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पूर्व क्रिकेटर एस. श्रीसंत ने 2013 के स्पॉट-फिक्सिंग विवाद के दौरान पत्नी भुवनेश्वरी के समर्थन के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी ने उन्हें मुश्किल दौर में बिखरने से बचाया।
भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व तेज गेंदबाज एस. श्रीसंत, जो कभी अपनी आक्रामक गेंदबाजी और जोश के लिए जाने जाते थे, ने हाल ही में अपने जीवन के सबसे विवादित और कठिन दौर पर खुलकर बात की है। 2013 के आईपीएल स्पॉट-फिक्सिंग कांड ने न केवल उनके करियर को एक गहरा धक्का दिया, बल्कि उन्हें जेल की सलाखों के पीछे भी पहुँचा दिया था। अब वर्षों बाद, श्रीसंत ने स्वीकार किया है कि उस भयावह दौर में यदि उनकी पत्नी भुवनेश्वरी का साथ नहीं होता, तो वे शायद टूट चुके होते।
जेल की सलाखों के पीछे: ‘खुदकुशी न करने की वजह’
‘लल्लनटॉप’ को दिए एक भावुक साक्षात्कार में श्रीसंत ने बताया कि जब वे 2013 में स्पॉट-फिक्सिंग के आरोपों के बाद जेल में थे, तब उनका मानसिक संतुलन डगमगा गया था। उन्होंने कहा, “जब मैं जेल में था, तो मेरे द्वारा खुद को खत्म न करने के पीछे मुख्य कारणों में से एक वह (भुवनेश्वरी) थी। मैंने 2010 में ही उससे वादा किया था कि अगर हम 2011 का विश्व कप जीत गए, तो मैं उससे शादी करूँगा।”
श्रीसंत के लिए वह समय किसी बुरे सपने से कम नहीं था, जहाँ क्रिकेट का मैदान, प्रशंसकों का प्यार और करियर सब कुछ एक झटके में दांव पर लग गया था। ऐसी स्थिति में पत्नी का अटूट भरोसा और वादा उन्हें जीवन जीने की हिम्मत देता रहा।
कठिन परिस्थितियों में भी परिवार का मिला साथ
श्रीसंत ने उस दौर को याद करते हुए बताया कि कैसे उनके और भुवनेश्वरी के बीच का रिश्ता समय के साथ गहरा हुआ। उनकी पहली मुलाकात स्कूल के दिनों में हुई थी। इसके बाद 2012 में श्रीसंत के पैर की सर्जरी हुई और वे व्हीलचेयर तक सीमित हो गए थे। उस समय डॉक्टरों ने उन्हें यह तक कह दिया था कि सर्जरी के दौरान तंत्रिका (nerve) खराब होने के कारण उनके लकवाग्रस्त होने की 17 प्रतिशत संभावना है।
श्रीसंत ने बताया, “मैंने उनकी मां से कहा था कि मैं अभी शादी नहीं कर सकता क्योंकि मुझे नहीं पता कि मैं दोबारा कभी क्रिकेट खेल पाऊंगा या नहीं।” लेकिन इन तमाम अनिश्चितताओं और 2013 के स्पॉट-फिक्सिंग कांड के बावजूद, भुवनेश्वरी और उनके परिवार ने अपना समर्थन जारी रखा। श्रीसंत ने कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि वे उनकी पत्नी का परिवार ही था, जिसने उन कठिन परिस्थितियों में भी शादी के निर्णय को नहीं बदला। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “वह (भुवनेश्वरी) उन प्रमुख कारणों में से एक है कि मुझे जमानत मिल पाई।”
क्रिकेट करियर और वापसी की जद्दोजहद
2007 के टी20 विश्व कप और 2011 के वनडे विश्व कप की विजेता भारतीय टीम का अहम हिस्सा रहे श्रीसंत के लिए जीवन का वह दौर किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं था। बीसीसीआई द्वारा आजीवन प्रतिबंध लगाने के बाद उन्होंने लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी, जिसे बाद में हटा दिया गया। 2022 में संन्यास लेने तक, उन्होंने वापसी के लिए हर संभव कोशिश की।
आज जब श्रीसंत पीछे मुड़कर देखते हैं, तो उन्हें एहसास होता है कि क्रिकेट के उतार-चढ़ाव से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण वह निजी सहारा था जो उन्हें घर से मिला। उनकी पत्नी भुवनेश्वरी का सहयोग न केवल एक पारिवारिक प्रतिबद्धता थी, बल्कि एक ऐसी ढाल थी जिसने उन्हें टूटने से बचाए रखा।
एक अटूट रिश्ते की मिसाल
श्रीसंत का यह खुलासा बताता है कि एक सार्वजनिक व्यक्ति (Public Figure) के जीवन में जब सब कुछ बिखर जाता है, तब केवल वही लोग साथ खड़े रहते हैं जो उनकी सफलता नहीं, बल्कि उनकी इंसानियत से प्यार करते हैं। श्रीसंत और भुवनेश्वरी की कहानी यह साबित करती है कि कठिन से कठिन समय में भी यदि जीवनसाथी का साथ हो, तो व्यक्ति मौत के खयालों से निकलकर फिर से खड़ा हो सकता है। यह महज एक क्रिकेटर की कहानी नहीं है, बल्कि उस धैर्य और प्रेम की कहानी है जिसने एक व्यक्ति को जीवन के सबसे बड़े विवादों में भी हारने नहीं दिया।