पश्चिम बंगाल में TMC से इस्तीफा देने वाले बागी नेता सुष्मिता देव, सुखेंदु शेखर रॉय और प्रकाश चिक बराइक BJP में शामिल हो गए हैं। भाजपा ने इन्हें 24 जुलाई को होने वाले राज्यसभा उपचुनाव के लिए उम्मीदवार घोषित किया है।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बहुत बड़ा भूचाल आ गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) से बगावत करने वाले तीन दिग्गज और वरिष्ठ नेताओं—सुष्मिता देव, सुखेंदु शेखर रॉय और प्रकाश चिक बराइक—ने गुरुवार को औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया। बीजेपी में शामिल होते ही पार्टी आलाकमान ने इन तीनों नेताओं को एक बड़ा ‘इनाम’ दिया है। बीजेपी की केंद्रीय चुनाव समिति (CEC) ने पश्चिम बंगाल में होने वाले आगामी राज्यसभा उपचुनाव 2026 के लिए अपने उम्मीदवारों की आधिकारिक सूची जारी कर दी है, जिसमें इन तीनों ही बागी नेताओं के नामों की घोषणा राज्यसभा उम्मीदवार के तौर पर की गई है। इस बड़े राजनीतिक उलटफेर ने राज्य में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी को एक बहुत तगड़ा झटका दिया है।
साल्ट लेक दफ्तर में स्वागत: पार्टी में तानाशाही का लगाया आरोप
बीजेपी में शामिल होने से पहले इन तीनों ही प्रमुख नेताओं ने पिछले महीने तृणमूल कांग्रेस के भीतर बढ़ते अंदरूनी कलह और असंतोष के बीच अपने पदों और पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। इस्तीफे की तारीखों की बात करें तो सुखेंदु शेखर रॉय ने 8 जून को, सुष्मिता देव ने 10 जून को और प्रकाश चिक बराइक ने 11 जून को टीएमसी से अपना इस्तीफा सौंप दिया था। इन तीनों नेताओं ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से गंभीर नाराजगी जताई थी और खुले तौर पर आरोप लगाया था कि पार्टी अब लोकतांत्रिक तरीके से नहीं, बल्कि पूरी तरह से मनमाने और तानाशाही ढंग से चलाई जा रही है, जहाँ वरिष्ठ नेताओं की आवाज को दबाया जा रहा है।
गुरुवार को इन तीनों नेताओं को पश्चिम बंगाल भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य और अन्य वरिष्ठ केंद्रीय व राज्य स्तरीय नेताओं की गरिमामयी मौजूदगी में साल्ट लेक स्थित बीजेपी के मुख्य कार्यालय में पार्टी की सदस्यता दिलाई गई। सामिक भट्टाचार्य ने तीनों नेताओं को बीजेपी का आधिकारिक झंडा सौंपकर पार्टी में उनका गर्मजोशी से स्वागत किया और कहा कि इन कद्दावर नेताओं के लंबे राजनीतिक अनुभव और संगठनात्मक क्षमता का लाभ उठाकर भाजपा पश्चिम बंगाल में जमीन पर और ज्यादा मजबूत होगी।
राज्यसभा उपचुनाव 2026: जानिए वोटिंग और काउंटिंग का पूरा शेड्यूल
भारतीय निर्वाचन आयोग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, पश्चिम बंगाल की इन खाली हुई तीन राज्यसभा सीटों पर उपचुनाव की प्रक्रिया बेहद तेजी से आगे बढ़ रही है। इस महत्वपूर्ण उपचुनाव के लिए आधिकारिक अधिसूचना 7 जुलाई को जारी की जाएगी। इसके बाद, उम्मीदवारों के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 14 जुलाई तय की गई है। प्राप्त हुए सभी नामांकन पत्रों की स्क्रूटनी (जांच) 15 जुलाई को की जाएगी। इसके बाद, सबसे महत्वपूर्ण चरण यानी वोटिंग (मतदान) और काउंटिंग (मतगणना) की प्रक्रिया 24 जुलाई को एक ही दिन संपन्न कराई जाएगी, जिसके बाद देर शाम तक आधिकारिक नतीजों की घोषणा कर दी जाएगी।
विधानसभा का गणित: बीजेपी की आसान जीत और ममता बनर्जी की बढ़ी मुश्किलें
पश्चिम बंगाल विधानसभा में मौजूदा राजनीतिक समीकरणों और संख्या बल को देखा जाए, तो बीजेपी उम्मीदवारों की तीनों सीटों पर जीत लगभग तय मानी जा रही है। वर्तमान में पश्चिम बंगाल विधानसभा की कुल सीटों के गणित में बीजेपी के पास 208 विधायकों का एक बहुत बड़ा और अटूट समर्थन हासिल है। राज्यसभा चुनाव के नियमों के तहत बीजेपी के किसी भी उम्मीदवार को हराने के लिए विपक्ष को कम से कम 70 विधायकों के मतों की आवश्यकता होगी।
दूसरी ओर, ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) इस समय अपने इतिहास के सबसे बुरे अंदरूनी संकट से गुजर रही है। पिछले विधानसभा चुनाव में टीएमसी ने कुल 80 सीटें जीती थीं, लेकिन पार्टी के भीतर मचे घमासान के कारण 80 में से 60 विधायकों ने ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में एक पूरी तरह से अलग गुट बना लिया है और वे मुख्य पार्टी से अलग हो चुके हैं। इस भारी टूट के बाद अब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पास आधिकारिक तौर पर केवल 20 विधायकों का ही समर्थन शेष बचा है। इस बेहद कमजोर संख्या बल के कारण टीएमसी के पास बीजेपी को टक्कर देने या अपने उम्मीदवार को जिताने का कोई गणितीय आधार नहीं बचा है, जिससे भाजपा के तीनों उम्मीदवारों का संसद के उच्च सदन (राज्यसभा) पहुंचना पूरी तरह तय है।