तमिलनाडु में किसानों को बड़ी राहत, CM सी. जोसेफ विजय ने खोले मेट्टूर बांध के गेट; कावेरी का पानी 12 जिलों तक पहुंचेगा

तमिलनाडु में किसानों को बड़ी राहत, CM सी. जोसेफ विजय ने खोले मेट्टूर बांध के गेट; कावेरी का पानी 12 जिलों तक पहुंचेगा

 

तमिलनाडु CM सी. जोसेफ विजय ने मेट्टूर बांध के गेट खोलकर कावेरी जल सिंचाई के लिए छोड़ा। करीब 12 जिलों के किसानों को मिलेगा पानी, 1 सितंबर को जलस्तर 91.56 फीट।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने मंगलवार को मेट्टूर स्थित ऐतिहासिक स्टेनली जलाशय के स्लुइस गेट खोलकर कावेरी नदी का पानी सिंचाई के लिए छोड़ा। इस दौरान मुख्यमंत्री के साथ उनके मंत्रिमंडल के सहयोगी एन. आनंद समेत अन्य नेता और अधिकारी मौजूद रहे। बटन दबाकर बांध के गेट खोले जाने के बाद मुख्यमंत्री ने बहते पानी पर फूल अर्पित किए। कावेरी डेल्टा क्षेत्र के किसानों के लिए मेट्टूर बांध को जीवनरेखा माना जाता है और यहां से छोड़ा गया पानी राज्य के कई कृषि प्रधान जिलों में सिंचाई के लिए पहुंचता है। मुख्यमंत्री बनने के बाद विजय का मेट्टूर बांध के गेट खोलना पहली बार बताया जा रहा है। इस अवसर पर उन्होंने किसानों से मुलाकात की और उनके साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं। हरे रंग की शॉल पहने मुख्यमंत्री ने किसानों और कृषि क्षेत्र के प्रति समर्थन का संदेश दिया।

पहली बार मुख्यमंत्री के तौर पर मेट्टूर पहुंचे विजय

मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय विशेष विमान से चेन्नई से रवाना होकर मेट्टूर पहुंचे। इसके बाद उन्होंने सड़क मार्ग से जलाशय परिसर का रुख किया। मेट्टूर पहुंचने से पहले रास्ते में मुख्यमंत्री ने रोड शो भी किया। सड़क के दोनों ओर बड़ी संख्या में लोग उनके स्वागत के लिए मौजूद रहे। विजय ने लोगों का अभिवादन स्वीकार किया और हाथ हिलाकर उनका अभिवादन किया। कई स्थानों पर लोगों ने मुख्यमंत्री पर फूल बरसाकर उनका स्वागत किया।

मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर टीवीके कार्यकर्ताओं में भी खासा उत्साह देखने को मिला। पार्टी कार्यकर्ताओं ने सड़क किनारे झंडे लगाए और प्रमुख चौराहों तथा रास्तों पर स्वागत बैनर और सजावटी झंडियां लगाईं। कई जगहों पर मुख्यमंत्री के काफिले के गुजरने के दौरान लोगों ने फूल बरसाए। मेट्टूर बांध पर पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री ने सिंचाई के लिए कावेरी जल छोड़े जाने के महत्वपूर्ण कार्यक्रम में हिस्सा लिया।

कावेरी डेल्टा के किसानों के लिए अहम फैसला

मेट्टूर बांध से छोड़ा गया पानी तमिलनाडु के कावेरी डेल्टा क्षेत्र के किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। बांध से पानी छोड़े जाने के बाद करीब 45 दिनों की अवधि में यह जल लगभग 12 जिलों तक पहुंचने की उम्मीद है। इनमें तंजावुर समेत कई प्रमुख कृषि जिले शामिल हैं। तंजावुर को तमिलनाडु का ‘राइस बाउल’ यानी धान का कटोरा कहा जाता है और यहां बड़ी संख्या में किसान कावेरी के पानी पर निर्भर रहते हैं।

कावेरी डेल्टा में धान समेत कई फसलों की खेती के लिए सिंचाई जल की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में मेट्टूर बांध से पानी छोड़े जाने को किसानों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है। जल उपलब्ध होने से खेती की गतिविधियों को गति मिलने और कृषि क्षेत्र को समर्थन मिलने की उम्मीद है।

