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“केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पश्चिम एशिया संकट से जूझ रहे व्यवसायों के लिए ₹2,55,000 करोड़ की ECLGS 5.0 योजना को मंजूरी दी है। MSMEs को 100% और एयरलाइन क्षेत्र को ₹1,500 करोड़ तक की क्रेडिट गारंटी मिलेगी।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंगलवार को ‘आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना’ (ECLGS 5.0) को मंजूरी देकर भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। यह योजना विशेष रूप से उन व्यवसायों को अतिरिक्त ऋण सहायता प्रदान करने के लिए तैयार की गई है, जो वर्तमान में पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी संघर्ष के कारण तरलता (Liquidity) की गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। इस योजना का मुख्य उद्देश्य बाजार में ₹2,55,000 करोड़ के अतिरिक्त ऋण प्रवाह को सक्षम बनाना है, जिसमें से ₹5,000 करोड़ का विशेष कोटा केवल एयरलाइन क्षेत्र के लिए सुरक्षित रखा गया है।
ऋण गारंटी और कवरेज का स्वरूप
योजना के तहत, नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड (NCGTC) सदस्य ऋण संस्थानों (MLIs) को शत-प्रतिशत सुरक्षा प्रदान करेगी। मंत्रिमंडल द्वारा जारी विवरण के अनुसार, MSME क्षेत्र के लिए 100% और गैर-MSME (Non-MSME) के साथ-साथ एयरलाइन क्षेत्र के लिए 90% क्रेडिट गारंटी कवरेज प्रदान किया जाएगा। यह गारंटी डिफॉल्ट की स्थिति में बैंकों को सुरक्षा देगी, जिससे वे बिना किसी हिचकिचाहट के संकटग्रस्त उद्योगों को ऋण देने के लिए प्रोत्साहित होंगे।
पात्रता मानदंड और सहायता की सीमा
ECLGS 5.0 का लाभ उन सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) और गैर-MSMEs को मिलेगा जिनके पास पहले से वर्किंग कैपिटल लिमिट है। इसके अलावा, वे अनुसूचित यात्री एयरलाइंस भी इसके पात्र होंगी जिनकी ऋण सुविधाएं 31 मार्च, 2026 तक मानक (Standard) श्रेणी में रही हैं। MSMEs और गैर-MSMEs के लिए, अतिरिक्त ऋण की सीमा वित्तीय वर्ष 2026 की चौथी तिमाही के दौरान उपयोग की गई पीक वर्किंग कैपिटल के 20% तक तय की गई है, जिसकी अधिकतम सीमा ₹100 करोड़ प्रति उधारकर्ता है। वहीं, एयरलाइंस के लिए यह सहायता 100% तक हो सकती है, जो प्रति उधारकर्ता ₹1,500 करोड़ पर सीमित है।
लोन की अवधि और मोरेटोरियम की सुविधा
व्यवसायों को संभलने का पर्याप्त समय देने के लिए ऋण की अवधि (Tenor) काफी लचीली रखी गई है। MSME और गैर-MSME क्षेत्र के लिए ऋण की अवधि 5 वर्ष निर्धारित की गई है, जिसमें पहले 1 वर्ष का मोरेटोरियम (ऋण स्थगन) शामिल है। दूसरी ओर, भारी संकट से जूझ रहे एयरलाइन सेक्टर के लिए ऋण की अवधि 7 वर्ष रखी गई है, जिसमें 2 वर्ष का मोरेटोरियम दिया जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस ऋण सुविधा के लिए कोई गारंटी शुल्क (Guarantee Fee) नहीं लिया जाएगा, जिससे छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।
आर्थिक स्थिरता और रोजगार संरक्षण का लक्ष्य
पश्चिम एशिया की स्थिति के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है, जिससे भारतीय निर्यातकों और उद्योगों के पास नकदी की कमी देखी जा रही है। सरकार का मानना है कि यह योजना अल्पकालिक तरलता बेमेल (Short-term liquidity mismatches) को दूर करने में सहायक सिद्ध होगी। मंत्रिमंडल ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक वित्तीय पैकेज नहीं है, बल्कि व्यवसायों को चालू रखने, करोड़ों नौकरियों की रक्षा करने और आपूर्ति श्रृंखला को सुचारू बनाए रखने का एक रणनीतिक प्रयास है।
विकसित भारत की ओर एक मजबूत कदम
ECLGS 5.0 के माध्यम से सरकार ने यह संदेश दिया है कि वह वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच अपने घरेलू उद्योगों के साथ मजबूती से खड़ी है। यह योजना 31 मार्च, 2027 तक स्वीकृत होने वाले सभी ऋणों पर लागू होगी। समय पर तरलता सुनिश्चित करके, यह पहल न केवल व्यवसायों को डूबने से बचाएगी, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक झटकों के खिलाफ अधिक लचीला और आत्मनिर्भर बनाएगी। यह कदम ‘विकसित भारत’ के विजन को साकार करने की दिशा में बुनियादी ढांचागत और वित्तीय सुदृढ़ीकरण का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।