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हाईकोर्ट से रिहाई के बाद डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन ने तमिलनाडु सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि किसानों के मुद्दे पर दिए गए उनके भाषण का एडिटेड वीडियो फैलाकर उन्हें गिरफ्तार किया गया और फर्जी नैरेटिव तैयार किया गया।
तमिलनाडु की राजनीति में डीएमके नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उदयनिधि स्टालिन की गिरफ्तारी और उसके बाद रिहाई को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। हाईकोर्ट के निर्देश पर रिहा होने के बाद उदयनिधि स्टालिन ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि किसानों के मुद्दे पर उनकी आवाज दबाने के लिए उनके भाषण का “कट-एंड-पेस्ट” संस्करण तैयार कर सोशल मीडिया और मीडिया में फैलाया गया। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने किसी भी व्यक्ति के खिलाफ अपमानजनक या द्विअर्थी टिप्पणी नहीं की, बल्कि उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया ताकि उन्हें बदनाम किया जा सके और किसानों से जुड़े अहम मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाया जा सके।
रिहाई के बाद सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
रिहा होने के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि रविवार को तंजावुर में किसानों के समर्थन में आयोजित प्रदर्शन के दौरान उन्होंने करीब 25 मिनट का भाषण दिया था। उनके अनुसार, इस कार्यक्रम को किसानों का व्यापक समर्थन मिला और कावेरी जल विवाद, मेकेदातु बांध परियोजना तथा किसानों से जुड़े मुद्दे प्रमुखता से चर्चा में आए। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी वजह से राज्य सरकार असहज हो गई और अगले दिन विधानसभा सत्र शुरू होने से पहले उनके भाषण का संपादित वीडियो प्रसारित कर दिया गया।
उदयनिधि ने कहा कि एडिटेड वीडियो के जरिए यह दिखाने की कोशिश की गई कि उन्होंने ऐसे बयान दिए हैं जो उन्होंने कभी नहीं कहे। उनका आरोप है कि इसी वीडियो को आधार बनाकर उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई और पुलिस कार्रवाई की गई।
‘मेरे बयान को गलत तरीके से पेश किया गया’
डीएमके नेता ने कहा कि सोमवार सुबह उनके भाषण का एडिटेड क्लिप सोशल मीडिया और विभिन्न मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित किया गया। उन्होंने दावा किया कि इस वीडियो में उनके बयान का संदर्भ पूरी तरह बदल दिया गया, जिससे ऐसा प्रतीत हो कि उन्होंने आपत्तिजनक टिप्पणी की है।
उदयनिधि का कहना है कि राष्ट्रीय मीडिया के कुछ संस्थानों तक भी यही संपादित वीडियो पहुंचाया गया और उसके बाद पुलिस उनके आवास पर पहुंची। उन्होंने कहा कि उन्होंने कानून का सम्मान करते हुए पुलिस जांच में पूरा सहयोग किया और बिना किसी विरोध के पुलिस के साथ चले गए।
‘हम ऐसी कार्रवाइयों से डरने वाले नहीं हैं’
उदयनिधि स्टालिन ने राज्य सरकार पर विपक्ष की आवाज दबाने का आरोप लगाते हुए कहा कि ऐसी कार्रवाई उन्हें डराने या चुप कराने के उद्देश्य से की गई है। उन्होंने कहा, “मैं कलाईनार एम. करुणानिधि का पोता, एम.के. स्टालिन का बेटा और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम का सदस्य हूं। हम ऐसी कार्रवाइयों से डरने वाले नहीं हैं। मैं हर लोकतांत्रिक चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हूं।”
उन्होंने दोहराया कि उन्होंने किसी महिला, अभिनेता या किसी अन्य व्यक्ति के खिलाफ कोई अपमानजनक टिप्पणी नहीं की थी। उनके मुताबिक, उनके पूरे भाषण का संदर्भ जानबूझकर बदलकर राजनीतिक विवाद खड़ा किया गया।
किसानों के मुद्दे को दबाने की कोशिश का आरोप
उदयनिधि ने आरोप लगाया कि विधानसभा का सत्र शुरू होने वाला था, जिसमें डीएमके किसानों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाने की तैयारी कर रही थी। उन्होंने कहा कि सरकार नहीं चाहती थी कि कावेरी जल विवाद, मेकेदातु बांध परियोजना और किसानों से किए गए अधूरे वादों पर चर्चा हो। इसलिए ध्यान भटकाने के लिए उनके खिलाफ कार्रवाई की गई।
उन्होंने कहा कि अपने भाषण में उन्होंने राज्य सरकार से पूछा था कि सत्ता में आने के बाद किसानों से किए गए वादों का क्या हुआ और कावेरी नदी के जल बंटवारे को लेकर सरकार ने अब तक क्या कदम उठाए हैं।
मेकेदातु परियोजना और कावेरी विवाद का भी उठाया मुद्दा
उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि उन्होंने अपने भाषण में कर्नाटक की मेकेदातु बांध परियोजना पर भी सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि कर्नाटक इस परियोजना को आगे बढ़ा रहा है, जबकि तमिलनाडु के हिस्से का कावेरी नदी का पानी भी समय पर नहीं छोड़ा जा रहा है।
उन्होंने विधानसभा में इस विषय पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग भी की थी। उनके अनुसार, यह किसी एक राजनीतिक दल का नहीं बल्कि तमिलनाडु के सभी किसानों का मुद्दा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने उनकी मांग पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और इसके बजाय उनके भाषण को विवादित बनाने का प्रयास किया।
क्या है पूरा विवाद?
यह विवाद तंजावुर में कावेरी जल विवाद को लेकर आयोजित एक विरोध प्रदर्शन के दौरान शुरू हुआ। भाषण के दौरान भीड़ के कुछ लोगों ने अभिनेत्री तृषा के नाम के नारे लगाए। आरोप है कि उसी दौरान उदयनिधि स्टालिन ने कथित तौर पर द्विअर्थी टिप्पणी की। हालांकि उन्होंने बाद में स्पष्ट किया कि उनका इशारा अभिनेत्री तृषा की ओर नहीं बल्कि कावेरी नदी के पानी की ओर था।
इसके बावजूद इस बयान को लेकर तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) की महिला इकाई ने तंजावुर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि उदयनिधि ने अभिनेत्री तृषा के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की है। दूसरी ओर, डीएमके का कहना है कि उनके बयान को संदर्भ से हटाकर पेश किया गया और राजनीतिक लाभ के लिए विवाद खड़ा किया गया।
किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला?
पुलिस ने उदयनिधि स्टालिन के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 61, 79, 192, 196, 296(बी), 351(2) और 352 के अलावा तमिलनाडु महिलाओं के उत्पीड़न निषेध अधिनियम की धारा 4 तथा सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम की धारा 67 के तहत मामला दर्ज किया है। मंगलवार को चेन्नई स्थित उनके आवास से उन्हें हिरासत में लेकर तंजावुर ले जाया गया था।
हालांकि हाईकोर्ट के निर्देश के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। रिहाई के बाद भी उदयनिधि अपने आरोपों पर कायम हैं और उनका कहना है कि उनके खिलाफ “फर्जी नैरेटिव” तैयार किया गया। अब यह मामला कानूनी प्रक्रिया के साथ-साथ तमिलनाडु की राजनीति में भी बड़ा मुद्दा बन चुका है, जहां सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं।