जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर। सरकार से तुरंत इलाज और बातचीत शुरू करने की मांग।
लद्दाख के प्रसिद्ध पर्यावरण और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) का दरवाजा खटखटाया गया है। सोनम वांगचुक सार्वजनिक मांगों के समर्थन में 28 जून से जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। उनकी तेजी से गिरती सेहत और जान के खतरे को देखते हुए, अदालत से केंद्र और दिल्ली सरकार को तत्काल चिकित्सा उपचार और जीवन रक्षक हस्तक्षेप प्रदान करने का निर्देश देने की मांग करते हुए एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। याचिकाकर्ता ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इस पर तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया है।
स्वास्थ्य में भारी गिरावट और जान का गंभीर खतरा
यह जनहित याचिका अधिवक्ता राकेश कुमार सैनी द्वारा दायर की गई है। याचिका में 14 जुलाई की मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए बताया गया है कि भूख हड़ताल के दौरान सोनम वांगचुक का वजन लगभग 8.25 किलोग्राम कम हो गया है। वह लगातार लो ब्लड शुगर (कम शर्करा), चक्कर आने, गंभीर मांसपेशियों के नुकसान (मसल लॉस) और अत्यधिक कमजोरी से जूझ रहे हैं। याचिका में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यदि उनकी भूख हड़ताल इसी तरह जारी रही, तो उनके जीवन को अपूरणीय क्षति पहुंच सकती है और उनकी जान को गंभीर खतरा हो सकता है।
सरकार की संवेदनहीनता और संवाद की कमी
याचिकाकर्ता का तर्क है कि वांगचुक एक जन कार्यकर्ता हैं जो लद्दाख के लोगों की महत्वपूर्ण मांगों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से विरोध कर रहे हैं। इतने दिनों से चल रहे इस शांतिपूर्ण आंदोलन और भूख हड़ताल के बावजूद, प्रशासन या सरकार की ओर से अभी तक कोई सार्थक बातचीत या संवाद शुरू नहीं किया गया है। याचिका में कहा गया है कि हालांकि शांतिपूर्ण विरोध और भूख हड़ताल करना एक लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन राज्य (सरकार) का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह हर नागरिक के जीवन और स्वास्थ्य की रक्षा करे। एक नागरिक के स्वास्थ्य को इस तरह बिना किसी हस्तक्षेप के बिगड़ने देना सरकार के संवैधानिक और सार्वजनिक कर्तव्यों की विफलता माना जाएगा।
याचिका में की गई मुख्य मांगें
अधिवक्ता राकेश कुमार सैनी ने हाईकोर्ट से अधिकारियों को निम्नलिखित कड़े निर्देश देने की अपील की है:
- सोनम वांगचुक को तुरंत उचित और उच्च स्तरीय चिकित्सा देखभाल प्रदान की जाए।
- उनके स्वास्थ्य को और अधिक बिगड़ने से रोकने के लिए, यदि आवश्यक हो, तो उन्हें आवश्यक तरल पोषण, प्रोटीन, विटामिन और अन्य जीवन रक्षक चिकित्सा सहायता दी जाए।
- सरकार तुरंत उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों पर उनके साथ आधिकारिक बातचीत या संवाद की प्रक्रिया शुरू करे।
याचिका में ‘भारतीय न्याय संहिता’ (BNS) के तहत आत्महत्या के उकसावे से जुड़े प्रावधानों का भी संदर्भ दिया गया है, जिसमें यह तर्क दिया गया है कि जब किसी व्यक्ति का जीवन इतने बड़े खतरे में हो, तो प्रशासन मूकदर्शक बनकर नहीं बैठ सकता।
वकीलों की हड़ताल के कारण सुनवाई पर संशय
हालाँकि इस मामले में तत्काल सुनवाई की मांग की गई है, लेकिन आज इस पर सुनवाई होगी या नहीं, इसे लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। इसका कारण यह है कि दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (DHCBA) ने जिला अदालतों के आर्थिक अधिकार क्षेत्र (Pecuniary Jurisdiction) को 2 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये करने के प्रस्ताव के विरोध में 15 जुलाई को काम से दूर रहने (हड़ताल) का आह्वान किया है। एसोसिएशन ने अपने सभी सदस्यों से अनुरोध किया है कि वे भौतिक (Physical) या आभासी (Virtual) किसी भी माध्यम से अदालत के समक्ष पेश न हों। बार रूम, कैफेटेरिया और अन्य सुविधाएं भी बंद रखी गई हैं, जिससे इस महत्वपूर्ण जनहित याचिका की सुनवाई में देरी होने की संभावना है।