नेपाल बाढ़ से बाल-बाल बचे तमिलनाडु के 28 कैलाश यात्री, सुरक्षित कोयंबटूर लौटे; 939 लोगों की मौत

नेपाल बाढ़ से बाल-बाल बचे तमिलनाडु के 28 कैलाश यात्री, सुरक्षित कोयंबटूर लौटे; 939 लोगों की मौत

 

नेपाल की भीषण बाढ़ के बीच कैलाश यात्रा पर गए तमिलनाडु के 28 यात्री सुरक्षित कोयंबटूर लौटे। नेपाल में अब तक 939 लोगों की मौत और 3,925 लोग लापता हैं।

नेपाल में आई भीषण बाढ़ और उसके बाद मची तबाही के बीच तमिलनाडु के 28 कैलाश यात्री मंगलवार को सुरक्षित कोयंबटूर एयरपोर्ट लौट आए। ये सभी श्रद्धालु कैलाश यात्रा के लिए नेपाल गए थे और जिस समय नेपाल के कई इलाकों में बाढ़ ने भारी तबाही मचाई, उस दौरान वे भी प्रभावित क्षेत्र के आसपास मौजूद थे। हालांकि, बाढ़ आने से ठीक एक दिन पहले उन्होंने उस इलाके को छोड़ दिया था और अपनी यात्रा आगे जारी रखने के लिए निकल गए। इसी वजह से वे उस भयावह आपदा की चपेट में आने से बच गए। नेपाल में आई इस विनाशकारी बाढ़ में अब तक 939 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है, जबकि हजारों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।

बाढ़ प्रभावित इलाके से एक दिन पहले निकले यात्री

तमिलनाडु के अलग-अलग हिस्सों से नेपाल पहुंचे इन श्रद्धालुओं ने बताया कि वे बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में मौजूद थे, लेकिन बाढ़ आने से एक दिन पहले ही वहां से आगे निकल गए। यात्रियों के अनुसार, उस समय उन्हें बाढ़ की भयावहता का अंदाजा नहीं था। बाद में जब उनके परिवार के सदस्यों ने फोन कर स्थिति के बारे में बताया और उन्होंने मोबाइल फोन पर बाढ़ के वीडियो देखे, तब उन्हें आपदा की गंभीरता का एहसास हुआ।

तिरुपुर की रहने वाली तीर्थयात्री पूंगोडी ने बताया कि उनका समूह 21 अगस्त को सीमा पार कर चुका था। उन्होंने कहा कि उस समय उन्हें बाढ़ के पैमाने की जानकारी नहीं थी। बाद में परिवार के लोगों के फोन आने और मोबाइल पर वीडियो देखने के बाद उन्हें पता चला कि नेपाल में हालात बेहद खराब हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि उनका समूह करीब 800 किलोमीटर दूर था, फिर भी परिवार और यात्रियों के बीच डर का माहौल बना हुआ था।

चीनी सरकार और स्थानीय लोगों का जताया आभार

यात्रियों ने बताया कि चीनी सरकार और यात्रा से जुड़े अधिकारियों ने प्रभावित क्षेत्रों से सुरक्षित निकलने में उनकी मदद की। यात्रियों ने भारत सरकार और तमिलनाडु सरकार का भी आभार जताया। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें लगातार उनके समूह के संपर्क में थीं और उनकी सुरक्षित वापसी के लिए आवश्यक समन्वय कर रही थीं।

यात्रियों ने नेपाल के लोगों और बचाव दलों की भी प्रशंसा की। उनका कहना था कि खुद भारी नुकसान झेलने के बावजूद नेपाल के लोगों ने पर्यटकों और तीर्थयात्रियों की मदद की और उन्हें सुरक्षित निकलने में सहयोग दिया। इस मानवीय सहयोग की यात्रियों ने विशेष रूप से सराहना की।

यात्रा के दौरान दहशत में आए श्रद्धालु

एक अन्य तीर्थयात्री एम. दीपलक्ष्मी ने बताया कि उनके समूह में 13 लोग थे। उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान उनके टूर गाइड ने कठिन परिस्थितियों में उनका मार्गदर्शन किया और घबराहट से बाहर निकलने में मदद की। दीपलक्ष्मी के अनुसार, उनकी टीम के कुछ सदस्य इस घटना से मानसिक रूप से प्रभावित हुए हैं, लेकिन टूर गाइडों ने उन्हें लगातार संभाला और सुरक्षित स्थानों तक पहुंचने में सहायता की।

