Table of Contents
महाराष्ट्र में UCC को लेकर एकनाथ शिंदे ने अमित शाह के बयान का समर्थन किया। जानें समान नागरिक संहिता पर महायुति सरकार का रुख और देवेंद्र फडणवीस ने क्या कहा।
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और शिवसेना अध्यक्ष एकनाथ शिंदे ने समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान का समर्थन किया है। शिंदे ने कहा कि शिवसेना के संस्थापक दिवंगत बाल ठाकरे की सोच ‘एक देश, एक कानून’ की थी और सभी के लिए समान न्याय उनका दृष्टिकोण था। शिंदे के मुताबिक, अमित शाह ने भी UCC को लेकर इसी तरह की बात कही है। महाराष्ट्र सरकार की ओर से भी समान नागरिक संहिता को लेकर सकारात्मक रुख सामने आया है।
बाल ठाकरे के ‘एक देश, एक कानून’ का दिया हवाला
एकनाथ शिंदे ने UCC पर अपनी बात रखते हुए बाल ठाकरे के विचारों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बालासाहेब ठाकरे का विजन ‘एक देश, एक कानून’ था, जिसमें सभी के लिए समान न्याय की बात थी। शिंदे ने इसी विचार को समान नागरिक संहिता के प्रस्ताव से जोड़ते हुए कहा कि अमित शाह भी UCC को लेकर इसी दिशा में बात कर रहे हैं। महाराष्ट्र में शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना भारतीय जनता पार्टी के साथ महायुति गठबंधन का हिस्सा है और केंद्र में भी भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए की सहयोगी है।
महाराष्ट्र में UCC लागू करने पर सरकार का रुख
महाराष्ट्र में UCC को लेकर सरकार ने अभी अंतिम फैसला नहीं किया है। एकनाथ शिंदे ने कहा कि महायुति सरकार समान नागरिक संहिता को लेकर सकारात्मक है और उचित समय पर इस संबंध में निश्चित निर्णय लिया जाएगा। इससे पहले मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी UCC को लेकर सरकार की योजना स्पष्ट की थी। उन्होंने कहा था कि UCC का मसौदा तैयार करने वाली समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद सरकार आगे की प्रक्रिया शुरू करेगी।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, महाराष्ट्र सरकार ने UCC के मसौदे को तैयार करने के लिए सात सदस्यीय समिति बनाई है, जिसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना देसाई कर रही हैं। समिति की सिफारिशें मिलने के बाद सरकार विधानसभा में कानून लाने की दिशा में आगे बढ़ सकती है। फडणवीस ने आगामी शीतकालीन विधानसभा सत्र में UCC विधेयक पेश किए जाने की योजना की भी जानकारी दी है।
अमित शाह ने 21 राज्यों को लेकर क्या कहा?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान UCC को लेकर केंद्र की योजना पर बात की थी। उन्होंने कहा कि तीन तलाक को खत्म किए जाने से मुस्लिम महिलाओं को समान अधिकार मिले हैं और कई राज्यों में UCC लागू किया जा चुका है। शाह ने यह भी कहा कि उन्हें भरोसा है कि 2029 से पहले भाजपा-एनडीए शासित 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू की जाएगी। उनके इस बयान के बाद एनडीए के भीतर अलग-अलग सहयोगी दलों के रुख भी चर्चा में आए हैं।
UCC का उद्देश्य अलग-अलग धार्मिक समुदायों के लिए व्यक्तिगत कानूनों से जुड़े कुछ विषयों में एक समान कानूनी व्यवस्था की अवधारणा से जुड़ा है। विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे पारिवारिक मामलों से संबंधित कानून इस बहस के प्रमुख हिस्से रहे हैं। हालांकि, इसके प्रावधान और लागू करने की प्रक्रिया राज्य या प्रस्तावित कानून के अनुसार अलग हो सकती है।
बिहार में सहयोगी दल JD(U) का अलग रुख
अमित शाह के बयान के बाद बिहार में एनडीए की सहयोगी जनता दल (यूनाइटेड) यानी JD(U) के भीतर से अलग रुख सामने आया। वरिष्ठ जेडीयू नेता श्याम रजक ने कहा कि पार्टी बिहार में UCC लागू करने के पक्ष में नहीं है, हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी ने संसद में UCC विधेयक का समर्थन किया था। इस बयान ने राष्ट्रीय स्तर पर UCC को लेकर एनडीए के सहयोगी दलों के बीच मतभेद की चर्चा को बढ़ा दिया।
हालांकि, 15 सितंबर को जेडीयू की ओर से एक अधिक सावधान रुख भी सामने आया। बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि पार्टी प्रस्तावित कानून के प्रावधानों का अध्ययन करने के बाद अपना रुख तय करेगी। उन्होंने संकेत दिया कि पार्टी किसी कानून का केवल विरोध करने के बजाय उसके प्रावधानों को देखकर निर्णय लेगी।
UCC पर राज्यों की भूमिका भी अहम
समान नागरिक संहिता को लेकर केंद्र और विभिन्न राज्यों में अलग-अलग स्तर पर चर्चा चल रही है। उत्तराखंड में UCC लागू होने के बाद दूसरे राज्यों में भी इसे लेकर प्रक्रियाएं आगे बढ़ी हैं। महाराष्ट्र में सरकार ने विशेषज्ञ समिति के माध्यम से मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की है। वहीं, बिहार में सहयोगी दलों के अलग-अलग बयानों से यह स्पष्ट है कि UCC को लेकर राज्यों और राजनीतिक दलों के स्तर पर विचार अलग हो सकते हैं।
फिलहाल महाराष्ट्र में UCC को लेकर अंतिम निर्णय समिति की रिपोर्ट और उसके बाद होने वाली विधायी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। एकनाथ शिंदे का समर्थन और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की ओर से विधानसभा में विधेयक लाने की योजना ने राज्य में इस मुद्दे को राजनीतिक और कानूनी चर्चा के केंद्र में ला दिया है।