नेपाल में बाढ़ का कहर: चिलिमे हाइड्रोपावर टनल में मजदूरों के फंसे होने की आशंका, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

नेपाल में बाढ़ का कहर: चिलिमे हाइड्रोपावर टनल में मजदूरों के फंसे होने की आशंका, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

 

नेपाल के रसुवा जिले में विनाशकारी बाढ़ के बाद चिलिमे हाइड्रोपावर टनल में कई मजदूरों के फंसे होने की आशंका है। रेस्क्यू टीम ने अभियान शुरू कर दिया है।

नेपाल में भारी बारिश और अचानक आई विनाशकारी बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। देश के कई इलाकों में बाढ़ और भूस्खलन के कारण जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इसी बीच रसुवा जिले के स्याब्रुबेसी गांव के पास स्थित चिलिमे हाइड्रोपावर टनल में कई लोगों के फंसे होने की आशंका के बाद बड़े स्तर पर बचाव अभियान शुरू किया गया है। बाढ़ का पानी हाइड्रोपावर सुरंग के भीतर घुस गया है और सुरंग का कुछ हिस्सा भी क्षतिग्रस्त बताया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि सुरंग के अंदर कुल कितने लोग फंसे हैं।

चिलिमे हाइड्रोपावर टनल में रेस्क्यू ऑपरेशन

नेपाल पुलिस के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल डी. रेग्मी के अनुसार, मंगलवार सुबह करीब 7 बजे से बचाव अभियान शुरू किया गया। उन्होंने बताया कि चिलिमे हाइड्रोपावर टनल के अंदर कई इमारतें मौजूद हैं और हाइड्रोपावर परियोजना होने के कारण यहां काम के दौरान बड़ी संख्या में कर्मचारी मौजूद रहते हैं। बाढ़ के पानी के सुरंग में प्रवेश करने के कारण स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।

रेग्मी ने बताया कि बचाव दल हेलीकॉप्टर के जरिए घटनास्थल तक पहुंचा और इसके बाद सुरंग में प्रवेश करने की प्रक्रिया शुरू की गई। बचावकर्मी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि सुरंग के अंदर कितने लोग मौजूद थे और उनमें से कितने लोग अभी भी फंसे हुए हैं। क्षतिग्रस्त सुरंग और भीतर भरे बाढ़ के पानी के कारण राहत एवं बचाव दल को मुश्किल परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है।

भोटेकोशी नदी में उफान से आई तबाही

चिलिमे हाइड्रोपावर टनल के आसपास का इलाका भोटेकोशी नदी के किनारे स्थित है। यह नदी तिब्बत से नेपाल में प्रवेश करती है और क्षेत्र में आई अचानक बाढ़ का प्रमुख कारण बनी। भोटेकोशी नदी के जलस्तर में तेज वृद्धि के कारण आसपास के इलाकों में पानी फैल गया और कई महत्वपूर्ण रास्ते बंद हो गए।

घटनास्थल से करीब 14 किलोमीटर की दूरी पर तिब्बत-चीन सीमा चौकी स्थित है। सीमा क्षेत्र के आगे आम लोगों और राहत दलों की आवाजाही संभव नहीं है, जिससे प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचना और राहत कार्य चलाना चुनौतीपूर्ण हो गया है।

स्थानीय लोगों ने बताई भयावह स्थिति

एक स्थानीय निवासी ने बताया कि भारी बारिश के कारण क्षेत्र की ओर जाने वाले कई रास्ते बंद हो चुके हैं और वहां पहुंचना बेहद मुश्किल हो गया है। स्थानीय स्तर पर यह जानकारी सामने आई है कि सुरंग के भीतर लगभग 25 से 30 लोग मौजूद हो सकते हैं। हालांकि, अधिकारियों ने अभी सुरंग में फंसे लोगों की निश्चित संख्या की पुष्टि नहीं की है।

रेस्क्यू टीम सुरंग के भीतर जाकर स्थिति का आकलन कर रही है। अधिकारियों का मुख्य उद्देश्य पहले यह पता लगाना है कि अंदर कितने लोग मौजूद हैं और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने के लिए किन संसाधनों की आवश्यकता होगी।

नुवाकोट में भी सेना का राहत अभियान जारी

रसुवा के अलावा नेपाल के नुवाकोट जिले के बिदुर क्षेत्र में भी राहत और बचाव अभियान जारी है। नेपाली सेना प्रभावित इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुटी हुई है। बाढ़ के कारण त्रिशूली क्षेत्र में कई दुकानों और अन्य प्रतिष्ठानों को भारी नुकसान पहुंचा है।

भोटेकोशी और त्रिशूली नदी प्रणालियों में आई बाढ़ ने नदी किनारे बसे कई इलाकों को प्रभावित किया है। रसुवा और नुवाकोट को नेपाल के सबसे गंभीर रूप से प्रभावित जिलों में शामिल किया गया है। बाढ़ के कारण सड़क संपर्क बाधित होने से राहत सामग्री और बचाव दलों की आवाजाही भी प्रभावित हुई है।

हजारों लोग लापता, बड़े पैमाने पर राहत अभियान

नेपाल की राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के अनुसार, देश में आपदा के बाद हजारों लोग अब भी लापता हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार कुल 3,925 लोग लापता बताए गए हैं, जिनमें 592 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। अब तक 11,379 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।

अलग-अलग जिलों में बड़ी संख्या में शव बरामद किए गए हैं। चितवन से 279, नवलपरासी ईस्ट से 216, नवलपरासी वेस्ट से 168, गोरखा से 65, धादिंग से 55, तनहूं से 38 और रसुवा से 23 शव बरामद होने की जानकारी दी गई है। लगातार जारी राहत एवं बचाव अभियान के बीच मृतकों और लापता लोगों की संख्या में बदलाव की संभावना बनी हुई है।

21 अस्पतालों में रखे गए अज्ञात शव

आपदा की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि नेपालभर के 21 अस्पतालों में बड़ी संख्या में अज्ञात शव रखे गए हैं। अधिकारी इन शवों की पहचान करने की प्रक्रिया में जुटे हुए हैं। पहचान पूरी होने के बाद शवों को उनके परिजनों को सौंपने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने के कारण प्रशासन के सामने शवों की पहचान करना भी एक बड़ी चुनौती बन गया है। राहत एजेंसियां और स्थानीय प्रशासन प्रभावित परिवारों से जानकारी जुटाने के साथ पहचान प्रक्रिया को तेज करने का प्रयास कर रहे हैं।

158 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया

नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों के लिए भी राहत अभियान चलाया गया है। भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने सोमवार को जानकारी दी कि अब तक 158 भारतीय नागरिकों को नेपाल से सुरक्षित निकाला जा चुका है। दोनों देशों के अधिकारी प्रभावित क्षेत्रों में फंसे भारतीय नागरिकों की जानकारी जुटाने और उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए समन्वय कर रहे हैं।

फिलहाल रसुवा जिले की चिलिमे हाइड्रोपावर टनल में चल रहा बचाव अभियान सबसे महत्वपूर्ण अभियानों में से एक बना हुआ है। सुरंग में फंसे लोगों की सही संख्या की पुष्टि होने और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने तक रेस्क्यू टीम लगातार अभियान जारी रखे हुए है। भारी बारिश, क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे और बाधित सड़कों के बावजूद नेपाली सुरक्षा बल और राहत दल प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को बचाने के लिए जुटे हुए हैं।

 

 

 

 

 

 

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