यात्रियों ने बताया कि नेपाल में बाढ़ के कारण सामान्य यातायात और आवागमन बुरी तरह प्रभावित हुआ। कई सड़कें क्षतिग्रस्त हो गईं और प्रमुख संपर्क मार्गों पर आवाजाही मुश्किल हो गई। इसके बावजूद यात्रा दल ने वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल कर अपनी यात्रा पूरी की और निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार कोयंबटूर पहुंचने में सफल रहा।

सड़कें और फ्रेंडशिप ब्रिज हुए क्षतिग्रस्त

तीर्थयात्री मुरलीधरन ने बताया कि जब वे यात्रा कर रहे थे, तब उन्हें शुरुआत में बाढ़ की गंभीरता के बारे में जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा कि कई सड़कें, इमिग्रेशन कार्यालय और फ्रेंडशिप ब्रिज पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे। ऐसे में यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ा।

मुरलीधरन ने कहा कि नेपाल के लोगों ने अपने परिजनों और संपत्ति को खोने के बावजूद यात्रियों के साथ बेहद अच्छा व्यवहार किया। उन्होंने नेपाली नागरिकों और राहत एवं बचाव दलों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी उन्हें बेहतर आतिथ्य और सहायता मिली।

बस की खिड़की तोड़कर बाढ़ से बचीं वल्लिनायगी

इस बीच तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली की रहने वाली वल्लिनायगी भी नेपाल की बाढ़ से सुरक्षित बचकर अपने घर लौट चुकी हैं। तिल्लई नगर निवासी वल्लिनायगी कैलाश यात्रा के लिए 23 अगस्त को चेन्नई से रवाना हुई थीं। नेपाल में यात्रा के दौरान उन्हें भयावह बाढ़ का सामना करना पड़ा।

वल्लिनायगी ने बताया कि नेपाल के जियावुसी नामक स्थान से चीनी दूतावास की ओर वाहन से जाते समय उनका वाहन भारी ट्रैफिक में फंस गया। चारों तरफ अंधेरा था और शुरुआत में उन्हें समझ नहीं आया कि आखिर क्या हो रहा है। बाद में उन्हें एहसास हुआ कि वे अचानक आई भीषण बाढ़ के बीच फंस चुके हैं।

स्थिति गंभीर होने पर यात्रियों ने बस की खिड़की तोड़ी और बाहर निकलकर अपनी जान बचाई। इस घटना के बाद वल्लिनायगी जब सुरक्षित घर पहुंचीं तो परिवार के सदस्यों ने भावुक होकर उनका स्वागत किया। परिजनों ने आंसुओं के साथ उन्हें गले लगाया और घर पर आरती उतारकर स्वागत किया। इसके बाद वल्लिनायगी ने परिवार के मंदिर में पूजा-अर्चना की और अपने परिजनों के साथ समय बिताया।

नेपाल में 939 लोगों की मौत, हजारों अब भी लापता

नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान किया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बाढ़ और उससे जुड़ी घटनाओं में 939 लोगों की मौत हो चुकी है। नेपाल की राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के अनुसार 3,925 लोग अब भी लापता हैं, जिनमें 592 विदेशी नागरिक शामिल हैं। राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है और बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित निकाला गया है।

भारत सरकार भी नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए लगातार प्रयास कर रही है। विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार सोमवार तक 158 भारतीय नागरिकों को नेपाल से सुरक्षित निकाला जा चुका था। तमिलनाडु के 28 कैलाश यात्रियों की सुरक्षित वापसी भी इसी राहत एवं समन्वित प्रयास का हिस्सा है।

नेपाल की इस भीषण प्राकृतिक आपदा ने एक बार फिर दिखाया है कि आपदा के समय त्वरित सरकारी समन्वय, स्थानीय लोगों का सहयोग और राहत एवं बचाव दलों की सक्रियता कितनी महत्वपूर्ण होती है। तमिलनाडु लौटे तीर्थयात्रियों ने इस कठिन दौर में भारत और तमिलनाडु सरकार के साथ-साथ नेपाल के लोगों, चीनी अधिकारियों और यात्रा गाइडों के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया है।

 

 

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