदारी से निचले स्तरों से संभला सेंसेक्स-निफ्टी।

पश्चिम एशिया (West Asia) में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य और मिसाइल टकराव के बाद सोमवार, 13 जुलाई 2026 को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत बेहद डरावनी रही। वैश्विक बाजारों से मिले बेहद कमजोर संकेतों के चलते बाजार खुलते ही दलाल स्ट्रीट पर चौतरफा बिकवाली देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 700 अंकों से भी ज्यादा टूट गया था, जिससे निवेशकों में हड़कंप मच गया। लेकिन दोपहर होते-होते बाजार ने निचले स्तरों से एक बेहद मजबूत और हैरान करने वाली रिकवरी (शानदार वापसी) दर्ज की। दोपहर करीब 1:09 बजे, बीएसई (BSE) सेंसेक्स शुरुआती सारी गिरावट को पाटकर 80.46 अंक यानी 0.10% की बढ़त के साथ 77,649.85 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं, निफ्टी 50 (Nifty 50) भी अपनी रिकवरी पूरी कर 11.10 अंक यानी 0.05% बढ़कर 24,218.00 के स्तर पर पहुंच गया। आइए विस्तार से जानते हैं कि बाजार में अचानक आए इस ‘यू-टर्न’ के पीछे कौन सी तीन बड़ी ताकतें काम कर रही थीं।

1. निचले स्तरों पर आई ‘वैल्यू बाइंग’ (Value Buying)

पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध के संकट और कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों की वजह से सुबह के समय जैसे ही बाजार में तेज गिरावट आई, समझदार निवेशकों ने इसे एक बड़े अवसर के रूप में देखा। मजबूत फंडामेंटल वाले और बेहतरीन कंपनियों के शेयर भारी गिरावट के कारण बेहद आकर्षक कीमतों (Attractive Valuations) पर उपलब्ध थे। निवेशकों और घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने निचले स्तरों पर जमकर ‘वैल्यू बाइंग’ शुरू कर दी। इस चौतरफा खरीदारी के चलते बाजार को बहुत मजबूत सपोर्ट मिला और दोनों ही सूचकांक अपने दिन के निचले स्तर (Intraday Lows) से तेजी से ऊपर की ओर खींचते चले गए।

2. विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार खरीदारी

बाजार को संभालने में दूसरा सबसे बड़ा योगदान विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs/FIIs) के अटूट भरोसे ने निभाया। जहां एक तरफ वैश्विक बाजारों में घबराहट थी, वहीं भारत में विदेशी निवेशकों की लिवाली लगातार जारी रही। आंकड़ों के मुताबिक, पिछले कारोबारी सत्र (शुक्रवार) को भी FIIs ने भारतीय बाजार में 2,603.72 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की थी।

जुलाई के शुरुआती सप्ताह से ही विदेशी निवेशकों का रुझान भारतीय बाजार के प्रति बेहद सकारात्मक बना हुआ है। डेटा से पता चलता है कि 10 जुलाई तक एफपीआई ने सेकेंडरी मार्केट के जरिए 5,155 करोड़ रुपये का निवेश किया था। वहीं, अगर प्राइमरी मार्केट और अन्य कैटेगरी को भी शामिल कर लिया जाए, तो इस अवधि के दौरान कुल विदेशी निवेश 15,156 करोड़ रुपये के पार पहुंच चुका है। विदेशी निवेशकों के इस भारी कैश इनफ्लो (Inflow) ने बाजार के सेंटिमेंट को कमजोर होने से बचा लिया।

3. टीसीएस (TCS) के दम पर IT सेक्टर ने संभाली बाजार की कमान

सोमवार को बाजार की इस शानदार रिकवरी की असली हीरो ‘इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी’ (IT) कंपनियां रहीं। देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने उम्मीद से बेहतर तिमाही नतीजे (Quarterly Earnings) पेश किए, जिसने पूरे सेक्टर की जान में जान फूंक दी। इसके साथ ही टीसीएस द्वारा एबीबी (ABB) कंपनी के साथ एक बहुत बड़ी मल्टी-मिलियन डॉलर एआई (AI) पार्टनरशिप की घोषणा ने निवेशकों का भरोसा सातवें आसमान पर पहुंचा दिया।

टीसीएस का शेयर करीब 3% की भारी बढ़त के साथ कारोबार कर रहा था, जिसने निफ्टी आईटी इंडेक्स (Nifty IT) को 0.72% ऊपर धकेल दिया। आईटी इंडेक्स की 10 में से 8 कंपनियां हरे निशान में कारोबार कर रही थीं। शुरुआत में जहां ऑटो, मेटल, बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर के शेयर भारी गिरावट के साथ लाल निशान में थे, वहीं आईटी सेक्टर ने अकेले दम पर सूचकांकों को सहारा दिया।

वैश्विक तनाव का खतरा अभी टला नहीं, निवेशक रखें पैनी नजर

भले ही भारतीय बाजार ने आज अपनी आंतरिक मजबूती और आईटी सेक्टर के दम पर शानदार रिकवरी दिखा दी हो, लेकिन वैश्विक स्तर पर मंडरा रहा खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर अपने मिसाइल हमलों का दायरा बढ़ा दिया है, जिससे यह युद्ध एक बड़े क्षेत्रीय संकट में तब्दील हो सकता है।

इस तनाव की वजह से कच्चे तेल की कीमतें 4% उछलकर 80 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच चुकी हैं, जो भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए चिंता का विषय है। बढ़ती तेल की कीमतें हमारे देश में महंगाई (Inflation) को बढ़ा सकती हैं। यही वजह है कि एशियाई बाजार आज भी लाल निशान में बंद हुए और वैश्विक निवेशक सोने (Gold) जैसे सुरक्षित विकल्पों की तरफ भाग रहे हैं। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि शाम को आने वाले एचसीएल टेक्नोलॉजीज (HCL Tech) के नतीजे और भू-राजनीतिक अपडेट्स पर निवेशकों को इस समय विशेष नजर रखनी चाहिए और फूंक-फूंक कर कदम रखना चाहिए।

 

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