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जैकब जुमा और अजय गुप्ता के साथ भारत में नजर आने के बाद दक्षिण अफ्रीका ने हाई कमिश्नर अनिल सूकलाल को प्रिटोरिया वापस बुलाया। जानें क्या है पूरा विवाद।
दक्षिण अफ्रीका ने भारत में अपने हाई कमिश्नर अनिल सूकलाल को वापस प्रिटोरिया बुला लिया है। उन्हें आगे की सलाह-मशविरा यानी ‘फर्दर कंसल्टेशन’ के लिए वापस बुलाया गया है। यह कदम पूर्व राष्ट्रपति जैकब जुमा और विवादित कारोबारी अजय गुप्ता की भारत यात्रा के दौरान सूकलाल की मौजूदगी को लेकर उठे सवालों के बाद आया है। दक्षिण अफ्रीका के अंतरराष्ट्रीय संबंध एवं सहयोग मंत्री रोनाल्ड लामोला ने इस फैसले की पुष्टि की है। रिपोर्टों के मुताबिक, सरकार अब विदेश यात्राओं के दौरान पूर्व राष्ट्रपतियों को दिए जाने वाले आधिकारिक राजनयिक सहयोग और प्रोटोकॉल की समीक्षा भी कर रही है।
जुमा की भारत यात्रा के दौरान सामने आई तस्वीरों से बढ़ा विवाद
यह पूरा मामला उस समय चर्चा में आया जब पूर्व दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति जैकब जुमा की भारत यात्रा के दौरान उनकी कुछ तस्वीरें सामने आईं। तस्वीरों में दक्षिण अफ्रीका के भारत में हाई कमिश्नर अनिल सूकलाल को जुमा और अजय गुप्ता के साथ देखा गया। रिपोर्टों के अनुसार, ये लोग भारत में एक धार्मिक कार्यक्रम में भी साथ नजर आए थे। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका में यह सवाल उठने लगा कि एक मौजूदा राजनयिक ने पूर्व राष्ट्रपति और अजय गुप्ता के साथ किस हैसियत से संपर्क किया और क्या इसके लिए उन्हें सरकार की ओर से आधिकारिक निर्देश दिए गए थे।
इस मामले ने दक्षिण अफ्रीका की घरेलू राजनीति में भी बहस छेड़ दी। विपक्षी डेमोक्रेटिक अलायंस ने पहले ही मामले की जांच की मांग की थी और यह सवाल उठाया था कि क्या सूकलाल को जुमा और गुप्ता से मिलने के लिए विदेश मंत्रालय से लिखित निर्देश मिले थे। कुछ संसदीय चर्चाओं में यह दावा भी सामने आया कि सूकलाल को विभाग की ओर से निर्देश दिए गए थे, जिससे पूरे मामले की स्थिति और अधिक जटिल हो गई।
रोनाल्ड लामोला ने की हाई कमिश्नर को वापस बुलाने की पुष्टि
दक्षिण अफ्रीका के अंतरराष्ट्रीय संबंध एवं सहयोग मंत्री रोनाल्ड लामोला ने अनिल सूकलाल को वापस बुलाने की पुष्टि की। सरकार का कहना है कि हाई कमिश्नर को मुख्यालय वापस बुलाकर मामले पर आगे विचार-विमर्श किया जाएगा। यह कदम फिलहाल राजनयिक पद से स्थायी हटाए जाने के बजाय परामर्श और समीक्षा की प्रक्रिया के तौर पर सामने आया है।
लामोला के अनुसार, सरकार इस बात पर भी विचार कर रही है कि पूर्व राष्ट्रपतियों की विदेश यात्राओं के दौरान सरकारी और राजनयिक प्रतिनिधियों को किस तरह की भूमिका निभानी चाहिए। सरकार का मानना है कि विदेश नीति से जुड़े आधिकारिक प्रोटोकॉल को स्पष्ट करने की जरूरत है, ताकि पूर्व राष्ट्रपतियों की निजी या राजनीतिक गतिविधियों और मौजूदा सरकार की आधिकारिक विदेश नीति के बीच स्पष्ट अंतर बना रहे।
अजय गुप्ता का नाम दक्षिण अफ्रीका के ‘स्टेट कैप्चर’ विवाद से जुड़ा
इस पूरे विवाद में अजय गुप्ता का नाम सबसे महत्वपूर्ण कारणों में से एक है। गुप्ता परिवार दक्षिण अफ्रीका में पूर्व राष्ट्रपति जैकब जुमा के शासनकाल के दौरान कथित ‘स्टेट कैप्चर’ विवाद से जुड़ा रहा है। दक्षिण अफ्रीका में स्टेट कैप्चर से जुड़े आरोपों में राजनीतिक प्रभाव और कारोबारी हितों के बीच संबंधों को लेकर लंबे समय तक जांच और राजनीतिक बहस होती रही है।
जुमा के शासनकाल के दौरान गुप्ता परिवार के प्रभाव को लेकर दक्षिण अफ्रीका में गंभीर आरोप लगे थे। हालांकि अलग-अलग मामलों में आरोप और कानूनी स्थिति अलग-अलग रही है, लेकिन गुप्ता परिवार का नाम दक्षिण अफ्रीका की राजनीति में बेहद विवादित रहा है। ऐसे में एक पूर्व राष्ट्रपति के साथ अजय गुप्ता की भारत में मौजूदगी और उस दौरान दक्षिण अफ्रीकी हाई कमिश्नर की तस्वीरें सामने आने के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया।
क्या मौजूदा सरकार की विदेश नीति पर उठे सवाल?
