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तिरुपति लड्डू के लिए सप्लाई किए गए घी में कथित मिलावट के मामले में ED ने सुकृति फूड्स के प्रमोटर कैलाश चंद मंगला को गिरफ्तार किया है। जांच में 230 करोड़ रुपये की सप्लाई की जांच हो रही है।
तिरुपति के प्रसिद्ध लड्डू प्रसाद में इस्तेमाल होने वाले घी को लेकर विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने कथित तौर पर मिलावटी घी की आपूर्ति से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सुकृति फूड्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रमोटर कैलाश चंद मंगला को गिरफ्तार किया है। ED के मुताबिक, तिरुमला तिरुपति देवस्थानम यानी TTD को जिस घी को Agmark Special Grade Cow Ghee के रूप में सप्लाई किया गया, उसे कथित तौर पर असली गाय के घी के बजाय रिफाइंड पाम ऑयल, पाम कर्नेल ऑयल, पामोलीन और कई रसायनों की मदद से तैयार किया गया था। मंगला को 17 सितंबर 2026 को गिरफ्तार किया गया और बाद में विशाखापट्टनम की विशेष PMLA अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
2019 से 2024 के बीच 230 करोड़ रुपये की सप्लाई की जांच
ED की जांच कथित तौर पर साल 2019 से 2024 के बीच TTD को की गई घी की आपूर्ति से जुड़ी है। एजेंसी के अनुसार, इस अवधि में संदिग्ध आपूर्ति का कुल मूल्य करीब 230 करोड़ रुपये था। ED का आरोप है कि इसमें से लगभग 96 करोड़ रुपये मूल्य का कथित मिलावटी घी सुकृति फूड्स से जुड़ी गतिविधियों के माध्यम से तैयार किया गया था। इस मामले में एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित मिलावटी घी किस तरह तैयार किया गया, किन माध्यमों से TTD तक पहुंचाया गया और इसके लिए वित्तीय लेनदेन को किस तरह दर्ज किया गया।
पाम ऑयल और कई रसायनों के इस्तेमाल का आरोप
ED के अनुसार, कथित मिलावटी घी तैयार करने में रिफाइंड पाम ऑयल, पाम कर्नेल ऑयल और पामोलीन के अलावा कई रसायनों का इस्तेमाल किया गया। रिपोर्टों में मोनोग्लिसराइड्स, Myvacet Soft 400 और Acetic Acid Ester जैसे पदार्थों का भी उल्लेख किया गया है। एजेंसी का दावा है कि इस तैयार उत्पाद को गाय के घी के रूप में प्रस्तुत करके TTD को सप्लाई किया गया। हालांकि, इन आरोपों का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान ही होगा।
फर्जी रिकॉर्ड और फ्रंट कंपनियों के इस्तेमाल का आरोप
जांच एजेंसी का आरोप है कि कथित आपूर्ति को वास्तविक दिखाने के लिए कई स्तरों पर रिकॉर्ड तैयार किए गए। ED के मुताबिक, मंगला ने कथित तौर पर विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से उत्पाद की आपूर्ति कराई और खरीद-बिक्री से जुड़े रिकॉर्ड में ऐसी जानकारी दर्ज की गई, जिससे मिलावटी सामग्री के वास्तविक इस्तेमाल को छिपाया जा सके। एजेंसी ने कुछ संस्थाओं को कथित फ्रंट एंटिटी के तौर पर भी जांच के दायरे में रखा है। इस पहलू की जांच का उद्देश्य कथित आपूर्ति श्रृंखला और पैसों के लेनदेन को समझना है।
PMLA के तहत हुई कैलाश चंद मंगला की गिरफ्तारी
ED ने कैलाश चंद मंगला को 17 सितंबर को हैदराबाद स्थित अपने कार्यालय में गिरफ्तार किया। इसके बाद उन्हें विशाखापट्टनम की विशेष PMLA अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। यह मामला मूल रूप से कथित आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी और भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों वाली प्राथमिकी से आगे बढ़कर मनी लॉन्ड्रिंग जांच का हिस्सा बना है। ED अब कथित आपूर्ति और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन की कड़ियों की जांच कर रही है।
पहले भी जांच के केंद्र में रहा है तिरुपति लड्डू मामला
तिरुपति लड्डू में इस्तेमाल होने वाले घी को लेकर विवाद नया नहीं है। इससे पहले भी TTD को सप्लाई किए गए घी की गुणवत्ता और खरीद प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ चुके हैं। मौजूदा जांच में ED वित्तीय लेनदेन और कथित मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू पर ध्यान दे रही है, जबकि मिलावट के मूल आरोपों की जांच अलग स्तर पर भी हुई है। हाल की रिपोर्टों के मुताबिक, CBI की जांच से जुड़ी SIT ने जिन नमूनों की प्रयोगशाला जांच की, उनमें पशु वसा की मौजूदगी स्थापित नहीं हुई थी। इसलिए मौजूदा मामले में अलग-अलग जांच के निष्कर्षों को एक-दूसरे से अलग समझना जरूरी है।
आगे की जांच में सामने आ सकते हैं कई सवालों के जवाब
ED की कार्रवाई के बाद अब जांच का दायरा कथित मिलावटी घी के निर्माण से लेकर उसकी सप्लाई और भुगतान तक बढ़ सकता है। जांच एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित तौर पर तैयार उत्पाद को किस प्रक्रिया के जरिए TTD तक पहुंचाया गया और इससे जुड़े वित्तीय लेनदेन कैसे किए गए। मामले में आगे और लोगों या संस्थाओं की भूमिका सामने आती है या नहीं, यह जांच पूरी होने के बाद स्पष्ट होगा।
तिरुपति लड्डू करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए धार्मिक आस्था से जुड़ा प्रसाद है। ऐसे में घी की गुणवत्ता और उसकी खरीद प्रक्रिया से जुड़े आरोपों ने एक बार फिर खाद्य गुणवत्ता, आपूर्ति व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर ध्यान केंद्रित किया है। फिलहाल ED की जांच जारी है और आरोपों पर अंतिम कानूनी निष्कर्ष संबंधित न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।