AI नौकरी नहीं छीनेगा, बल्कि कामकाजी पेशेवरों की क्षमता और वैल्यू बढ़ाएगा: मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन

AI नौकरी नहीं छीनेगा, बल्कि कामकाजी पेशेवरों की क्षमता और वैल्यू बढ़ाएगा: मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन

 

मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा कि AI इंसानों की जगह नहीं लेगा, बल्कि उनकी क्षमता बढ़ाएगा। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एंटरप्राइज AI टैलेंट बेस है।

भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी. अनंत नागेश्वरन ने आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऑटोमेशन को लेकर वैश्विक स्तर पर बढ़ती चिंताओं पर एक बेहद महत्वपूर्ण और सकारात्मक दृष्टिकोण साझा किया है। गुरुवार को ‘कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री’ (CII) द्वारा आयोजित जीसीसी (GCC) बिजनेस समिट में बोलते हुए नागेश्वरन ने कहा कि एआई कामकाजी पेशेवरों को नौकरी से रिप्लेस (विस्थापित) करने के बजाय प्रत्येक व्यक्ति के काम की वैल्यू (मूल्य) और उत्पादकता को बढ़ाएगा। उन्होंने स्वीकार किया कि हालांकि नियमित, दोहराव वाले और नियम-बद्ध कार्यों पर सस्ती ऑटोमेशन तकनीक का असर जरूर पड़ेगा, लेकिन जो केंद्र सही तरीके से प्रबंधित हैं, वे इंसानी भूमिकाओं को और मजबूत बनाने के लिए तकनीक का लाभ उठा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई प्रणालियों को डिजाइन करने, प्रशिक्षित करने, उनका परीक्षण करने और उन्हें नियंत्रित करने के लिए हमेशा मानवीय निगरानी और सूझबूझ की आवश्यकता रहेगी।

भाग्य नहीं, बल्कि एक शक्तिशाली उपकरण है एआई: भारत का दृष्टिकोण

मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने इस बात पर जोर दिया कि जो देश किसी शक्तिशाली तकनीक को अपना ‘भाग्य’ मान लेते हैं, वे अंततः उसी तकनीक के अनुसार ढल जाते हैं, लेकिन जो देश तकनीक को एक ‘उपकरण’ (टूल) की तरह देखते हैं, वे खुद उस तकनीक को एक नया आकार देते हैं। भारत को निश्चित रूप से दूसरे समूह में होना चाहिए। उन्होंने कहा, “एआई के आने से कार्यस्थल या ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) खाली नहीं होने वाले हैं। जो केंद्र समय के साथ स्थिर रहेंगे, वे पिछड़ जाएंगे, लेकिन जो केंद्र तकनीक को अपनाकर आगे बढ़ेंगे, वे और अधिक समृद्ध होंगे।” भारत का लक्ष्य कभी भी अपने लोगों से मशीनों की तरह काम कराना नहीं होना चाहिए, बल्कि हमारा लक्ष्य मशीनों का इस तरह उपयोग करना होना चाहिए ताकि हमारे लोग उन कार्यों को करने के लिए स्वतंत्र हो सकें जो केवल इंसान ही कर सकते हैं—जैसे कि तर्क करना, निर्णय लेना, जिम्मेदारी उठाना और अपनी बुद्धिमत्ता का प्रदर्शन करना।

भारत में जीसीसी (GCC) का विशाल नेटवर्क और वैश्विक दबदबा

वी. अनंत नागेश्वरन नागेश्वरन वी. अनंत नागेश्वरन ने भारत के मजबूत होते आर्थिक और तकनीकी परिदृश्य के कुछ बेहद महत्वपूर्ण आंकड़े साझा किए। उन्होंने बताया कि वर्तमान में भारत दुनिया के कुल ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) के लगभग आधे हिस्से की मेजबानी करता है। देश में 2,000 से अधिक ऐसे केंद्र सक्रिय हैं, जो 20 लाख (2 मिलियन) से अधिक उच्च कुशल पेशेवरों को रोजगार दे रहे हैं। इस क्षेत्र का कुल राजस्व 60 अरब अमेरिकी डॉलर को पार कर गया है, जो देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में लगभग 2 प्रतिशत का योगदान देता है। सबसे खास बात यह है कि इनमें से 1,200 से अधिक केंद्र आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग (ML) जैसे अत्याधुनिक और उन्नत क्षेत्रों में काम कर रहे हैं, जिससे भारत वैश्विक स्तर पर एंटरप्राइज एआई टैलेंट बेस के मामले में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश बन चुका है।

लागत (Cost) से क्षमता (Capability) की ओर भारत का ऐतिहासिक सफर

मुख्य आर्थिक सलाहकार ने भारत के आईटी और सेवा क्षेत्र के क्रमिक विकास को रेखांकित करते हुए कहा कि वैश्विक कंपनियां शुरुआत में भारत में सिर्फ ‘कम लागत’ (लो-कॉस्ट) के आकर्षण के कारण आई थीं, लेकिन वे यहाँ की ‘असाधारण क्षमता’ (कैपेबिलिटी) के कारण रुक गईं। उन्होंने समझाया कि लागत के फायदे की नकल कोई भी दूसरा कम लागत वाला देश आसानी से कर सकता है, लेकिन क्षमता का जो फायदा भारत ने बरसों की मेहनत से बनाया है, उसकी नकल करना बेहद मुश्किल है और इसे खोना भी उतना ही कठिन है। भारत में जो काम कभी सिर्फ सपोर्ट या बैक-ऑफिस के तौर पर शुरू हुआ था, वह पहले इंजीनियरिंग बना, फिर प्रोडक्ट डेवलपमेंट में बदला और आज कई बड़ी कंपनियों में वैश्विक स्तर के बड़े फैसले भारत के इन्हीं केंद्रों से लिए जा रहे हैं। आज जीसीसी में मिलने वाले पद पारंपरिक सेवा नौकरियों की तुलना में कहीं अधिक वेतन और बेहतर करियर विकल्प प्रदान कर रहे हैं।

वैश्विक दिग्गजों का पसंदीदा केंद्र, लेकिन शालीनता से बचने की जरूरत

आज भारत की क्षमता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वैश्विक बैंक मुंबई और बेंगलुरु से अपने ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म का संचालन करते हैं, दुनिया के बड़े कार निर्माता चेन्नई और पुणे में अपने एम्बेडेड सिस्टम डिजाइन करते हैं, और सेमीकंडक्टर कंपनियां स्थानीय स्तर पर चिप डिजाइन का काम संभाल रही हैं। उन्होंने जर्मनी की प्रसिद्ध फार्मा और टेक कंपनी ‘मर्क’ (Merck) का उदाहरण दिया, जिसने बेंगलुरु में अपना नया कैंपस स्थापित किया है। यह परिसर दुनिया भर में कंपनी की डिजिटल क्षमता का सबसे बड़ा केंद्र है, जिससे भारत मर्क का चौथा सबसे बड़ा वर्कफोर्स हब बन गया है। हालांकि, नागेश्वरन ने इस सफलता के बीच एक चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा कि सफलता कभी-कभी शालीनता (Complacency) को जन्म दे सकती है। आज हमारे पास जो बढ़त है, वह समय के साथ बनी है, लेकिन अन्य देश भी हमें देख रहे हैं और हमारी नकल कर रहे हैं। भारत में लागत बढ़ रही है और कुछ विशेष कौशलों (Skills) में प्रतिभाओं की कमी भी देखी जा रही है, इसलिए हमें लगातार खुद को अपग्रेड करते रहना होगा।

 

 

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