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आईपीएल स्टार शशांक सिंह ने कुक द्वारा लगाए गए बंधक बनाने और मारपीट के आरोपों का जवाब दिया। जानिए क्रिकेटर ने इसे साजिश क्यों बताया।
आईपीएल में पंजाब किंग्स के लिए शानदार प्रदर्शन करने वाले क्रिकेटर शशांक सिंह इस समय एक गंभीर विवाद में फंस गए हैं। उन पर एक कुक (रसोइया) को बंधक बनाने, मारपीट करने और अभद्र व्यवहार करने के आरोप लगे हैं। यह मामला तब सामने आया जब विपेन्द्र सिंह तोमर नाम के एक व्यक्ति ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि शशांक सिंह के घर काम छोड़ने के दौरान उनके साथ न केवल मौखिक दुर्व्यवहार किया गया, बल्कि उन्हें बंधक बनाकर मारपीट भी की गई। हालांकि, शशांक सिंह ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है और मामले को एक सोची-समझी साजिश बताया है।
कुक के गंभीर आरोप और पुलिस शिकायत
31 वर्षीय कुक विपेन्द्र सिंह तोमर का दावा है कि शशांक सिंह के घर पर उनके साथ अमानवीय व्यवहार हुआ। तोमर के अनुसार, जब उन्होंने काम छोड़ने का फैसला किया, तो स्थिति तनावपूर्ण हो गई। उनका आरोप है कि शशांक ने उनका फोन छीन लिया और उनसे उन तीन दिनों के भोजन के पैसे मांगे जो उन्होंने उनके घर पर खाया था। तोमर ने यह भी आरोप लगाया है कि क्रिकेटर और उनके ड्राइवर ने उनके साथ मारपीट की। इस मामले में पुलिस द्वारा किए गए मेडिकल परीक्षण में तोमर के शरीर पर चोट के निशान भी पाए गए हैं, जिससे मामला और भी गंभीर हो गया है।
शशांक सिंह का बचाव: ‘वह कुक नहीं, चोरी की मंशा से आया था’
इन आरोपों का जवाब देते हुए शशांक सिंह ने अपना पक्ष रखा है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्होंने कभी किसी को बंधक नहीं बनाया और न ही मारपीट की। शशांक ने दावा किया कि विपेन्द्र सिंह तोमर वास्तव में एक ‘कुक’ था ही नहीं। उन्होंने कहा, “वह हमारे पास कुक बनकर आया था, लेकिन उसे खाना बनाना बिल्कुल नहीं आता था। वह अपना ज्यादातर समय घर की वीडियो बनाने और फोटो खींचने में बिताता था। उसने यहां तक कि मेरे निजी कमरे में भी प्रवेश करने की कोशिश की।” शशांक के मुताबिक, उनके व्यवहार को देखते हुए उन्हें शक है कि वह व्यक्ति चोरी के इरादे से उनके घर में घुसा था। उन्होंने राहत की सांस लेते हुए कहा कि फिलहाल घर से कुछ भी चोरी होने की पुष्टि नहीं हुई है।
‘निजी वीडियो’ और विवाद की असल जड़
शशांक सिंह ने बताया कि विवाद तब शुरू हुआ जब उनकी मां ने कुक को घर के अंदर वीडियो और फोटो लेते हुए पकड़ा। शशांक ने कहा, “उसके फोन में घर की कई निजी तस्वीरें और वीडियो थे, इसलिए मेरी मां ने उससे उन्हें डिलीट करने के लिए कहा। जब हमने उसे पकड़ा, तो मेरी बहन ने पुलिस को बुलाने का सुझाव दिया था, लेकिन उसने हमसे विनती की और हमने उसे छोड़ दिया।” शशांक का मानना है कि यह सब उन्हें बदनाम करने की एक कोशिश है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले को लेकर अभी तक पुलिस ने उनसे संपर्क नहीं किया है।
बदनामी का डर या हकीकत?
इस विवाद ने सोशल मीडिया पर भी बहस छेड़ दी है। एक तरफ क्रिकेटर की छवि का सवाल है, तो दूसरी तरफ एक गरीब कर्मचारी की आपबीती। शशांक सिंह का कहना है कि एक प्रसिद्ध खिलाड़ी होने के नाते उन पर इस तरह के आरोप लगाना आसान होता है ताकि उन्हें सार्वजनिक रूप से बदनाम किया जा सके। उनके बयानों से ऐसा लगता है कि वे अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं और उन्हें लगता है कि कुक के इरादे नेक नहीं थे। वहीं, दूसरी ओर तोमर के आरोपों और मेडिकल रिपोर्ट में पाई गई चोटों के निशान पुलिस जांच के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी हो सकते हैं।
जांच का इंतजार
यह मामला इस समय जांच का विषय है। हालांकि शशांक ने सभी आरोपों को नकारा है, लेकिन पुलिस की ओर से अभी तक आधिकारिक तौर पर क्रिकेटर का बयान नहीं लिया गया है। किसी भी सार्वजनिक हस्ती के लिए ऐसे आरोप न केवल उनके करियर को प्रभावित कर सकते हैं, बल्कि प्रशंसकों के बीच उनकी छवि को भी नुकसान पहुँचाते हैं। अब यह पुलिस जांच पर निर्भर करता है कि सच क्या है—क्या वास्तव में कुक चोरी की मंशा से आया था या क्रिकेटर ने अपनी शक्ति और रुतबे का इस्तेमाल करके एक कर्मचारी को प्रताड़ित किया? आने वाले समय में पुलिसिया जांच और सबूत ही इस विवाद का पटाक्षेप करेंगे। फिलहाल, शशांक सिंह के लिए यह कठिन समय है, और उन्हें इस विवाद से उबरने के लिए कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा।