Table of Contents
शेयर बाजार अपडेट: सेंसेक्स 79,000 के पार और निफ्टी में 130 अंकों की तेजी। जानें एशियाई बाजारों और ईरान-अमेरिका तनाव का भारतीय बाजार पर क्या असर पड़ा।
भारतीय शेयर बाजार के लिए मंगलवार की सुबह खुशियां लेकर आई। अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम की समय सीमा से पहले समझौते की उम्मीदों और एशियाई बाजारों में सकारात्मक रुख के चलते सेंसेक्स (Sensex) और निफ्टी 50 (Nifty 50) बढ़त के साथ खुले।
बाजार का ताजा हाल
कारोबार की शुरुआत में निफ्टी 50 लगभग 0.55 प्रतिशत या 130 अंकों की तेजी के साथ 24,494 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। वहीं, बीएसई सेंसेक्स 0.63 प्रतिशत या 494 अंकों की उछाल के साथ 79,000 के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया।
टॉप गेनर्स: निफ्टी 50 इंडेक्स में एशियाई पेंट्स (Asian Paints), अडानी पोर्ट्स (Adani Ports) और ट्रेंट (Trent) सबसे ज्यादा बढ़त बनाने वाले शेयरों में शामिल रहे।
ब्रॉडर मार्केट्स और सेक्टोरल प्रदर्शन
बेंचमार्क इंडेक्स की तुलना में ब्रॉडर मार्केट्स (मिडकैप और स्मॉलकैप) ने ज्यादा बेहतर प्रदर्शन किया:
- निफ्टी मिडकैप: 0.80% की बढ़त।
- निफ्टी स्मॉलकैप: 0.92% की तेजी।
- सेक्टर का हाल: रियल्टी, पीएसयू बैंक और मीडिया सेक्टर के शेयरों में आज जबरदस्त खरीदारी देखी जा रही है। दूसरी ओर, आईटी (IT) और फार्मा (Pharma) सेक्टर के शेयरों में सुस्ती का माहौल है।
वैश्विक संकेतों का असर
एशिया-प्रशांत क्षेत्र के अधिकांश बाजारों में मंगलवार सुबह तेजी का रुख रहा। दक्षिण कोरिया का कोस्पी (Kospi) 1.70% की बढ़त के साथ सबसे आगे रहा, जबकि जापान का निक्केई 225 और हांगकांग का हेंग सेंग भी क्रमशः 1.11% और 0.23% बढ़त के साथ कारोबार कर रहे हैं।
- कच्चा तेल: जिंस बाजार (Commodities) में ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 0.47% गिरकर $95.03 प्रति बैरल पर आ गया है, क्योंकि बाजार अमेरिका और ईरान के बीच आ रहे विरोधाभासी संकेतों का आकलन कर रहा है।
भू-राजनीतिक तनाव अब भी बरकरार
बाजार में तेजी के बावजूद भू-राजनीतिक अनिश्चितता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने ‘X’ पर एक पोस्ट में कहा कि तेहरान धमकियों के बीच बातचीत का समर्थन नहीं करता और जरूरत पड़ने पर स्थिति को और बिगाड़ने के लिए तैयार है। इससे पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि यदि समय सीमा से पहले समझौता नहीं हुआ, तो सैन्य तनाव फिर से बढ़ सकता है।