BRICS में भारत की बढ़ती ताकत, UPI, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और फार्मा बना रहे नई पहचान

BRICS में भारत की बढ़ती ताकत, UPI, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और फार्मा बना रहे नई पहचान

 

BRICS में भारत ने UPI, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, फार्मास्यूटिकल्स और तकनीकी क्षमता को अपनी प्रमुख ताकत के रूप में पेश किया। ग्लोबल साउथ में भारत की भूमिका बढ़ रही है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था में BRICS लगातार एक प्रभावशाली मंच के रूप में उभर रहा है। इस समूह में शामिल बड़े देशों के पास अपनी-अपनी खास आर्थिक और रणनीतिक ताकत है। चीन को दुनिया के सबसे बड़े विनिर्माण नेटवर्क के लिए जाना जाता है, रूस के पास विशाल तेल और गैस संसाधन हैं, जबकि सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों के पास बड़ी वित्तीय पूंजी और निवेश क्षमता है। ऐसे में यह सवाल अहम हो जाता है कि BRICS जैसे शक्तिशाली मंच पर भारत की सबसे अलग और मजबूत पहचान क्या है।

नई दिल्ली में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन 2026 में भारत ने अपनी ताकत के रूप में डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे, UPI, फार्मास्यूटिकल्स, तकनीकी क्षमता और कुशल मानव संसाधन को प्रमुखता से सामने रखा है। भारत का प्रयास केवल अपनी उपलब्धियों को प्रदर्शित करना नहीं है, बल्कि इन मॉडलों को ग्लोबल साउथ यानी विकासशील देशों के लिए उपयोगी विकास मॉडल के रूप में पेश करना भी है।

डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर बना भारत की बड़ी ताकत

भारत की डिजिटल क्रांति ने देश की अर्थव्यवस्था और आम लोगों के लेनदेन के तरीके में बड़ा बदलाव किया है। UPI इसका सबसे प्रमुख उदाहरण है। डिजिटल भुगतान के इस बुनियादी ढांचे ने छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबारियों तक के लिए भुगतान प्रक्रिया को तेज और आसान बनाया है।

भारत BRICS देशों के बीच डिजिटल सहयोग को बढ़ाने की दिशा में डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर रिपॉजिटरी बनाने का सुझाव भी दे रहा है। इसका उद्देश्य अलग-अलग देशों के डिजिटल सिस्टम के बीच बेहतर तालमेल विकसित करना है। यदि सदस्य देशों के डिजिटल भुगतान ढांचे आपस में जुड़ते हैं, तो सीमा पार लेनदेन को अधिक तेज, सस्ता और सुविधाजनक बनाया जा सकता है।

यह पहल स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और सीमा पार भुगतान को बढ़ावा देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण हो सकती है। BRICS में डॉलर पर निर्भरता कम करने और स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल की चर्चा के बीच भारत का UPI मॉडल एक व्यावहारिक तकनीकी समाधान के रूप में सामने आ रहा है।

स्वास्थ्य सुरक्षा में भारत की अहम भूमिका

भारत की दूसरी बड़ी ताकत फार्मास्यूटिकल्स और स्वास्थ्य क्षेत्र है। दुनिया के कई देशों को किफायती जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराने में भारतीय दवा उद्योग की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वैश्विक महामारी के दौरान भी भारत ने दवाओं और वैक्सीन की आपूर्ति के जरिए अपनी उत्पादन क्षमता का प्रदर्शन किया था।

BRICS जैसे समूह में स्वास्थ्य सुरक्षा आने वाले समय में एक महत्वपूर्ण सहयोग क्षेत्र हो सकता है। आपूर्ति श्रृंखला में किसी भी तरह के व्यवधान के दौरान दवाओं और चिकित्सा उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित करना सभी देशों की प्राथमिकता बन गई है। ऐसे में भारत की किफायती दवा उत्पादन क्षमता उसे वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण भागीदार बनाती है।

AI और कुशल कार्यबल पर भारत का जोर

भारत की ताकत केवल डिजिटल भुगतान या दवा उद्योग तक सीमित नहीं है। देश सूचना प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और नई तकनीकों के क्षेत्र में भी अपनी भूमिका मजबूत कर रहा है। भारत का जोर ऐसे कुशल कार्यबल को तैयार करने पर है, जो भविष्य की तकनीकी जरूरतों के अनुरूप काम कर सके।

BRICS देशों के बीच क्षमता निर्माण और कौशल विकास के लिए सहयोग बढ़ाने की दिशा में भारत प्रशिक्षण और तकनीकी ज्ञान साझा करने पर जोर दे रहा है। AI, डिजिटल तकनीक और उभरती तकनीकों में प्रशिक्षित युवाओं की बढ़ती संख्या भारत को वैश्विक तकनीकी अर्थव्यवस्था में मजबूत स्थिति प्रदान कर सकती है।

चीन से अलग है भारत का विकास मॉडल

BRICS के भीतर भारत और चीन दोनों बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं, लेकिन दोनों के विकास मॉडल में अंतर दिखाई देता है। चीन की वैश्विक पहचान बड़े पैमाने के विनिर्माण, बुनियादी ढांचे और निवेश परियोजनाओं से जुड़ी है। वहीं भारत डिजिटल तकनीक, मानव संसाधन, नवाचार और कम लागत वाले समाधान को अपनी प्रमुख ताकत के रूप में प्रस्तुत कर रहा है।

भारत का डिजिटल मॉडल दूसरे देशों को अपनी स्थानीय जरूरतों के अनुसार तकनीकी व्यवस्था विकसित करने का अवसर दे सकता है। यही वजह है कि डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को भारत केवल घरेलू सफलता के रूप में नहीं, बल्कि दूसरे विकासशील देशों के लिए भी उपयोगी मॉडल के तौर पर देख रहा है।

ग्लोबल साउथ में भारत की बढ़ती भूमिका

पश्चिमी देशों और चीन के बीच बढ़ते आर्थिक और तकनीकी प्रतिस्पर्धा के बीच भारत खुद को विकासशील देशों के साथ सहयोग करने वाले एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। ग्लोबल साउथ के देशों के लिए कम लागत वाली तकनीक, डिजिटल भुगतान, दवाएं और कौशल विकास ऐसे क्षेत्र हैं, जिनमें भारत अपना अनुभव साझा कर सकता है।

BRICS के मंच पर भारत की यही रणनीति उसे अन्य प्रमुख सदस्यों से अलग पहचान देती है। UPI, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, फार्मास्यूटिकल्स, AI और कुशल कार्यबल भारत की ऐसी क्षमताएं हैं, जिन्हें वह व्यापक वैश्विक सहयोग के आधार के रूप में पेश कर रहा है।

कुल मिलाकर, BRICS में भारत की ताकत केवल उसकी अर्थव्यवस्था या बाजार का आकार नहीं है। उसकी असली पहचान ऐसे डिजिटल और तकनीकी समाधान विकसित करने में दिखाई देती है, जिन्हें बड़े पैमाने पर अपनाया जा सकता है। आने वाले वर्षों में यदि भारत इन क्षमताओं को BRICS और ग्लोबल साउथ के देशों के साथ साझा करने में सफल रहता है, तो वैश्विक आर्थिक और तकनीकी व्यवस्था में उसकी भूमिका और मजबूत हो सकती है।

 

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