इस मामले ने दक्षिण अफ्रीका की विदेश नीति और पूर्व राष्ट्रपतियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए हैं। अंतरराष्ट्रीय संबंध मंत्री लामोला ने पहले चिंता जताई थी कि कोई पूर्व राष्ट्रपति मौजूदा सरकार की विदेश नीति के समानांतर अपनी गतिविधियां संचालित न करे। सरकार के लिए यह महत्वपूर्ण है कि विदेशों में दक्षिण अफ्रीका का आधिकारिक प्रतिनिधित्व एक स्पष्ट और एकीकृत नीति के तहत हो।
पूर्व राष्ट्रपति होने के बावजूद जैकब जुमा दक्षिण अफ्रीकी राजनीति में सक्रिय हैं और वर्तमान में एमके पार्टी से जुड़े हुए हैं। ऐसे में उनकी विदेश यात्राएं केवल निजी यात्राएं न रहकर राजनीतिक और कूटनीतिक नजरिए से भी चर्चा का विषय बन जाती हैं।
भारत-दक्षिण अफ्रीका संबंधों पर क्या असर पड़ेगा?
अनिल सूकलाल को वापस बुलाए जाने की घटना भारत और दक्षिण अफ्रीका के द्विपक्षीय संबंधों से सीधे तौर पर जुड़ा कदम नहीं बताया गया है। फिलहाल यह मामला दक्षिण अफ्रीका के आंतरिक राजनयिक प्रोटोकॉल और उसके पूर्व राष्ट्रपति से संबंधित है। भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच व्यापार, निवेश, कूटनीति और बहुपक्षीय मंचों पर लंबे समय से सहयोग रहा है।
इसलिए माना जा रहा है कि हाई कमिश्नर को परामर्श के लिए वापस बुलाने का उद्देश्य इस विशेष विवाद की समीक्षा करना और भविष्य के लिए राजनयिक प्रोटोकॉल को स्पष्ट करना है। सरकार की समीक्षा के बाद यह साफ हो सकता है कि पूर्व राष्ट्रपतियों की विदेश यात्राओं में दक्षिण अफ्रीकी राजनयिक मिशनों की भूमिका किस सीमा तक होगी।
अब आगे क्या होगा?
अनिल सूकलाल के प्रिटोरिया लौटने के बाद दक्षिण अफ्रीकी सरकार मामले के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा करेगी। इसमें यह देखा जा सकता है कि जुमा और गुप्ता की भारत यात्रा के दौरान हाई कमिश्नर की भूमिका क्या थी, उन्हें किस स्तर पर निर्देश दिए गए थे और भविष्य में पूर्व राष्ट्रपतियों की विदेश यात्राओं के लिए किस तरह के नियम लागू किए जाएं।
फिलहाल यह घटनाक्रम दक्षिण अफ्रीका में राजनीतिक और कूटनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन गया है। हाई कमिश्नर की वापसी को सरकार की ओर से मामले को गंभीरता से लेने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में जांच और सरकारी समीक्षा के आधार पर इस विवाद से जुड़े और तथ्य सामने आने की संभावना है।