120 फीट की क्षमता वाले बांध में 91.56 फीट पानी

1 सितंबर तक मेट्टूर बांध में जलस्तर 91.56 फीट दर्ज किया गया, जबकि बांध की पूर्ण क्षमता 120 फीट है। यानी जलाशय में पर्याप्त मात्रा में पानी मौजूद है, जिसके आधार पर सिंचाई के लिए पानी छोड़ने की प्रक्रिया शुरू की गई है। हालांकि, इस वर्ष मानसून की स्थिति और जलाशय में कम जल भंडारण के कारण बांध से पानी छोड़ने की प्रक्रिया अपने पारंपरिक समय पर शुरू नहीं हो सकी थी।

आमतौर पर हर साल 12 जून को मेट्टूर बांध के स्लुइस गेट खोलने की परंपरा रही है। लेकिन इस बार कमजोर मानसून और जलाशय में अपेक्षाकृत कम जलस्तर के कारण निर्धारित तारीख पर पानी नहीं छोड़ा गया। अब जल भंडारण में सुधार के बाद सिंचाई के लिए पानी जारी करने का निर्णय लिया गया है।

कमजोर मानसून के कारण टली थी पानी छोड़ने की तारीख

मेट्टूर बांध से कावेरी डेल्टा के लिए पानी छोड़ने की तारीख किसानों के लिए हर साल बेहद महत्वपूर्ण होती है। 12 जून को पानी छोड़े जाने से किसान समय पर कृषि गतिविधियां शुरू कर पाते हैं। लेकिन इस साल मानसून कमजोर रहने और बांध में पर्याप्त पानी नहीं होने के कारण सरकार को पानी छोड़ने का फैसला टालना पड़ा।

पानी की उपलब्धता में सुधार होने के बाद अब सिंचाई के लिए जल जारी किया गया है। इससे डेल्टा क्षेत्र में खेती से जुड़े किसानों को उम्मीद है कि आगामी कृषि गतिविधियों के लिए उन्हें आवश्यक सिंचाई सहायता मिलेगी। हालांकि, आगे की फसल के लिए पानी की उपलब्धता मानसून, जलाशयों में आवक और नदी जल प्रबंधन पर भी निर्भर करेगी।

किसानों से मिले मुख्यमंत्री, कृषि को बताया प्राथमिकता

मेट्टूर बांध परिसर में मुख्यमंत्री विजय ने किसानों के साथ बातचीत की। हरे रंग की शॉल पहनकर किसानों के बीच पहुंचे मुख्यमंत्री ने कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों से संवाद किया और उनके साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं। हरे रंग को किसानों और कृषि का प्रतीक माना जाता है, इसलिए मुख्यमंत्री का यह अंदाज भी किसानों के प्रति समर्थन के संदेश के रूप में देखा गया।

मेट्टूर बांध से कावेरी का पानी छोड़े जाने का कार्यक्रम तमिलनाडु की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। डेल्टा जिलों में बड़ी संख्या में किसान सिंचाई के लिए नदी और जलाशय प्रणाली पर निर्भर हैं। ऐसे में बांध से पानी की उपलब्धता कृषि गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण आधार प्रदान करती है।

करीब 12 जिलों तक पहुंचेगा कावेरी का पानी

बांध से छोड़ा गया पानी लगभग 45 दिनों की अवधि में करीब 12 जिलों तक पहुंचने की बात कही गई है। इनमें कावेरी डेल्टा के प्रमुख कृषि क्षेत्र भी शामिल हैं। पानी के प्रवाह से नहरों के माध्यम से खेतों तक सिंचाई जल पहुंचाया जाएगा। इससे धान सहित अन्य फसलों की खेती करने वाले किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

मेट्टूर बांध लंबे समय से तमिलनाडु की सिंचाई व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। कावेरी जल के प्रबंधन से जुड़ा यह जलाशय राज्य के डेल्टा क्षेत्र के किसानों के लिए विशेष महत्व रखता है। इस बार पानी छोड़ने में हुई देरी के बाद मंगलवार को स्लुइस गेट खुलने से कृषि क्षेत्र में नई उम्मीद जगी है। अब किसानों की नजर जल प्रवाह, मानसून और आने वाले दिनों में जलाशय में होने वाली पानी की आवक पर रहेगी।

 

 

 

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