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जम्मू-कश्मीर के राजौरी में ‘ऑपरेशन शेरवाली’ जारी। 32वें दिन भी सुरक्षा बलों का जंगलों में सघन तलाशी अभियान।
जम्मू-कश्मीर का राजौरी जिला, जो अपनी भौगोलिक चुनौतियों और संवेदनशील सीमावर्ती स्थिति के लिए जाना जाता है, इन दिनों एक अत्यंत महत्वपूर्ण और दीर्घकालिक आतंकवाद विरोधी अभियान का केंद्र बना हुआ है। ‘ऑपरेशन शेरवाली’ के नाम से चल रहा यह व्यापक तलाशी और घेराबंदी अभियान सोमवार को अपने 32वें दिन में प्रवेश कर गया है। डोरिमल-गंभीर मुगलान के घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ी इलाकों में सुरक्षा बलों की कड़ी चौकसी जारी है, जिसका एकमात्र उद्देश्य क्षेत्र में छिपे आतंकवादियों को खोजना और उन्हें बेअसर करना है।
ऑपरेशन का उद्देश्य और चुनौतियां
मई के अंत में शुरू हुआ ‘ऑपरेशन शेरवाली’ जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियों के समन्वय और दृढ़ संकल्प का एक अनूठा उदाहरण है। राजौरी का डोरिमल-गंभीर मुगलान सेक्टर अपनी गहरी घाटियों, घने जंगलों और ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी रास्तों के लिए जाना जाता है। ऐसे चुनौतीपूर्ण वातावरण में आतंकवादियों को ढूंढना और उन्हें घेरना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे क्षेत्र में लगातार निगरानी कर रही हैं ताकि संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा सके और स्थानीय निवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
अधिकारियों के अनुसार, ऑपरेशन पूरी तरह से योजना के अनुरूप आगे बढ़ रहा है। सेना, अर्धसैनिक बलों और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीमें पूरे इलाके में अपनी मौजूदगी बनाए हुए हैं। अतिरिक्त सुरक्षा चौकियां स्थापित की गई हैं और ‘एरिया डोमिनेशन’ के लिए नियमित गश्त की जा रही है। सुरक्षा बलों का स्पष्ट संदेश है कि शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए वे हर संभव प्रयास कर रहे हैं और किसी भी घुसपैठिए को सुरक्षित पनाहगाह नहीं मिलने दी जाएगी।
सुरक्षा बलों का अटूट संकल्प
32 दिनों तक लगातार चला आ रहा यह अभियान राजौरी जैसे सीमावर्ती जिले में सुरक्षा की गंभीरता को दर्शाता है। यह ऑपरेशन केवल आतंकवादियों का खात्मा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र में दहशत फैलाने की किसी भी कोशिश को नाकाम करने का एक बड़ा संदेश भी है। घने जंगलों में छिपे आतंकवादियों को ट्रैक करना एक थका देने वाला और जोखिम भरा काम है, फिर भी सुरक्षा बल अपने कर्तव्य के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
अधिकारियों ने स्थानीय जनता से भी अपील की है कि वे सतर्क रहें और सुरक्षा एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग करें। किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि की सूचना तुरंत साझा करना न केवल सुरक्षा बलों की मदद करता है, बल्कि पूरे समाज की सुरक्षा के लिए आवश्यक है। यह आपसी विश्वास ही है जो दुर्गम इलाकों में भी आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को प्रभावी बनाता है।
सीमाओं पर चुनौतियां: हालिया घटना
आतंकवाद विरोधी अभियानों के दौरान सुरक्षा बलों को न केवल बाहरी दुश्मनों से, बल्कि क्षेत्र की भौगोलिक और अनपेक्षित चुनौतियों से भी जूझना पड़ता है। हाल ही में, 16 जून को नौशेरा सेक्टर के फॉरवर्ड कलाल इलाके में एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना सामने आई। नियंत्रण रेखा (LoC) के पास नियमित गश्त के दौरान, 4 कुमाऊं रेजिमेंट के जवान एक माइन विस्फोट की चपेट में आ गए। इस हादसे में एक जूनियर कमीशंड ऑफिसर (JCO) और तीन सैनिक घायल हो गए।
घटना की जानकारी मिलते ही तत्काल बचाव कार्य शुरू किया गया और घायल जवानों को मौके से निकालकर प्राथमिक उपचार प्रदान किया गया। बेहतर इलाज के लिए उन्हें उधमपुर स्थित सेना के कमांड अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया। यह घटना बताती है कि हमारे सुरक्षा बल कितनी विपरीत परिस्थितियों और कठिन भू-भाग में रहकर देश की रक्षा का भार उठा रहे हैं।
सुरक्षा और सतर्कता का मेल
‘ऑपरेशन शेरवाली’ की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि सुरक्षा बल अपनी निगरानी और सतर्कता को कितने लंबे समय तक बनाए रख पाते हैं। राजौरी का इलाका रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है, और यहाँ की शांति बनाए रखना भारत की सुरक्षा नीति का एक अनिवार्य हिस्सा है। 32 दिनों तक चले इस गहन अभियान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सुरक्षा बलों की नजर से कोई भी गलत गतिविधि बच नहीं सकती।
जैसे-जैसे ऑपरेशन आगे बढ़ रहा है, सुरक्षा बल और अधिक सतर्क होते जा रहे हैं। उनका लक्ष्य न केवल क्षेत्र को साफ करना है, बल्कि भविष्य के खतरों को भी जड़ से मिटाना है। आम नागरिकों का सहयोग और सुरक्षा बलों का अटूट धैर्य—यही वह संगम है जो आतंकवाद के मंसूबों को पस्त करने के लिए आवश्यक है। यह अभियान आने वाले समय में सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए एक मॉडल के रूप में देखा जाएगा, जहाँ दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद शांति की स्थापना ही एकमात्र लक्ष्य है।