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सिक्किम के नामची में NHPC तीस्ता प्रोजेक्ट की निर्माणाधीन सुरंग ढहने से 8 श्रमिकों की मौत हो गई। लैंडस्लाइड के बाद टनल में जहरीली गैस के रिसाव से बचाव कार्य में दिक्कतें आ रही हैं। PM मोदी ने स्थिति का जायजा लिया।
सिक्किम के नामची जिले में सोमवार को एक दर्दनाक हादसा सामने आया, जब एनएचपीसी (NHPC) तीस्ता चरण VI जलविद्युत परियोजना की एक निर्माणाधीन सुरंग (Tunnel) अचानक ढह गई। सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने मंगलवार को इस दुखद घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि इस हादसे में अब तक 8 श्रमिकों की जान जा चुकी है। यह हादसा झोलुंगे स्थित समरडंग में भूस्खलन (Landslide) के बाद सुरंग का प्रवेश द्वार अचानक धंस जाने के कारण हुआ। भूस्खलन के मलबे ने सुरंग के मुहाने को पूरी तरह से बंद कर दिया, जिससे अंदर काम कर रहे मजदूर वहीं फंस गए। इस आपदा ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्रों में जारी बड़े निर्माण कार्यों की सुरक्षा और पर्यावरणीय चुनौतियों को उजागर कर दिया है।
भूस्खलन के बाद सुरंग में जहरीली गैस का रिसाव: बचाव कार्य में बढ़ा संकट
घटना के समय लगभग 27 मजदूर निर्माणाधीन सुरंग के भीतर काम कर रहे थे। सोमवार दोपहर को जैसे ही अचानक लैंडस्लाइड हुआ, भारी-भरकम पत्थरों और मलबे ने सुरंग के मुहाने को बंद कर दिया। इस आपदा के तुरंत बाद अंदर संदिग्ध जहरीली या दमघोंटू गैस का रिसाव शुरू हो गया, जिसने बचाव अभियान (Rescue Operation) को बेहद जटिल और खतरनाक बना दिया है।
अधिकारियों के अनुसार, जब राष्ट्रीय और राज्य आपदा अनुक्रिया बल (NDRF और SDRF) तथा तकनीकी टीमें फंसे हुए श्रमिकों तक पहुँचने का प्रयास कर रही थीं, तब गैस के तेज़ संपर्क में आने के कारण कई बचावकर्मी अचानक चक्कर आने से अचेत और बेहोश हो गए। विशेषज्ञों का प्राथमिक अनुमान है कि यह गैस भूस्खलन के कारण चट्टानों की अंदरूनी परतों और भूमिगत संरचनाओं (Rock Formations) में हुए तीव्र हलचल से स्वतः उत्सर्जित (Naturally Emanating Gas) हुई है। गैस की उपस्थिति के कारण ऑक्सीजन मास्क और विशेष सुरक्षा उपकरणों के बिना सुरंग के भीतर प्रवेश करना बचाव दलों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री से की बात: केंद्र से हरसंभव मदद का आश्वासन
इस भीषण हादसे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग से फोन पर बात कर स्थिति का जायजा लिया। पीएम मोदी ने दुर्घटना के कारणों, फंसे हुए श्रमिकों की वर्तमान स्थिति और चलाए जा रहे राहत एवं बचाव कार्यों की विस्तृत जानकारी ली।
मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर जानकारी साझा करते हुए कहा:
“एनएचपीसी तीस्ता स्टेज VI जलविद्युत परियोजना के समरडंग, झोलुंगे में हुए दुखद हादसे के बाद माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुझसे बात की और बचाव कार्यों की स्थिति जानी। प्रभावित श्रमिकों और उनके परिवारों के प्रति उनकी संवेदनाएँ तथा भारत सरकार की ओर से हरसंभव सहायता का आश्वासन इस कठिन घड़ी में सिक्किम के लोगों को असीम शक्ति और भरोसा देता है।”
केंद्र सरकार की ओर से उन्नत बचाव दल, विशेषज्ञ इंजीनियरों और तकनीकी उपकरणों को तुरंत आपदा स्थल पर तैनात करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि बचाव कार्य में तेज़ी लाई जा सके।
तीस्ता स्टेज VI परियोजना और सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल
एनएचपीसी की तीस्ता स्टेज VI जलविद्युत परियोजना सिक्किम के बुनियादी ढांचे और बिजली उत्पादन के लिहाज़ से एक अत्यंत महत्वपूर्ण और महत्वाकांक्षी परियोजना है। हालांकि, तीस्ता नदी घाटी का यह पूरा इलाका भौगोलिक दृष्टि से अत्यधिक संवेदनशील (Ecologically Sensitive & Seismic Zone) माना जाता है।
इस घटना ने हिमालयी क्षेत्र में टनलिंग और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स के दौरान अपनाए जाने वाले सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश और भूस्खलन की आशंका हमेशा बनी रहती है, लेकिन टनल के भीतर गैस डिटेक्शन सिस्टम, इमरजेंसी एस्केप रूट और वेंटिलेशन की उचित व्यवस्था न होना या भूगर्भीय गैसों के अचानक रिसाव का पहले से आकलन न कर पाना एक बड़ी खामी के रूप में देखा जा रहा है।
युद्धस्तर पर जारी है रेस्क्यू ऑपरेशन
सिक्किम के नामची में हुई यह घटना एक तरफ जहाँ 8 श्रमिकों की मौत का गहरा शोक छोड़ गई है, वहीं दूसरी ओर सुरंग के भीतर अभी भी उम्मीद की किरण तलाश रहे बचाव दल के लिए समय से मुकाबला करने जैसी स्थिति है। एनडीआरएफ, राज्य पुलिस, एनएचपीसी के विशेषज्ञों और स्थानीय प्रशासन की संयुक्त टीमें ऑक्सीजन सिलेंडर और आधुनिक मलबे हटाने वाले उपकरणों के साथ टनल का रास्ता साफ करने में जुटी हुई हैं। प्राथमिकता यही है कि सुरंग के अंदर फंसे बाकी श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाला जाए और गैस के असर को कम करने के लिए तुरंत प्रभावी कदम उठाए जाएं।